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AI से बच्चों को दूर रखना चाहिए या नहीं? दुनिया में सख्ती, भारत में बढ़ रहा इस्तेमाल

On: जून 22, 2026 7:24 अपराह्न
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AI से बच्चों को दूर रखना चाहिए या नहीं? दुनिया में सख्ती, भारत में बढ़ रहा इस्तेमाल
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नई दिल्ली, 22 जून 2026 (हरियाणा न्यूज पोस्ट)। यूट्यूब, इंस्टाग्राम, चैटजीपीटी और दूसरे जेनरेटिव AI टूल्स अब बच्चों की रोजमर्रा की दुनिया का हिस्सा बन चुके हैं, लेकिन इसी बीच दुनिया के कई देशों ने सवाल उठाना शुरू कर दिया है कि क्या कम उम्र के बच्चों को एल्गोरिदम और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रभाव से बचाने की जरूरत है। बहस तेज हो गई।

भारत में 15 साल से कम उम्र के 18 करोड़ से अधिक बच्चे नियमित रूप से स्मार्टफोन का इस्तेमाल कर रहे हैं। ये बच्चे केवल वीडियो देखने तक सीमित नहीं हैं। सोशल मीडिया चलाते हैं। AI टूल्स इस्तेमाल करते हैं। सवाल बढ़ रहे हैं।

दुनिया क्यों लगा रही है रोक?

नॉर्वे ने सोशल मीडिया इस्तेमाल की न्यूनतम आयु 16 वर्ष करने का प्रस्ताव रखा है। टेक कंपनियों को उम्र सत्यापन की कानूनी जिम्मेदारी देने की तैयारी की गई है। सरकार का तर्क साफ है। पहले पढ़ाई, फिर तकनीक।

ऑस्ट्रेलिया भी 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया और एल्गोरिदम आधारित मंचों पर सख्त प्रतिबंध लागू कर चुका है। ध्यान क्षमता, मानसिक स्वास्थ्य और ऑनलाइन सुरक्षा को इसके पीछे प्रमुख कारण माना जा रहा है।

यूरोपीय संघ ने डिजिटल सर्विसेज एक्ट (DSA) के तहत बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को प्राथमिकता दी है। कंपनियां बच्चों की प्रोफाइलिंग नहीं कर सकतीं। लक्षित विज्ञापन भी नहीं दिखा सकतीं। यूरोपियन कमीशन उम्र सत्यापन के लिए विशेष ऐप तक जारी कर चुका है।

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फ्रांस और डेनमार्क स्कूलों को मोबाइल-मुक्त क्षेत्र बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। स्क्रीन टाइम पर नियंत्रण बढ़ रहा है।

भारत में तस्वीर बिल्कुल अलग

भारत दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल बाजारों में शामिल है। DataReportal के आंकड़ों के अनुसार देश में 1.06 अरब से अधिक मोबाइल कनेक्शन और 1.03 अरब इंटरनेट उपयोगकर्ता हैं।

IAMAI-Kantar की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 95.8 करोड़ सक्रिय इंटरनेट उपयोगकर्ता हैं। 94 प्रतिशत से ज्यादा लोग इंटरनेट चलाने के लिए स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं।

15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के 95.5 प्रतिशत ग्रामीण और 97.6 प्रतिशत शहरी युवाओं के पास स्मार्टफोन मौजूद है। एक भारतीय उपयोगकर्ता औसतन हर महीने 37GB डेटा खर्च करता है। दुनिया में सबसे ज्यादा।

बच्चों को AI सिखा रही सरकार

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भारत सरकार AI को शिक्षा का हिस्सा बनाने पर जोर दे रही है। अटल इनोवेशन मिशन और इंडियाAI मिशन के तहत 13 से 21 वर्ष के युवाओं के लिए YUVAi ग्लोबल यूथ चैलेंज जैसे कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।

शिक्षा मंत्रालय ने ‘AI फॉर स्कूल्स’ पहल के जरिए सीबीएसई के 18 हजार से ज्यादा स्कूलों में AI आधारित पाठ्यक्रम शुरू किया है। इसका दायरा अब निचली कक्षाओं तक बढ़ाया जा रहा है।

सबसे बड़ी चिंता क्या है?

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में डेटा सुरक्षा के नियम मौजूद हैं, लेकिन बच्चों के मानसिक विकास, व्यवहार और जेनरेटिव AI के प्रभाव को लेकर अलग व्यापक नीति नहीं है। हरियाणा न्यूज़ पोस्ट पर ये भी पढ़ें: UIDAI ने बंद किया पुराना mAadhaar App, अब नए आधार ऐप से घर बैठे बदलें मोबाइल नंबर और एड्रेस

उम्र सत्यापन भी चुनौती बना हुआ है। कोई भी बच्चा गलत जन्मतिथि दर्ज कर सोशल मीडिया या AI मंचों तक पहुंच बना सकता है। निगरानी मुश्किल।

DPDP नियमों के तहत 18 साल से कम उम्र के बच्चों का डेटा प्रोसेस करने से पहले माता-पिता की सत्यापित सहमति जरूरी होगी। कंपनियों को बच्चों को लक्षित विज्ञापन दिखाने की भी अनुमति नहीं होगी।

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AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। IAMAI के अनुसार देश के 44 प्रतिशत इंटरनेट उपयोगकर्ता किसी न किसी रूप में AI फीचर्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। 10 करोड़ से ज्यादा सक्रिय AI उपयोगकर्ता मौजूद हैं। 15 से 24 वर्ष आयु वर्ग इस सूची में सबसे आगे है।

यहीं से बहस शुरू होती है। दुनिया बच्चों को AI से दूर रखने के नियम बना रही है, जबकि भारत उन्हें AI के साथ भविष्य के लिए तैयार करने में जुटा हुआ है।

मौलिक गुप्ता

मौलिक गुप्ता एक प्रतिभाशाली और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 8 वर्षों से एंटरटेनमेंट और ट्रेंडिंग टॉपिक्स पर आकर्षक और ताज़ा खबरें लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ बॉलीवुड, टीवी, सेलिब्रिटी अपडेट्स, वायरल ट्रेंड्स और सोशल मीडिया की हलचल को कवर करती हैं, जो पाठकों को मनोरंजन की दुनिया से जोड़े रखती हैं। मौलिक का लेखन शैली जीवंत, रोचक और समयानुकूल है, जो युवा और विविध पाठकों को आकर्षित करता है। वे Haryananewspost.com न्यूज़ प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय हैं, जहाँ उनके लेख ट्रेंडिंग विषयों पर गहरी अंतर्दृष्टि और मनोरंजक जानकारी प्रदान करते हैं।

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