नई दिल्ली, 22 जून, 2026 (mAadhaar App)। आधार कार्ड इस्तेमाल करने वाले करोड़ों नागरिकों के लिए बेहद जरूरी खबर सामने आ रही है। यूआईडीएआई (UIDAI) ने पुराने पड़ चुके mAadhaar App को अब हमेशा के लिए पूरी तरह खत्म करने की आधिकारिक घोषणा कर दी है। विभाग की ओर से लगातार अलर्ट जारी कर लोगों को नए आधार ऐप पर स्विच करने की सख्त हिदायत दी जा रही है। अब डिजिटल काउंटर पर पुरानी व्यवस्था से कोई काम नहीं होगा। ठप हो गईं पुरानी सेवाएं।
घर बैठे अपनी सहूलियत से आधार कार्ड में मोबाइल नंबर या घर का पता ठीक करने की इच्छा रखने वाले लोग अब सीधे गूगल प्ले स्टोर का रुख कर रहे हैं। इस नए ऐप को इंस्टॉल करने के बाद आम जनता को बिना किसी आधार सेंटर के चक्कर काटे सीधे अपने स्मार्टफोन से प्रोफाइल मैनेज करने की सीधी छूट मिल गई है। दफ्तरों की भागदौड़ से बड़ी राहत मिली है।
पूरी पंजीकरण प्रक्रिया बेहद आसान है जिसके तहत ऐप डाउनलोड करके सबसे पहले अपना [Aadhaar Redacted] दर्ज करना होता है। इसके तुरंत बाद स्क्रीन पर सिम सेलेक्ट करने का विकल्प आता है जिससे मोबाइल नंबर का वेरिफिकेशन पूरा होते ही यूजर को अपना फेस ऑथेंटिकेशन टास्क क्लियर करना पड़ता है। सुरक्षा चक्र मजबूत करने के लिए 6 अंकों का एक सीक्रेट पिन सेट करते ही यूजर का डिजिटल प्रोफाइल डैशबोर्ड लाइव हो जाता है। होम पेज पर ही वर्चुअल कार्ड दिखने लगता है। हरियाणा न्यूज़ पोस्ट पर ये भी पढ़ें: Vitamin D Day: सूरज की किरणों में नहीं होता सीधा विटामिन डी, जानिए त्वचा के भीतर कैसे एक्टिव होता है असली खेल
अपडेट की गई नई सेवाओं की बात करें तो इसमें यूजर को स्पेशल कॉन्टैक्ट कार्ड, नजदीकी आधार सेंटर की लाइव लोकेशन खोजने और जरूरी काम के लिए एडवांस अपॉइंटमेंट बुक करने की हाईटेक सुविधाएं इनबिल्ट मिल रही हैं। इस खास डिजिटल कॉन्टैक्ट कार्ड के जरिए लोग अपना नाम और फोन नंबर एक सुरक्षित क्यूआर कोड के रूप में दूसरों के साथ सीधा साझा कर सकते हैं। इस कोड को फोन गैलरी में सेव भी किया जा सकता है। आसान हुआ डेटा शेयरिंग।
नया ऐप इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं के लिए सबसे बड़ा फायदा यह है कि वे एड्रेस चेंज या फोन नंबर लिंकिंग की अपनी लाइव रिक्वेस्ट को खुद अपने हाथों से ट्रैक कर सकते हैं। इन दोनों ही ऑनलाइन सुधारों के लिए विभाग ने 75 रुपये की प्रोसेसिंग फीस तय कर दी है। इस ऑनलाइन आवेदन को सिस्टम में पूरी तरह अपडेट होने और नए डेटा को सर्वर पर लाइव होने में न्यूनतम 30 दिन का समय लगता है। एक महीना लगेगा वक्त।
ट्रैकिंग मैकेनिज्म को समझने के लिए सबसे पहले यूजर को फिंगरप्रिंट या अपने पर्सनल पिन के जरिए नए आधार ऐप को अनब्लॉक करना होता है। स्क्रीन के निचले हिस्से में मौजूद नेविगेशन बार पर जाते ही ‘Services’ का एक सीधा टैब दिखाई देता है। इस पर उंगली रखते ही ‘Track My Requests’ का विकल्प सामने आ जाता है। स्क्रीन पर रिक्वेस्ट दिख जाएगी।
इस एक्टिवेटेड रिक्वेस्ट पर क्लिक करते ही यूजर के सामने कुल पांच अहम पड़ाव खुलकर आते हैं जिनमें ड्राफ्ट, पेमेंट, वेरिफिकेशन, वैलिडेशन और फाइनल कंप्लीटेड शामिल हैं। जैसे ही सिस्टम इन पांचों चरणों की कानूनी जांच प्रक्रिया को एक-एक करके हरी झंडी दिखाता है, वैसे ही यूजर का नया पता और मोबाइल नंबर डेटाबेस में दर्ज हो जाता है।










