ब्रेकिंग न्यूज़मौसमक्रिकेटऑटोमनोरंजनअपराधट्रेंडिंगकृषिलाइफस्टाइलराशिफलहरियाणा

Utpanna Ekadashi Vrat Katha: भगवान विष्णु के शरीर से प्रकट हुईं देवी ने मुर दैत्य का किया वध

On: November 15, 2025 9:05 AM
Follow Us:
Utpanna Ekadashi Vrat Katha: भगवान विष्णु के शरीर से प्रकट हुईं देवी ने मुर दैत्य का किया वध
Join WhatsApp Group

Utpanna Ekadashi Vrat Katha Lord Vishnu: उत्पन्ना एकादशी व्रत कथा (हिंदी में): सतयुग की बात है। मुर नाम का एक भयंकर दैत्य था जो इतना ताकतवर था कि उसने इंद्र, सूर्य, वायु, अग्नि – सारे देवताओं को हरा दिया और स्वर्ग पर कब्जा जमा लिया। बेचारे देवता इधर-उधर भटकने लगे।

आखिरकार सब भगवान शिव के पास पहुंचे और सारी व्यथा सुनाई। शिवजी ने कहा, “मेरा कुछ नहीं हो सकता, तुम भगवान विष्णु की शरण में जाओ।”

Utpanna Ekadashi Vrat Katha

सब देवता क्षीरसागर पहुंचे। वहां भगवान विष्णु योगनिद्रा में लेटे थे। देवताओं ने हाथ जोड़कर लंबी स्तुति की – “हे मधुसूदन! हे संसार के पालनहार! आप ही ब्रह्मा, सूर्य, चंद्र, अग्नि – सब कुछ हैं।

Boss Scam Alert: WhatsApp पर CEO बनकर मांग रहे पैसे, I4C ने कंपनियों को किया सतर्क
Boss Scam Alert: WhatsApp पर CEO बनकर मांग रहे पैसे, I4C ने कंपनियों को किया सतर्क

दैत्यों ने हमें स्वर्ग से निकाल दिया, हम आपकी शरण में आए हैं।” इंद्र ने बताया कि मुर नाम का राक्षस बहुत शक्तिशाली है। वो खुद सूर्य बनकर रोशनी देता है, खुद बादल बनकर बरसता है। कोई उसे हरा नहीं पाता।

भगवान विष्णु

भगवान विष्णु ने कहा, “चलो, मैं अभी उसका अंत करता हूं।” फिर सब देवताओं के साथ चंद्रावती नगरी पहुंचे। वहां मुर अपनी सेना के साथ गरज रहा था। उसकी गर्जना सुनकर देवता डर गए। भगवान आगे बढ़े तो मुर ने उन पर भी सारे हास्त्र-शस्त्र छोड़ दिए। भगवान ने अपने बाणों से सारी सेना को सर्प की तरह बींध डाला। अब सिर्फ मुर बचा।

मुर और भगवान के बीच भयंकर युद्ध हुआ। भगवान के तीखे बाण उसके लिए फूल जैसे थे। उसका शरीर छिन्न-भिन्न हो गया, फिर भी वो लड़ता रहा। दोनों में मल्लयुद्ध हुआ। कहते हैं दस हजार साल तक युद्ध चलता रहा! आखिर भगवान थक गए और बद्रिकाश्रम की हेमवती गुफा में आराम करने चले गए। गुफा 12 योजन लंबी थी और सिर्फ एक मुंह था।

रक्षाबंधन के दिन लगेगा साल का आखिरी चंद्र ग्रहण, क्या राखी के शुभ मुहूर्त पर पड़ेगा असर?
रक्षाबंधन के दिन लगेगा साल का आखिरी चंद्र ग्रहण, क्या राखी के शुभ मुहूर्त पर पड़ेगा असर?

मुर ने मौका देखा और भगवान को सोया समझकर मारने दौड़ा। तभी भगवान विष्णु के शरीर से एक अत्यंत उज्ज्वल कन्या प्रकट हुईं। उस देवी ने मुर को ललकारा और भयंकर युद्ध किया। आखिरकार देवी ने मुर दैत्य का वध कर दिया। जब भगवान जागे तो सारी बात पता चली। उन्होंने देवी से कहा, “तुम एकादशी तिथि को मेरे शरीर से उत्पन्न हुई हो, इसलिए तुम उत्पन्ना एकादशी कहलाओगी। जो भी तुम्हारी पूजा करेगा, उसे मेरी कृपा और मोक्ष दोनों मिलेंगे।”

तब से उत्पन्ना एकादशी का व्रत रखने की परंपरा चली आ रही है। इस दिन व्रत करने से सारे पाप नष्ट होते हैं और भगवान विष्णु की विशेष कृपा मिलती है।

Instagram Reels बिना बार-बार स्क्रीन छुए कैसे देखें? जानिए आसान तरीका
Instagram Reels बिना बार-बार स्क्रीन छुए कैसे देखें? जानिए आसान तरीका

अमित गुप्ता

पत्रकारिता में पिछले 30 वर्षों का अनुभव। दैनिक भास्कर, अमर उजाला में पत्रकारिता की। दैनिक भास्कर में 20 वर्षों तक काम किया। अब अपने न्यूज पोर्टल हरियाणा न्यूज पोस्ट (Haryananewspost.com) पर बतौर संपादक काम कर रहा हूं। खबरों के साथ साथ हरियाणा के हर विषय पर पकड़। हरियाणा के खेत खलियान से राजनीति की चौपाल तक, हरियाणा सरकार की नीतियों के साथ साथ शहर के विकास की बात हो या हर विषयवस्तु पर लिखने की धाकड़ पकड़। म्हारा हरियाणा, जय हरियाणा।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment