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Varuthini Ekadashi vrat katha वरुथिनी एकादशी 2025: भगवान विष्णु की कृपा के लिए व्रत कथा पढ़ें, पापों से मुक्ति और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद

On: अप्रैल 24, 2025 10:49 अपराह्न
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Varuthini Ekadashi vrat katha वरुथिनी एकादशी 2025: भगवान विष्णु की कृपा के लिए व्रत कथा पढ़ें, पापों से मुक्ति और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद
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Varuthini Ekadashi vrat katha 2025 in Hindi: वैशाख माह के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली वरुथिनी एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित एक पवित्र व्रत है, जो भक्तों को पापों से मुक्ति और सुख-समृद्धि का वरदान देता है। इस साल यह व्रत 25 अप्रैल 2025 को मनाया जाएगा।

इस दिन व्रत के साथ वरुथिनी एकादशी की कथा पढ़ने या सुनने से पूजा पूर्ण होती है और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। आइए, इस व्रत की कथा और इसके महत्व को जानते हैं, जो आपके जीवन को आध्यात्मिक और सांसारिक सुखों से भर सकता है।

Varuthini Ekadashi vrat katha: वरुथिनी एकादशी की पौराणिक कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, प्राचीन काल में नर्मदा नदी के तट पर राजा मांधाता का धर्मपरायण राज्य था। वे अपनी प्रजा की सेवा में तत्पर रहते थे और भक्ति, तप, और धर्म में गहरी आस्था रखते थे। एक दिन वे जंगल में तपस्या करने गए और गहन ध्यान में लीन हो गए।

तभी एक जंगली भालू ने उन पर हमला कर दिया और उनके पैर को पकड़कर उन्हें घसीटने लगा। राजा मांधाता ने कोई प्रतिकार नहीं किया और भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए अपनी रक्षा की प्रार्थना की।

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भालू राजा को जंगल के और गहराई में ले गया, लेकिन तभी भगवान विष्णु प्रकट हुए और उन्होंने भालू का वध कर राजा के प्राण बचाए। हालांकि, हमले में राजा का पैर गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया, जिससे वे बहुत दुखी हुए। तब भगवान विष्णु ने उन्हें बताया कि यह उनके पिछले जन्मों के कर्मों का फल है।

उन्होंने राजा को सलाह दी कि वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी, यानी वरुथिनी एकादशी, को मथुरा में भगवान वराह की विधिवत पूजा करें। इस व्रत के प्रभाव से उन्हें नया शरीर और स्वास्थ्य प्राप्त होगा।

राजा मांधाता ने भगवान की आज्ञा का पालन किया। उन्होंने मथुरा में वरुथिनी एकादशी का व्रत रखा, भगवान वराह की पूजा की, और व्रत का पारण किया। इस व्रत के पुण्य से उन्हें नया शरीर मिला, और वे अपने राज्य लौटकर सुखी जीवन जीने लगे।

मृत्यु के बाद उन्हें स्वर्ग और मोक्ष की प्राप्ति हुई। यह कथा बताती है कि वरुथिनी एकादशी का व्रत और कथा पाठ करने से भक्तों के पाप नष्ट होते हैं, और उन्हें भगवान विष्णु की कृपा से सुख, समृद्धि, और मोक्ष मिलता है।

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वरुथिनी एकादशी का महत्व

वरुथिनी एकादशी का व्रत भगवान विष्णु की भक्ति का प्रतीक है, जो भक्तों को सभी प्रकार के पापों से मुक्ति दिलाता है। यह व्रत जीवन में सुख, समृद्धि, और शांति लाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान वराह की पूजा और व्रत कथा का पाठ करने से भक्तों के पिछले जन्मों के कर्मों का प्रभाव कम होता है, और उन्हें आध्यात्मिक उन्नति मिलती है।

यह व्रत भय, संकट, और शत्रुओं से मुक्ति दिलाता है। वैवाहिक जीवन में सौहार्द, संतान सुख, और धन-वैभव की कामना करने वालों के लिए भी यह व्रत विशेष फलदायी है।

व्रत और पूजा की सरल विधि

वरुथिनी एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें। भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। घर के पूजा स्थल को साफ करें और भगवान विष्णु या वराह स्वरूप की मूर्ति स्थापित करें। तुलसी पत्र, चंदन, फूल, और फल अर्पित करें। घी का दीपक जलाएं और विष्णु सहस्रनाम या “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।

वरुथिनी एकादशी की कथा पढ़ें या सुनें। दिनभर सात्विक भोजन करें और अगले दिन द्वादशी को पारण करें। यह विधि सरल है, लेकिन पूरी श्रद्धा से करने पर असीम फल देती है।

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वरुथिनी एकादशी का व्रत और कथा आपके जीवन को सुख, शांति, और समृद्धि से भर सकती है। इस पवित्र दिन पर भगवान विष्णु की भक्ति में लीन होकर अपनी मनोकामनाएं पूर्ण करें।

नोट: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। कृपया अपनी श्रद्धा और विश्वास के अनुसार इसका पालन करें।

मोनिका गुप्ता

मोनिका गुप्ता एक अनुभवी लेखिका हैं, जो पिछले 10 वर्षों से लाइफस्टाइल, एंटरटेनमेंट, ट्रेंडिंग टॉपिक्स और राशिफल पर हिंदी में आकर्षक और जानकारीपूर्ण लेख लिख रही हैं। उनकी रचनाएं पाठकों को दैनिक जीवन की सलाह, मनोरंजन की दुनिया की झलक, वर्तमान ट्रेंड्स की गहराई और ज्योतिषीय भविष्यवाणियों से जोड़ती हैं। मोनिका जी का लेखन सरल, रोचक और प्रासंगिक होता है, जो लाखों पाठकों को प्रेरित करता है। वे विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और न्यूज़ पोर्टल्स (Haryananewspost.com) पर सक्रिय हैं, जहाँ उनकी कलम से निकले लेख हमेशा चर्चा का विषय बन जाते हैं।

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