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हरियाणा वेदर अलर्ट: ओलावृष्टि से गेहूं की फसल तबाह, 3 अप्रैल से फिर भारी बारिश की चेतावनी

On: अप्रैल 1, 2026 11:58 पूर्वाह्न
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हरियाणा वेदर अलर्ट: ओलावृष्टि से गेहूं की फसल तबाह, 3 अप्रैल से फिर भारी बारिश की चेतावनी
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हिसार. हरियाणा के आसमान से बरसी आफत ने अन्नदाता की सालभर की मेहनत को मिट्टी में मिला दिया है। बुधवार को प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में हुए अचानक मौसम परिवर्तन और तीव्र ओलावृष्टि ने विशेष रूप से हिसार, सिरसा, भिवानी और रेवाड़ी के ग्रामीण अंचलों में भारी तबाही मचाई है। खेतों में कटाई के लिए पूरी तरह तैयार खड़ी गेहूं की फसल तेज हवाओं के दबाव और ओलों के प्रहार से जमीन पर धराशायी हो गई है। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, इस स्थिति (Lodging) में गेहूं का दाना काला पड़ने और वजन कम होने का खतरा बढ़ गया है, जिससे पैदावार में भारी गिरावट आना तय है।

3 अप्रैल से फिर संकट के आसार

इस बेमौसम बरसात ने मार्च के अंत में बढ़ती गर्मी पर तो लगाम लगा दी है, लेकिन जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। राज्य के औसत न्यूनतम तापमान में 1.7 डिग्री सेल्सियस की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे लोगों को अप्रैल की शुरुआत में भी गरम चादरें निकालने पर मजबूर होना पड़ा है। वर्तमान में हरियाणा का अधिकतम तापमान 32.5 डिग्री और न्यूनतम 17.1 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है। हालांकि, राहत की उम्मीद अभी कम है। मौसम विशेषज्ञ डॉ. चंद्रमोहन के अनुसार, 1 और 2 अप्रैल को उत्तर हरियाणा में छिटपुट बूंदाबांदी के बाद 3 से 5 अप्रैल के दौरान एक नया और अधिक शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा, जो दोबारा आंधी और बारिश का दौर लेकर आएगा।

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सब्जियों और सरसों पर भी पड़ा बुरा असर

बारिश और ओलों की मार केवल अनाज तक सीमित नहीं रही है। महेंद्रगढ़ और भिवानी जैसे जिलों में सरसों की पकी हुई फसल की फलियां झड़ गई हैं, जिससे तेल की मात्रा और गुणवत्ता प्रभावित होगी। इसके अतिरिक्त, बेल वाली सब्जियां जैसे ककड़ी, घीया और तोरई के फूल झड़ने से बागवानी करने वाले किसानों को दोहरा नुकसान उठाना पड़ा है। मंडियों में भी तिरपाल और जल निकासी की समुचित व्यवस्था न होने के कारण खुले में पड़ी सरसों की बोरियां भीगने की खबरें आ रही हैं। सरकार ने गिरदावरी (फसल नुकसान का आकलन) के आदेशों के संकेत दिए हैं, लेकिन किसान फिलहाल आसमान की ओर देख रहे हैं कि कब यह आफत थमेगी।

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अमनदीप सिंह

अमनदीप सिंह एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 10 वर्षों से मौसम और कृषि से संबंधित खबरों पर गहन और जानकारीपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ मौसम के पूर्वानुमान, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों, योजनाओं और चुनौतियों को उजागर करती हैं, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। अमनदीप का लेखन सरल, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित है, जो कृषि समुदाय को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।

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