चंडीगढ़. हरियाणा के आसमान पर बादलों के डेरे और रुक-रुक कर हो रही बूंदाबांदी ने खेती-किसानी के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। मौसम विज्ञान केंद्र चंडीगढ़ ने आज और कल के लिए प्रदेश के बड़े हिस्से में ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी करते हुए गरज-चमक के साथ भारी ओलावृष्टि की चेतावनी दी है। पश्चिमी विक्षोभ और पाकिस्तान के ऊपर बने चक्रवातीय परिसंचरण (Cyclonic Circulation) के असर से हवाओं की गति 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। इस बदलते मिजाज ने न केवल तापमान में 2 से 4 डिग्री की गिरावट ला दी है, बल्कि उन किसानों की चिंता भी बढ़ा दी है जिनकी गेहूं और सरसों की फसल कटने की कगार पर है।
इन जिलों में सबसे ज्यादा खतरा
मौसम विभाग के ताजा बुलेटिन के अनुसार, उत्तर हरियाणा के पंचकूला, अंबाला, यमुनानगर और कुरुक्षेत्र में मध्यम से भारी बारिश के साथ तेज धूल भरी आंधी चलने की संभावना है। वहीं, दक्षिण और मध्य हरियाणा के जिले जिनमें महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, झज्जर, गुरुग्राम, फरीदाबाद और पलवल शामिल हैं, वहां ओलावृष्टि का सबसे अधिक प्रभाव देखा जा सकता है। मौसम विशेषज्ञ डॉ. चंद्रमोहन के मुताबिक, 30 और 31 मार्च को इस प्रणाली का असर अपने चरम पर रहेगा। इस दौरान खुले आसमान के नीचे काम करने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने और बिजली कड़कने के समय पेड़ों या बिजली के खंभों से दूर रहने की हिदायत दी गई है।
कटाई और भंडारण के लिए एडवाइजरी
यह बेमौसम बरसात ऐसे समय में आई है जब हरियाणा की मंडियों में सरसों की आवक शुरू हो चुकी है और गेहूं की बालियां पक कर तैयार हैं। तेज हवाओं के कारण गेहूं की फसल खेतों में बिछ (Lodging) सकती है, जिससे दानों की गुणवत्ता और पैदावार दोनों पर बुरा असर पड़ता है। कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि यदि फसल कट चुकी है, तो उसे तिरपाल या प्लास्टिक शीट से ढक कर रखें। मंडियों में भी खुले में रखी फसल को सुरक्षित करने के निर्देश दिए गए हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस समय बारिश से दानों में नमी बढ़ सकती है, जिससे सरकारी खरीद के समय किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
अप्रैल की शुरुआत में भी नहीं मिलेगी राहत
राहत की बात फिलहाल नजर नहीं आ रही है क्योंकि मौसम विभाग ने एक और पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के संकेत दिए हैं। 2 अप्रैल से हिमालयी क्षेत्रों में एक बार फिर बर्फबारी शुरू होगी, जिसका असर 3 से 5 अप्रैल के दौरान हरियाणा और दिल्ली-NCR के मैदानी इलाकों में दिखेगा। यानी अगले एक हफ्ते तक मौसम परिवर्तनशील बना रहेगा और बीच-बीच में तेज हवाओं का दौर जारी रह सकता है। तापमान में इस उतार-चढ़ाव से मौसमी बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है।













