डिजिटल डेस्क, चंडीगढ़ : मौसम विभाग ने ताजा पूर्वानुमान जारी करते हुए बताया है कि 31 जनवरी की रात से एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने वाला है। इसके चलते फरवरी की शुरुआत बारिश और गरज के साथ होगी।
हरियाणा के लोगों को अभी सर्दी के सितम से राहत मिलती नजर नहीं आ रही है। बीते दिनों हुई ओलावृष्टि और बारिश के बाद पूरे प्रदेश में ठिठुरन एक बार फिर बढ़ गई है। लोग सुबह के समय घनी धुंध और दिन भर चलने वाली बर्फीली हवाओं का सामना कर रहे हैं।
हिसार में लुढ़का पारा, 6 डिग्री की गिरावट
प्रदेश में ठंड का असर आंकड़ों में साफ दिखाई दे रहा है। मौसम विभाग के अनुसार हिसार जिला सबसे ज्यादा ठंडा रहा है। यहां बीते 24 घंटों के दौरान न्यूनतम तापमान में करीब 6.0 डिग्री सेल्सियस की भारी गिरावट दर्ज की गई है। आंकड़ों पर नजर डालें तो हिसार का अधिकतम तापमान 18.6 डिग्री सेल्सियस रहा जो सामान्य से 2.4 डिग्री कम है। वहीं न्यूनतम तापमान गिरकर 5.3 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया जो सामान्य से 2.1 डिग्री नीचे है। धूप निकलने के बावजूद सर्द हवाओं ने गलन बढ़ा दी है जिससे लोगों को दिन में भी गर्म कपड़ों का सहारा लेना पड़ रहा है।
1 और 2 फरवरी के लिए येलो अलर्ट
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि 31 जनवरी की रात से मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। एक नया पश्चिमी विक्षोभ यानी वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय हो रहा है। इसका सीधा असर 1 और 2 फरवरी को दिखाई देगा। मौसम विभाग ने भविष्यवाणी की है कि इस दौरान दक्षिण और पूर्वी हरियाणा के जिलों में मौसम खराब रहेगा। खासकर गुरुग्राम फरीदाबाद रेवाड़ी और नूंह जैसे इलाकों में गरज और चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की प्रबल संभावना है। विभाग ने इन इलाकों में 50 से 75 फीसदी तक बारिश होने का अनुमान जताया है।
धुंध ने थामी वाहनों की रफ्तार
मैदानी इलाकों में कोहरे का कहर भी जारी है। सुबह के समय दृश्यता यानी विजिबिलिटी घटकर महज 30 मीटर तक रह गई है। इसका सीधा असर यातायात व्यवस्था पर पड़ा है। जीटी रोड और नेशनल हाईवे पर गाड़ियां रेंगती हुई नजर आईं। रेलवे यातायात भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है और कई प्रमुख ट्रेनें अपने निर्धारित समय से दो से तीन घंटे की देरी से चल रही हैं। लंबे रूट की बसें भी कोहरे के कारण अपने गंतव्य पर देरी से पहुंच रही हैं जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
किसानों और आम जनता के लिए सलाह
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बारिश हल्की होती है तो यह गेहूं और सरसों की फसल के लिए फायदेमंद हो सकती है लेकिन अगर ओलावृष्टि हुई तो किसानों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बच्चों और बुजुर्गों को इस बदलते मौसम में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। सुबह और शाम के समय तापमान काफी कम रह सकता है इसलिए जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलें और वाहन चलाते समय फॉग लाइट्स का प्रयोग जरूर करें।












