हिसार. हरियाणा में शीतलहर का प्रकोप जारी है और हिसार में तापमान 1.5 डिग्री दर्ज हुआ है। 26 जनवरी की रात से पश्चिमी विक्षोभ के चलते बारिश और पाले की संभावना है।
पूरे हरियाणा में कड़ाके की ठंड ने लोगों का जीना मुहाल कर रखा है। पहाड़ों पर हो रही भारी बर्फबारी का सीधा असर अब मैदानी इलाकों में दिखाई दे रहा है। राज्य के कई हिस्सों में ‘कोल्ड डे’ जैसी स्थिति बनी हुई है। हालांकि दिन के समय धूप निकल रही है, लेकिन उत्तर दिशा से आ रही बर्फीली हवाओं के कारण धूप की तपिश बेअसर साबित हो रही है।
मौसम विभाग ने ताजा बुलेटिन जारी करते हुए बताया है कि आने वाले 48 घंटों में ठंड का यह प्रकोप और बढ़ सकता है। हिसार समेत कई जिलों में रात का तापमान जमाव बिंदु के करीब पहुंच गया है।
हिसार बना हरियाणा का सबसे ठंडा स्थान
बीते 24 घंटों के आंकड़ों पर नजर डालें तो हिसार राज्य का सबसे ठंडा जिला रहा। यहां न्यूनतम तापमान गिरकर मात्र 1.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया है। यह सामान्य तापमान से करीब 5.2 डिग्री कम है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार केवल एक दिन के भीतर रात के तापमान में 10.2 डिग्री सेल्सियस की भारी गिरावट दर्ज की गई है, जो चिंता का विषय है।
इसके अलावा दिन का अधिकतम तापमान भी सामान्य से नीचे लुढ़क कर 15.2 डिग्री सेल्सियस पर आ गया है। इस वजह से दिन और रात दोनों समय लोगों को भीषण सर्दी का सामना करना पड़ रहा है।
गणतंत्र दिवस की रात बदलेगा मौसम का मिजाज
मौसम विभाग ने जानकारी दी है कि 26 जनवरी की रात से एक नया पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) सक्रिय होने जा रहा है। हालांकि यह विक्षोभ थोड़ा कमजोर प्रकृति का है, लेकिन इसके प्रभाव से मौसम में बदलाव आना तय है।
इस सिस्टम के सक्रिय होने के कारण 27 और 28 जनवरी को हरियाणा के कई इलाकों में आसमान में बादल छाए रहेंगे और हल्की बूंदाबांदी होने की संभावना है। इस बारिश के बाद ठंड और कोहरे का असर फिर से बढ़ने के आसार हैं।
किसानों के लिए ऑरेंज अलर्ट और सलाह
हाड़ कंपाने वाली इस ठंड को देखते हुए मौसम विभाग ने राज्य के कई जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। कृषि विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि गिरता हुआ तापमान फसलों के लिए ‘पाला’ (Frost) की स्थिति पैदा कर सकता है। पाला पड़ने से सरसों और सब्जियों की फसल को भारी नुकसान हो सकता है।
अन्नदाताओं के लिए विशेष सलाह:
हल्की सिंचाई करें: तापमान कम होने पर खेतों में नमी बनाए रखना जरूरी है, इसलिए फसलों में हल्की सिंचाई करें।
धुआं करें: रात के समय हवा का रुख देखकर खेत की मेड़ों पर धुआं करें ताकि तापमान को नियंत्रित किया जा सके।
निगरानी रखें: खासकर सब्जी उत्पादक किसान पाले की आशंका को देखते हुए फसलों को ढकने का इंतजाम कर सकते हैं।
क्यों बढ़ रही है इतनी सर्दी
मौसम विज्ञानियों का कहना है कि हिमालय क्षेत्र में लगातार हो रही बर्फबारी के बाद वहां से चलने वाली ठंडी और शुष्क हवाएं सीधे मैदानी इलाकों तक पहुंच रही हैं। इन हवाओं की गति तेज होने के कारण धूप निकलने के बाद भी वातावरण गर्म नहीं हो पा रहा है। आने वाले दिनों में तापमान में और गिरावट आने की पूरी संभावना है।












