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चंडीगढ़ से सिरसा तक बदला मौसम, गर्म कपड़ों में दोबारा नजर आए लोग; जानें ताजा अपडेट

On: मार्च 21, 2026 1:39 अपराह्न
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चंडीगढ़ से सिरसा तक बदला मौसम, गर्म कपड़ों में दोबारा नजर आए लोग; जानें ताजा अपडेट
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चंडीगढ़ . हरियाणा में प्रचंड गर्मी के बीच मौसम ने अचानक यू-टर्न ले लिया है। लगातार हो रही बारिश, ओलावृष्टि और पहाड़ों पर बर्फबारी के कारण प्रदेश के तापमान में 10 डिग्री तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे मार्च के महीने में एक बार फिर गुलाबी ठंड लौट आई है।

रोहतक, हिसार, करनाल और अंबाला जैसे मैदानी इलाकों में बारिश के साथ हुई ओलावृष्टि ने पारे को धड़ाम से नीचे गिरा दिया है। शुक्रवार 20 मार्च को स्थिति यह थी कि दिन का अधिकतम तापमान सामान्य से 10 डिग्री तक नीचे चला गया, जिससे दोपहर में भी सिहरन महसूस की गई।

पश्चिमी विक्षोभ ने बिगाड़ा गर्मी का खेल

पहाड़ों पर हो रही भारी बर्फबारी का सीधा असर हरियाणा के मैदानी इलाकों पर दिख रहा है। मौसम विशेषज्ञ डॉ. चंद्रमोहन के अनुसार, वर्तमान मौसमी सिस्टम आज रात तक आगे निकल जाएगा, लेकिन राहत की उम्मीद अभी कम है। हवाओं की दिशा बदलने से कल सुबह तापमान में और गिरावट आने की संभावना है। लगातार सक्रिय हो रहे पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के कारण ही मार्च के अंत में लोगों को सुबह और रात के समय दोबारा गर्म कपड़ों का सहारा लेना पड़ रहा है।

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अप्रैल के मध्य तक जारी रहेगा लुका-छिपी का खेल

मौसम विभाग की मानें तो आने वाले दिन किसानों और आम जनता के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। 21 से 23 मार्च के बीच एक और नया विक्षोभ दस्तक देने वाला है, जिससे आसमान में बादलों की आवाजाही बनी रहेगी। इसके बाद 28 मार्च के आसपास फिर से एक मजबूत मौसमी सिस्टम सक्रिय होगा। विशेषज्ञों का दावा है कि अप्रैल के शुरुआती 15 दिनों तक मौसम ऐसे ही करवट बदलता रहेगा, जिससे फिलहाल भीषण गर्मी की वापसी के आसार नहीं हैं।

कृषि विभाग की एडवाइजरी: अब क्या करें किसान?

चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (HAU) के वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए तत्काल एडवाइजरी जारी की है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे खेतों में जमा अतिरिक्त पानी को निकालने के लिए ड्रेन सिस्टम को तुरंत साफ करें। अगले कुछ दिनों तक खेतों में किसी भी प्रकार की खाद या स्प्रे का इस्तेमाल न करें, क्योंकि बारिश के कारण वह धुल जाएगा और मिट्टी की उर्वरता पर भी विपरीत असर पड़ सकता है। कटी हुई फसल को तिरपाल से ढंककर सुरक्षित ऊंचे स्थानों पर पहुंचाना ही फिलहाल सबसे बेहतर विकल्प है।

खेतों में बिछी गेहूं की फसल, दाने पर मंडराया संकट

हरियाणा के करनाल, कैथल, कुरुक्षेत्र और सिरसा जैसे मुख्य बेल्टों में पिछले दो दिनों से जारी बारिश और तेज हवाओं ने किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। पककर तैयार खड़ी गेहूं की फसल तेज हवाओं के कारण खेतों में बिछ गई है, जिसे कृषि की भाषा में ‘लॉजिंग’ (Lodging) कहा जाता है। जमीन पर गिरने की वजह से पौधों की जड़ों में पानी भरने से दाना कमजोर पड़ सकता है और फसल की कटाई में भी देरी होने की पूरी संभावना है।

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ओलावृष्टि और सरसों की कटाई की चुनौतियां

सरसों उत्पादक क्षेत्रों में स्थिति और भी नाजुक है। जिन किसानों ने सरसों की कटाई कर ली थी और फसल खेतों में सूखने के लिए छोड़ी थी, वहाँ ओलावृष्टि और पानी ने भारी नुकसान पहुँचाया है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कटी हुई फसल ज्यादा समय तक पानी में डूबी रहती है, तो उसमें फंगस लगने का डर रहता है। इसके अलावा, जिन इलाकों में अभी कटाई शुरू नहीं हुई थी, वहाँ ओलों की मार से फलियां झड़ गई हैं, जिससे पैदावार में भारी गिरावट आ सकती है।

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अमनदीप सिंह

अमनदीप सिंह एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 10 वर्षों से मौसम और कृषि से संबंधित खबरों पर गहन और जानकारीपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ मौसम के पूर्वानुमान, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों, योजनाओं और चुनौतियों को उजागर करती हैं, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। अमनदीप का लेखन सरल, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित है, जो कृषि समुदाय को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।

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