चंडीगढ़ . मार्च में जहां गर्मी से लोग बहल थे, वहीं अब बारिश के कारण ठड़ से अकड़ रहे हैं। कई दशकों में इस मार्च में पहली बार तापमान इतना बढ़ा कि एसी चलने शुरू हो गए थे।
हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय हुए पश्चिमी विक्षोभ ने मार्च के महीने में दोबारा कड़ाके की ठंड का अहसास करा दिया है। मौसम विभाग ने आज प्रदेश के 19 जिलों में आंधी-तूफान और ओलावृष्टि का ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया है। सोनीपत, पानीपत और महेंद्रगढ़ में सुबह से ही झमाझम बारिश हो रही है, जिससे गेहूं की पकी हुई फसल बर्बाद होने का खतरा बढ़ गया है।
19 जिलों में ऑरेंज अलर्ट, 50 की स्पीड से चलेंगी हवाएं
मौसम विशेषज्ञ डॉ. चंद्रमोहन ने इस अचानक हुए बदलाव की सटीक जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि 18 मार्च की रात से ही एक मध्यम श्रेणी का पश्चिमी विक्षोभ पूरी तरह सक्रिय हो चुका है। इसके सीधे प्रभाव से 19 से 21 मार्च के बीच पूरे हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर के मौसम में भयंकर उथल-पुथल देखने को मिलेगी।
इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा की तूफानी रफ्तार से हवाएं चलेंगी और आसमान से भारी ओले गिरने की पूरी संभावना है। प्रशासन ने आम जनता और किसानों से अपील की है कि वे तेज आंधी और ओलावृष्टि के दौरान पेड़ों के नीचे, बिजली के खंभों के पास या किसी भी कमजोर छप्पर के नीचे खड़े होने की गलती बिल्कुल न करें। 21 मार्च के बाद ही इस खराब मौसम से आम आदमी को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
मार्च में लौटी ठंड, गेहूं की फसल पर मंडराया बर्बादी का साया
लगातार हो रही इस बेमौसमी बारिश ने दिन और रात के तापमान में भारी गिरावट ला दी है। आम लोगों को मार्च के इस महीने में दोबारा अपने गर्म कपड़े निकालने पर मजबूर होना पड़ा है। मौसम विभाग के मुताबिक, 21 मार्च के बाद भी प्रदेश के उत्तरी जिलों में बूंदाबांदी का यह सिलसिला जारी रह सकता है।
इस मौसम से सबसे ज्यादा खौफनाक स्थिति इस वक्त प्रदेश के अन्नदाताओं की हो गई है। आने वाले दिनों में दो और नए पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की चेतावनी जारी की गई है। खेतों में इस समय गेहूं की फसल पूरी तरह पककर तैयार खड़ी है। तेज आंधी और ओलावृष्टि से इन फसलों के जड़ से उखड़कर बिछ जाने का सीधा खतरा पैदा हो गया है, जिससे किसानों की साल भर की मेहनत मिट्टी में मिल सकती है।
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