पंचकूला . चंडीगढ़ स्थित मौसम विभाग ने पूरे हरियाणा के लिए मौसम का ताजा और चेतावनी भरा बुलेटिन जारी कर दिया है। प्रदेश में अचानक मौसम का मिजाज बदलने से लोगों को दिन की तपिश से बड़ी राहत मिली है और एक बार फिर हल्की गुलाबी ठंड लौट आई है। कल रेवाड़ी में हुई भयंकर ओलावृष्टि और बारिश के बाद आज उत्तर और पूर्वी हरियाणा के कई जिलों में भारी अलर्ट घोषित किया गया है। यह बेमौसमी बारिश आम आदमी के दैनिक कामकाज और किसानों की मेहनत पर सीधा असर डालने वाली है।
रेवाड़ी में जमकर गिरे ओले, इन जिलों में भी हुई बारिश
बीते 24 घंटों के दौरान प्रदेश के दक्षिणी और पश्चिमी हिस्सों में मौसम पूरी तरह बेईमान रहा। सबसे तेज बारिश और ओलावृष्टि रेवाड़ी जिले में रिकॉर्ड की गई, जिससे आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ।
इसके साथ ही दिल्ली-एनसीआर से सटे गुरुग्राम, भिवानी, हिसार, सिरसा, नारनौल और महेंद्रगढ़ जिलों में भी अच्छी बारिश देखने को मिली है। इस बारिश ने दिन के तापमान में भारी गिरावट ला दी है, जिसके चलते आम जनता को दोबारा अपने गर्म कपड़े निकालने पड़े हैं।
पंचकूला और अंबाला सहित इन जिलों में आज ऑरेंज अलर्ट
मौसम विभाग ने आज (गुरुवार) राज्य के अधिकांश हिस्सों में तेज गरज-चमक के साथ बारिश और ओलावृष्टि का ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया है। मौसम का यह सबसे खतरनाक रूप प्रदेश के उत्तरी और पूर्वी जिलों में देखने को मिलेगा।
मौसम विज्ञानियों के मुताबिक पंचकूला, अंबाला, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, पानीपत और सोनीपत में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से तूफानी हवाएं चलेंगी। इस दौरान भारी बारिश और ओले गिरने की पूरी संभावना है, जिससे तापमान में और ज्यादा ठंडक घुलेगी और विजिबिलिटी पर भी असर पड़ेगा।
किसानों के लिए कृषि विभाग की सख्त हिदायत
आंधी और ओलावृष्टि के इस सीधे खतरे को देखते हुए कृषि विशेषज्ञों ने प्रदेश के किसानों के लिए एक विशेष और सख्त एडवाइजरी जारी की है। विशेषज्ञों ने किसानों को साफ हिदायत दी है कि इस तूफानी मौसम के दौरान खेतों में बिल्कुल भी सिंचाई न करें।
तेज हवाओं के बीच खेतों में पानी खड़ा रहने से गेहूं और सरसों की पकी हुई फसल जड़ से उखड़कर गिर सकती है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा। इसके अलावा उर्वरक और कीटनाशकों का छिड़काव भी अगले कुछ दिनों के लिए पूरी तरह टालने को कहा गया है।
हरियाणा न्यूज पोस्ट और जग मार्ग की टीम भी किसानों से अपील करती है कि वे अपनी कटी हुई फसल को खुले आसमान के नीचे बिल्कुल न छोड़ें। उपज को तुरंत मजबूत तिरपाल से ढकें या किसी सुरक्षित वेयरहाउस में पहुंचाकर अपनी साल भर की मेहनत को बर्बाद होने से बचाएं।
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