गुरुग्राम, 24 अप्रैल (हरियाणा न्यूज पोस्ट)। भारत में इस साल गेहूं के रिकॉर्ड उत्पादन की उम्मीदों पर पानी फिरता नजर आ रहा है। ‘रॉयटर्स’ की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, कटाई से ठीक पहले हुई बारिश और ओलावृष्टि ने फसलों को काफी नुकसान पहुंचाया है। कृषि एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि 2026 में गेहूं का उत्पादन 2025 के स्तर से 5% से 10% तक कम हो सकता है। यह गिरावट हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश जैसे प्रमुख कृषि प्रधान राज्यों में देखी जा रही है, जहां देश का 80% गेहूं पैदा होता है। ‘ओलम एग्री इंडिया’ के डिप्टी कंट्री हेड नितिन गुप्ता के मुताबिक, फसल पहले अच्छी स्थिति में थी, लेकिन मार्च-अप्रैल की बारिश ने समीकरण बदल दिए हैं।
कीमतों पर नहीं पड़ेगा खास असर
उत्पादन में कमी की खबरों के बीच राहत की बात यह है कि देश में गेहूं की कोई किल्लत नहीं होगी। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल की शुरुआत में भारत का गेहूं भंडार पिछले साल के मुकाबले 85% बढ़कर 21.8 मिलियन टन हो गया है। यह स्टॉक सरकार के न्यूनतम बफर स्टॉक के लक्ष्य से लगभग तीन गुना ज्यादा है। ‘वासेडा ग्लोबल’ के CEO सुमित गुप्ता का मानना है कि इस भारी स्टॉक की वजह से घरेलू बाजार में कीमतें नियंत्रण में रहेंगी और राशन वितरण जैसी सरकारी योजनाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा। पर्याप्त भंडार को देखते हुए ही सरकार ने निर्यात के लिए और अधिक कोटा जारी करने का साहस दिखाया है।
सरकारी खरीद और निर्यात का गणित
उत्पादन घटने का सबसे ज्यादा असर सरकारी एजेंसियों की खरीद पर पड़ सकता है। सरकार ने इस साल 30.3 मिलियन टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य रखा था, लेकिन पैदावार कम होने और शुरुआती खरीद की धीमी रफ्तार को देखते हुए इसके 26 से 28 मिलियन टन तक ही सिमटने के आसार हैं। खरीद बढ़ाने के लिए दिल्ली में क्वालिटी संबंधी नियमों में ढील दी जा रही है। दूसरी तरफ, अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय गेहूं की मांग को देखते हुए सरकार ने कुल निर्यात कोटा बढ़ाकर 5 मिलियन टन कर दिया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब एक्सपर्ट उत्पादन को लेकर थोड़े चिंतित हैं, लेकिन सरकार अपने मजबूत गोदामों के भरोसे विदेशी मुद्रा कमाने पर जोर दे रही है।
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