करनाल। शहर की हवा की गुणवत्ता खराब होने की एक अहम वजह सामने आई है। जिन पर प्रदूषण की रोकथाम का जिम्मा था वे ही प्रदूषण फैलाने वाले निकले। शहर की सड़कों की सफाई करने वाली मशीन ही धूल के गुबार उड़ाती मिली। शनिवार दोपहर करीब ढ़ाई बजे इंद्री लाडवा की ओर जाने वाले रास्ते पर इस मशीन ने लोगों को धूल उड़ाकर काफी देर तक परेशान करने का काम किया। जबकि ये मशीन सड़कों से धूल को अपने अंदर समेटने का काम करती है।
करनाल AQI 264: पानी की बौछारें कारवाई जा रही
अब इस मशीन में पीछे पानी की बौछारें करने के लिए जुगाड़ भी लगाया गया है लेकिन इसकी मशीन की खराबी की वजह से पूरा वातावरण धूल के गुबार से भर गया। इससे सड़क पर चलने वाले वाहन चालकों से लेकर आसपास के दुकानदार भी काफी परेशान नजर आए। इस बारे में निगम के मुख्य सफाई निरीक्षक सुरेंद्र चोपड़ा ने कहा कि मशीन का फिल्टर चौक हो गया था। तभी मशीन को ठीक करवाया गया है। अब ये मशीन सड़कों की सफाई के साथ पानी की बौछारें भी करने का काम करती है।
दूसरी ओर शनिवार को शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक शनिवार को 264 तक जा पहुंचा। जोकि एक बेहद खराब श्रेणी में आता है। वहीं, हवा में पीएम 2.5 का स्तर 268 आंका गया और पीएम 10 की वैल्यू 171 तक दर्ज की गई। जो सामान्य स्तर से काफी खराब श्रेणी में आंका जाता है। इस पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी चिंता जाहिर की है।
जिला नागरिक अस्पताल से डॉ. कुलबीर का कहना रहा कि एक्यूआई बढ़ना स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। इसकी वजह से आमतौर पर बुजुर्गों और बच्चों को ज्यादा परेशनी होती है। इनमें सांस और एलर्जी के अलावा गले में खराश, आंखों में जलन और सीने में भारीपन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
इस माह में सबसे कम 178 एक्यूआई
बता दें कि दो दिन पहले ही शहर की हवा का प्रदूषण स्तर महज 178 आंका गया था जो पूरे माह में सबसे कम था। जबकि उससे ठीक चार दिन पहले शहर की हवा में प्रदूषण साल भर में सबसे ज्यादा 348 दर्ज किया गया। बदलते मौसम के अनुसार शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक तेजी से घटने के साथ तेजी से बढ़ा भी है। दूसरे विशेष बात ये है कि जीटी रोड पर साथ लगते जिलों में दिल्ली की ओर पानीपत का एक्यूआई शहर से ज्यादा 282 दर्ज किया गया जबकि चंडीगढ़ की ओर कुरुक्षेत्र का वायु गुणवत्ता सूचकांक शहर से कम 269 दर्ज किया गया। दोनों पड़ोसी जिलों से शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक कम दर्ज किया गया।
12 हजार क्विंटल पराली आग लगने से राख
गांव बसी अकबरपुर में शुक्रवार देर रात पराली के ढेर में अचानक आग लग गई। 12 हजार क्विंटल पराली के बंडल जलकर राख हो गए। सूखी पराली होने के कारण आग ने कुछ ही पलों में विकराल रूप ले लिया और आसपास के पूरे क्षेत्र में धुआं फैल गया। ग्रामीणों ने आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन आग पर काबू नहीं पाया जा सका। सूचना पर पुलिस और दमकल की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और देर रात आग पर काबू पा लिया गया।
किसान पालाराम नंबरदार ने बताया कि जहां पराली का स्टॉक रखा गया था, वहां न तो कोई बिजली की तारें थीं और न ही कोई ज्वलनशील वस्तु थी। उन्हें शक है कि किसी शरारती तत्व ने आग लगाई होगी। उन्होंने बताया कि अपनी सारी जमा पूंजी पराली के बंडल तैयार करने में खर्च कर दी थी, ताकि उन्हें इस बार सरकार या उद्योगों को बेच सकें। लेकिन अब सब कुछ जलकर राख हो गया। किसान ने प्रशासन से उचित मुआवजे की मांग की है।
पाला राम नंबरदार पिछले दो वर्षों से पराली प्रबंधक का कार्य कर रहे हैं। इस वर्ष सरकार और रिफाइनरियों की ओर से पराली के बंडल न खरीदे जाने के कारण उन्होंने लगभग छह सौ एकड़ की पराली का स्टॉक अपने खेतों में ही जमा कर रखा था। इस स्टॉक का वजन लगभग 12 हजार क्विंटल था। इससे उसके लाखों रुपये का नुकसान हुआ है।













