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करनाल की हवा सबसे जहरीली: AQI 229, पानीपत-कैथल से भी बदतर

On: November 15, 2025 7:08 PM
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करनाल का मौसम बदतर हो गया है। हवा में पीएम 2.5 का स्तर 227 और पीएम 10 का स्तर 137 दर्ज किया गया।
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करनाल: शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक शनिवार को 229 तक पहुंच गया है। इससे सांस रोगियों, बुजुर्गों और बच्चों को परेशानी हुई। लोगों को आंखों में जलन की समस्या रही। प्रदूषण का ये स्तर पानीपत, यमुनानगर और कैथल से भी ज्यादा है। पानीपत का एक्यूआई 224, यमुनानगर का 227 और कैथल का एक्यूआई 140 दर्ज किया गया।

करनाल का मौसम खतरनाक

हवा में पीएम 2.5 का स्तर 227 और पीएम 10 का स्तर 137 दर्ज किया गया। जो औसत से काफी आगे है। शुक्रवार को एक्यूआई 231 दर्ज किया गया था। हवा में धूल और धुएं के कणों से प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। जगह-जगह कूड़ा जलाने और पराली जलाने के कारण धूएं के कण बढ़ रहे हैं। निर्माण कार्यों के कारण धूल के कण बढ़ रहे हैं। ग्रेप-3 प्रतिबंध लागू होने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ है।

रात में पीएम 2.5 कण का स्तर बढ़ा

रात को 9 से लेकर सुबह 9 बजे तक हवा में पीएम 2.5 कणों का स्तर सबसे अधिक रहता है। दिन में धूप निकलने की वजह से शाम को तीन बजे इनका स्तर न्यूनतम 86 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर दर्ज किया गया। रात 9 से लेकर सुबह 9 बजे तक ठंड होने की वजह से इनका स्तर अधिकतम 321 दर्ज किया गया।

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24 घंटे में इनका औसत 227 तक रहा। स्वास्थ्य के हिसाब से हवा में इनकी मात्रा 35 माइक्रोग्राम घनमीटर से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। ये हवा में वे कण मौजूद होते हैं जो काफी छोटे होते हैं, जिनका व्यास 2.5 माइक्रोमीटर से कम होता है, जो मानव बाल के व्यास का लगभग 30वां हिस्सा है।

ये कण जीवाश्म ईंधन जलाने, वाहनों के उत्सर्जन, औद्योगिक गतिविधियों और अन्य स्रोतों से उत्पन्न होते हैं और सांस के जरिए फेफड़ों में पहुंच सकते हैं, जिससे कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।

सांस संबंधी रोगों का कारण

प्रदूषण फैलाने वालों और ग्रेडेड रिस्पांस सिस्टम के नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए सभी विभागों को दिशा-निर्देश जारी किए जा चुके हैं।

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पीएम 10 के कणों का अधिकतम स्तर 187 और न्यूनतम 80 दर्ज किया गया। 24 घंटे में इसका औसत केवल 137 दर्ज किया गया। हवा में इनकी मात्रा केवल 50 माइक्रोग्राम घनमीटर तक होनी चाहिए। पीएम 10 धूल, पराग, फफूंद और वाहनों के उत्सर्जन से निकलने वाले कण हैं।

ये सांस के जरिए फेफड़ों में जा सकते हैं और श्वसन संबंधी समस्याओं का कारण बन सकते हैं। अस्थमा और ब्रोंकाइटिस के मरीजों को समस्या हो सकती है। हृदय संबंधी जोखिम भी बढ़ा सकते हैं।

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अमनदीप सिंह

अमनदीप सिंह एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 10 वर्षों से मौसम और कृषि से संबंधित खबरों पर गहन और जानकारीपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ मौसम के पूर्वानुमान, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों, योजनाओं और चुनौतियों को उजागर करती हैं, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। अमनदीप का लेखन सरल, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित है, जो कृषि समुदाय को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।

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