Farmer Success Story , Kokila-33 paddy changed his fortune, Abhishek of Uttar Pradesh earned 20 lakhs from farming: उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले के किसान अभिषेक पुंडीर ने खेती को एक सुनियोजित व्यवसाय में बदलकर मिसाल कायम की है।
20 एकड़ जमीन पर आधुनिक तकनीकों और कोकिला-33 धान की खेती से वे सालाना 20 लाख रुपये कमा रहे हैं। उनकी कहानी प्रेरणा है उन किसानों के लिए जो खेती को लाभकारी बनाना चाहते हैं।
पारंपरिक खेती से आधुनिक व्यवसाय तक Farmer Success Story
अभिषेक का परिवार पीढ़ियों से खेती करता आया है, लेकिन उन्होंने इसे केवल परंपरा नहीं माना। कृषि में बीएससी की डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने खेती को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से अपनाया।
बचपन में खेतों में बिताए पलों ने उन्हें खेती से जोड़ा, लेकिन उनकी पढ़ाई ने उन्हें आधुनिक तकनीकों से रूबरू कराया। आज वे परंपरागत और तकनीकी खेती का बेहतरीन मिश्रण अपनाकर सफलता की नई कहानी लिख रहे हैं।
कोकिला-33: धान की किस्म जो बनी वरदान
अभिषेक की सफलता का सबसे बड़ा राज है ‘कोकिला-33’ धान की किस्म, जिसे शक्ति वर्धक हाइब्रिड सीड्स कंपनी ने विकसित किया है। यह बासमती किस्म मध्यम और चमकदार दानों, रोग प्रतिरोधक क्षमता और मजबूत तने के लिए जानी जाती है। यह 105-110 दिनों में पककर तैयार हो जाती है और प्रति एकड़ 25 क्विंटल तक उपज देती है।
अभिषेक मई के मध्य में नर्सरी तैयार करते हैं और 20-25 दिनों बाद रोपाई करते हैं। प्रति एकड़ 7.5 किलो बीज की जरूरत पड़ती है। इसकी खेती में करीब 25,000 रुपये का खर्च आता है, जिसमें बीज, खाद, कीटनाशक और मजदूरी शामिल हैं।
बाजार में कोकिला-33 की कीमत 3,000 रुपये प्रति क्विंटल तक मिलती है, जिससे मुनाफा शानदार रहता है। कंपनी की तकनीकी टीम नियमित रूप से खेतों का दौरा करती है, फसलों की जांच करती है और सुझाव देती है, जिससे उपज और गुणवत्ता में इजाफा होता है।
फसल विविधता और रबी सीजन की कमाई
अभिषेक 20 एकड़ में धान, गेहूं, मक्का, मूंग, बाजरा और सरसों की खेती करते हैं। खरीफ में धान उनकी मुख्य फसल है, जबकि रबी में गेहूं पर फोकस रहता है।
गेहूं की खेती से भी वे प्रति एकड़ 25 क्विंटल उपज पाते हैं, जिसमें 20-25,000 रुपये की लागत आती है। फसल विविधता उनके लिए जोखिम कम करने और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने का जरिया है।
जल और संसाधन प्रबंधन
सिंचाई के लिए अभिषेक ट्यूबवेल और नहरों का उपयोग करते हैं। वे जल प्रबंधन पर खास ध्यान देते हैं ताकि फसल की गुणवत्ता बनी रहे। उनकी खेती में 10% जैविक और 90% रासायनिक विधियों का संतुलन है, जो टिकाऊ खेती को बढ़ावा देता है।
पशुपालन से अतिरिक्त आय
खेती के साथ अभिषेक पशुपालन से भी कमाई करते हैं। उनके पास 10 गाय और भैंसें हैं, जिनसे दूध उत्पादन के जरिए अतिरिक्त आय होती है। गोबर से बनी खाद उनकी जैविक खेती को मजबूती देती है, जिससे लागत कम होती है और खेती अधिक टिकाऊ बनती है।
किसानों के लिए प्रेरणा
अभिषेक की कहानी उन किसानों के लिए प्रेरणा है जो खेती को घाटे का सौदा मानते हैं। वे कहते हैं, “सही बीज, तकनीक और मेहनत से खेती को लाभकारी बनाया जा सकता है।” वे अन्य किसानों को सलाह देते हैं कि वे उन्नत बीजों का उपयोग करें, फसल विविधता अपनाएं और तकनीकी सहायता लें।
भविष्य की योजनाएं
अभिषेक अब अपनी खेती को और विस्तार देना चाहते हैं। वे जैविक खेती पर अधिक जोर देने और स्थानीय किसानों को प्रशिक्षण देने की योजना बना रहे हैं। उनकी सफलता न केवल उनके लिए, बल्कि पूरे हाथरस जिले के लिए गर्व का विषय है।
एक नई राह
अभिषेक पुंडीर ने साबित किया है कि खेती केवल परंपरा नहीं, बल्कि एक लाभकारी व्यवसाय भी हो सकती है। कोकिला-33 धान और उनकी मेहनत ने न केवल उनकी किस्मत बदली, बल्कि ग्रामीण भारत में कृषि की नई संभावनाओं को भी उजागर किया।












