सिरसा, 30 अप्रैल (हरियाणा न्यूज पोस्ट)। हरियाणा में गेहूं की कटाई के बाद खेतों में बचे अवशेष यानी फाने जलाने की जिद अब किसानों को भारी पड़ने लगी है। प्रदूषण और मिट्टी की सेहत से खिलवाड़ करने वालों पर शिकंजा कसते हुए कृषि विभाग ने प्रदेश के इतिहास में रबी सीजन की पहली बड़ी कानूनी कार्रवाई की है। सैटेलाइट इमेज और हरसेक (HARSAC) की रिपोर्ट के आधार पर फरीदाबाद, पलवल और सिरसा के 5 किसानों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज कराई गई है। इसके अलावा 4 अन्य किसानों से 25 हजार रुपये का जुर्माना भी वसूला गया है। प्रशासन के इस कड़े रुख ने उन किसानों के बीच हड़कंप मचा दिया है जो बार-बार दी जा रही चेतावनियों को अनसुना कर रहे थे।
24 घंटे में 376 नई लोकेशन पर लगी आग
सरकारी सख्ती के बावजूद जमीनी हकीकत चिंताजनक बनी हुई है। बुधवार को महज एक दिन के भीतर प्रदेश में आगजनी के 376 नए मामले दर्ज किए गए। इनमें सर्वाधिक मामले जींद जिले से सामने आए हैं, जहां 121 जगहों पर खेतों में आग लगाई गई। वहीं कैथल में 55, करनाल में 47 और रोहतक में 29 नई लोकेशन चिह्नित की गई हैं। अधिकारियों का कहना है कि गेहूं की कटाई के बाद अगली फसल की तैयारी के लिए किसान शार्टकट अपना रहे हैं, जो न केवल पर्यावरण बल्कि खुद उनकी जमीन की उर्वरा शक्ति के लिए आत्मघाती साबित हो रहा है।
जींद और रोहतक सबसे आगे
इस सीजन की 1 अप्रैल से 29 अप्रैल तक की कुल रिपोर्ट देखें तो जींद जिला 207 मामलों के साथ प्रदेश में टॉप पर बना हुआ है। रोहतक 196 मामलों के साथ दूसरे और झज्जर 156 मामलों के साथ तीसरे स्थान पर है। सोनीपत, करनाल और कैथल जैसे कृषि प्रधान क्षेत्रों में भी आगजनी की घटनाएं 100 के आंकड़े को पार कर चुकी हैं। विभाग ने अब जिला स्तर पर विशेष टीमों का गठन किया है जो सैटेलाइट से मिली लोकेशन पर तुरंत पहुंचकर चालान और एफआईआर की प्रक्रिया पूरी करेंगी।
ड्रोन से होगी निगरानी
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि फाने जलाने से मिट्टी में मौजूद मित्र कीट मर जाते हैं और जमीन की ऊपरी सतह कड़क हो जाती है। इसके साथ ही निकलने वाला जहरीला धुआं दिल्ली-एनसीआर और हरियाणा के शहरों की हवा खराब कर रहा है। प्रशासन अब स्थानीय निगरानी को और मजबूत करने के लिए ड्रोन तकनीक का सहारा लेने जा रहा है। अधिकारियों ने दोटूक कहा है कि जो भी किसान प्रतिबंधित समय में आग लगाता पाया जाएगा, उस पर न केवल मुकदमा चलेगा बल्कि उसे सरकारी योजनाओं के लाभ से भी वंचित किया जा सकता है।
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