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खेती की नई तकनीक: मल्चिंग और ड्रिप इरिगेशन से बढ़ाएं सब्जियों की पैदावार, देखें पूरी रिपोर्ट

On: अप्रैल 29, 2026 6:15 अपराह्न
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खेती की नई तकनीक: मल्चिंग और ड्रिप इरिगेशन से बढ़ाएं सब्जियों की पैदावार, देखें पूरी रिपोर्ट
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अंबाला, 29 अप्रैल (हरियाणा न्यूज पोस्ट)। उत्तर भारत में मई की भीषण गर्मी जहां आम जनजीवन के लिए चुनौती है, वहीं किसानों के लिए यह सीजन ‘कैश क्रॉप्स’ यानी नकदी फसलों के जरिए चांदी काटने का समय है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इस महीने बोई जाने वाली बेल वाली सब्जियां जैसे खीरा, लौकी और तोरई की विकास दर काफी अधिक होती है। बाजार में गर्मियों के दौरान इन रसीली और ठंडी सब्जियों की भारी मांग रहती है, जिससे किसानों को अपनी उपज का वाजिब और आकर्षक दाम आसानी से मिल जाता है।

खीरे की खेती, 50 दिनों में जेब भरेगी खुशियों से

गर्मियों में शरीर को हाइड्रेटेड रखने वाला खीरा किसानों के लिए सबसे तेजी से पैसा देने वाली फसल है। खीरे में विटामिन K, C और पोटेशियम जैसे पोषक तत्व भरपूर होते हैं, जिसके कारण मंडियों में इसकी मांग कभी कम नहीं होती। अगर किसान भाई मई में इसकी बुवाई करते हैं, तो मात्र 45 से 55 दिनों के भीतर पहली तुड़वाई शुरू हो सकती है। यदि खेती के लिए ट्रेलिस यानी जाल पद्धति का इस्तेमाल किया जाए, तो फल जमीन के संपर्क में नहीं आते, जिससे वे सीधे और बेदाग निकलते हैं। ऐसे फलों की बाजार में साख और कीमत दोनों ही अधिक रहती है।

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लौकी और तोरई: लगातार आमदनी का जरिया

लौकी की खेती उन किसानों के लिए बेहतरीन विकल्प है जो सुरक्षित निवेश चाहते हैं। यह फसल 55 से 65 दिनों में तैयार होकर लंबे समय तक फल देती रहती है। गांव हो या शहर, लौकी की मांग हर रसोई में बनी रहती है। वहीं दूसरी ओर, तोरई अपनी आयरन और फाइबर युक्त खूबियों के कारण स्वास्थ्य के प्रति सचेत लोगों की पहली पसंद है। तोरई की खेती भी 45 से 50 दिनों में उत्पादन देने लगती है। नियमित सिंचाई और उचित खाद प्रबंधन से इन दोनों फसलों के जरिए किसान कम लागत में भी तगड़ा मुनाफा कमा सकते हैं।

मल्चिंग और ड्रिप से बढ़ेगा उत्पादन

खेती में अधिक लाभ के लिए केवल सही बीज ही काफी नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक का समावेश भी जरूरी है। मई की धूप में नमी बचाने के लिए मल्चिंग पेपर का उपयोग और सिंचाई के लिए ड्रिप इरिगेशन (टपक सिंचाई) रामबाण साबित होते हैं। उन्नत बीजों का चुनाव और समय पर रोग नियंत्रण करके किसान भाई फसल की गुणवत्ता को अंतरराष्ट्रीय मानकों तक ले जा सकते हैं। समय पर बुवाई और उचित मल्चिंग न केवल खरपतवार को रोकती है, बल्कि पानी की खपत को भी 50 प्रतिशत तक कम कर देती है।

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अमनदीप सिंह

अमनदीप सिंह एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 10 वर्षों से मौसम और कृषि से संबंधित खबरों पर गहन और जानकारीपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ मौसम के पूर्वानुमान, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों, योजनाओं और चुनौतियों को उजागर करती हैं, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। अमनदीप का लेखन सरल, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित है, जो कृषि समुदाय को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।

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