सिरसा, 25 अप्रैल (हरियाणा न्यूज पोस्ट)। हरियाणा में मत्स्य पालन को खेती के विकल्प के रूप में स्थापित करने के लिए सरकार ने खजाना खोल दिया है। जिला मत्स्य अधिकारी सुरेंद्र ठकराल ने किसान जागरूकता शिविर में जानकारी दी कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के जरिए अब किसान अपनी आर्थिक तकदीर बदल सकते हैं। यह योजना विशेष रूप से उन इलाकों के लिए गेम-चेंजर साबित होगी जहां पारंपरिक खेती पानी की कमी या मिट्टी की खराब गुणवत्ता के कारण चुनौतीपूर्ण है।
बंजर और खारी जमीन अब उगलेगी सोना
प्रदेश के कई जिलों में जलभराव और खारे पानी की समस्या किसानों के लिए सिरदर्द बनी रहती है। मत्स्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि ऐसी जमीन जहां बारिश का पानी ठहरता है या नीचे का पानी खारा है, वहां झींगा मछली पालन (Prawn Farming) सबसे अधिक लाभदायक है। झींगा पालन से किसान प्रति एकड़ 5 लाख रुपये तक की सालाना आय आसानी से प्राप्त कर सकते हैं, जो पारंपरिक फसलों के मुकाबले कहीं अधिक है।
सब्सिडी का गणित और पात्रता नियम
योजना के तहत सब्सिडी का ढांचा सामाजिक श्रेणी के आधार पर तैयार किया गया है। अनुसूचित जाति और महिला वर्ग के आवेदकों को कुल लागत पर 60% की भारी सब्सिडी दी जा रही है। वहीं सामान्य और पिछड़ा वर्ग (OBC) के मत्स्य पालकों को 40% वित्तीय सहायता मिलेगी। यह अनुदान केवल तालाब निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि मछली फीड मिल, कोल्ड स्टोरेज, और बायोफ्लॉक जैसी आधुनिक तकनीकों पर भी लागू होगा।
तकनीकी ट्रेनिंग और मिट्टी की जांच अनिवार्य
अधिकारी सुरेंद्र ठकराल ने किसानों को आगाह किया है कि कोई भी यूनिट लगाने से पहले ट्रेनिंग लेना बेहद जरूरी है। विभाग न केवल वित्तीय मदद बल्कि तकनीकी सहायता भी प्रदान कर रहा है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपनी जमीन की मिट्टी और पानी की जांच विभाग की लैब में जरूर करवाएं। इससे मछली की प्रजाति चुनने और यूनिट के सफलतापूर्वक संचालन में मदद मिलेगी, जिससे नुकसान की आशंका न के बराबर रह जाएगी।
कृषि विविधीकरण से बढ़ेगी आमदनी
सरकार का मुख्य उद्देश्य किसानों को केवल गेहूं-धान के चक्र से निकालकर बागवानी, पशुपालन और मत्स्य पालन की ओर मोड़ना है। विभाग की ओर से निजी भूमि या पट्टे पर ली गई जमीन पर फीड हैचरी, RAS (Recirculating Aquaculture System) और कोल्ड चेन स्थापित करने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। कम लागत में अधिक मुनाफे का यह मॉडल हरियाणा के ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा कर रहा है।
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