चंडीगढ़, 15 अप्रैल (हरियाणा न्यूज पोस्ट)। हरियाणा की नायब सैनी सरकार ने अन्नदाताओं के हित में एक और नीतिगत फैसला लेते हुए पुराने भू-मालिकों को उनकी जमीन लौटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री ने सिंचाई और पंचायत विभाग को उन जमीनों का सर्वे करने का आदेश दिया है, जिन्हें कभी सरकारी ट्यूबवेल लगाने के लिए अधिग्रहित किया गया था लेकिन अब वे बेकार पड़ी हैं। प्रदेश के विभिन्न जिलों में ऐसे सैकड़ों ट्यूबवेल हैं जो तकनीकी कारणों या जलस्तर गिरने से बंद हो चुके हैं और उनकी जमीन का कोई सरकारी उपयोग नहीं हो रहा है।
घोषणा को अमलीजामा पहनाने की तैयारी
मुख्यमंत्री नायब सैनी ने वित्त वर्ष 2026-27 का वार्षिक बजट पेश करते समय इस योजना का ऐलान किया था। बजट से पूर्व चर्चा के दौरान कई किसान संगठनों ने यह मुद्दा उठाया था कि अनुपयोगी जमीनों के कारण किसानों की खेती का रकबा कम हो रहा है। इसी सुझाव को स्वीकार करते हुए सरकार ने अब सिंचाई विभाग के माध्यम से सभी जिला उपायुक्तों को पत्र लिखकर सहयोग मांगा है। टीमें गठित कर जल्द ही ऐसी जमीनों की ब्लॉकवार सूची तैयार कर मुख्यालय भेजी जाएगी।
कलेक्टर रेट पर होगा जमीन का हस्तांतरण
सरकारी प्रवक्ता के अनुसार, यह जमीन वापसी एक तय प्रक्रिया के तहत होगी। चूंकि किसान पूर्व में जमीन के बदले सरकार से मुआवजा प्राप्त कर चुके हैं, इसलिए अब उन्हें कलेक्टर रेट पर राशि जमा करानी होगी। इसके बाद ही मालिकाना हक कानूनी रूप से किसान को हस्तांतरित किया जाएगा। इस फैसले से उन किसानों को सबसे ज्यादा फायदा होगा जिनकी उपजाऊ जमीन के बीचों-बीच सरकारी ट्यूबवेल लगे थे और अब वे ढांचागत खंडहर बनकर रह गए हैं।
सर्वे के लिए सिंचाई विभाग ने कसी कमर
सरकार के निर्देश मिलते ही सिंचाई विभाग सक्रिय हो गया है और जिला स्तर पर राजस्व रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि केवल उन्हीं जमीनों को चिन्हित किया जाए जिनका भविष्य में सिंचाई के लिए दोबारा इस्तेमाल संभव नहीं है। इस योजना से न केवल किसानों को उनकी पैतृक भूमि वापस मिलेगी, बल्कि गांवों में बेकार पड़ी सरकारी संपत्तियों का भी सही प्रबंधन हो सकेगा।
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