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Mushroom Farming: मशरूम खेती से 55 लाख: युवाओं को भी दे रहे प्रशिक्षण!

On: जून 21, 2025 7:00 अपराह्न
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Mushroom Farming: मशरूम खेती से 55 लाख: युवाओं को भी दे रहे प्रशिक्षण!
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Mushroom Farming: 55 lakhs from mushroom farming: Training is also being given to the youth!: मशरूम खेती (Mushroom Farming) हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के गांव खायरा में किसान योगेंद्र यादव ने मशरूम खेती (Mushroom Farming) से नई मिसाल कायम की है।

गिरते भूजल (Depleting Groundwater) के कारण बोरवेल बंद होने पर उन्होंने पारंपरिक खेती छोड़कर मशरूम उत्पादन शुरू किया। मात्र तीन साल में उनकी सालाना कमाई 55 लाख रुपये तक पहुंच गई। योगेंद्र न केवल खुद मालामाल हुए, बल्कि युवाओं को प्रशिक्षण और महिलाओं को रोजगार (Employment Opportunities) भी दे रहे हैं। उनकी यह कहानी हर किसान के लिए प्रेरणा है।

चुनौतियों से शुरू हुआ सफर Mushroom Farming

योगेंद्र यादव ने 2005 में स्नातक करने के बाद गुरुग्राम में टैक्सी चलाई। सरकारी नौकरी नहीं मिली तो उन्होंने गांव में तीन एकड़ जमीन पर खेती शुरू की।

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2022 में भूजल की कमी (Depleting Groundwater) ने उनकी खेती को ठप कर दिया। हार न मानते हुए उन्होंने मशरूम खेती की ट्रेनिंग ली। महेंद्रगढ़ कृषि विज्ञान केंद्र, मुरथल मशरूम सेंटर, और गुरुग्राम से प्रशिक्षण (Training Programs) लेकर उन्होंने महेंद्रगढ़ मशरूम फार्म शुरू किया। पहले साल 20 क्विंटल उत्पादन से 2.5 लाख रुपये की कमाई हुई। 2023 में 200 क्विंटल उत्पादन के साथ आय 15 लाख तक पहुंची।

मशरूम से बनी लाखों की कमाई

2024 में योगेंद्र ने खाद यूनिट लगाई और 900 क्विंटल मशरूम का उत्पादन (Mushroom Production) किया। इससे 25 लाख रुपये की कमाई हुई। अब दो नई यूनिट्स के साथ 1100 क्विंटल उत्पादन और 55 लाख रुपये की सालाना आय हो रही है।

उनकी मशरूम की सात वैरायटी, जैसे सफेद बटन और पिंक ओयेस्टर, दिल्ली, गुरुग्राम, और रेवाड़ी में खूब बिक रही हैं (Market Demand). मशरूम की गुणवत्ता के लिए उन्हें प्रगतिशील किसान अवॉर्ड (Progressive Farmer Award) भी मिला। योगेंद्र का लक्ष्य अगले साल 1500 क्विंटल उत्पादन का है।

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रोजगार और प्रशिक्षण से समाज की सेवा

योगेंद्र ने मशरूम से नमकीन, बिस्किट, लड्डू, अचार, और पाउडर जैसे उत्पाद (Value-Added Products) बनाना शुरू किया। इनकी मांग बढ़ने पर उन्होंने प्रोडक्शन यूनिट लगाई।

उनकी यूनिट पर 10 से ज्यादा महिलाएं काम करती हैं। उनके बेटे विनय, विहान, और पत्नी ममता भी सहयोग करते हैं। योगेंद्र हर महीने 50 युवाओं को मशरूम खेती (Mushroom Farming) का प्रशिक्षण देते हैं। यह पहल न केवल रोजगार पैदा कर रही है, बल्कि अन्य किसानों को भी नई दिशा दिखा रही है। उनकी मेहनत और नवाचार हरियाणा के लिए एक मिसाल है।

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अमनदीप सिंह

अमनदीप सिंह एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 10 वर्षों से मौसम और कृषि से संबंधित खबरों पर गहन और जानकारीपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ मौसम के पूर्वानुमान, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों, योजनाओं और चुनौतियों को उजागर करती हैं, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। अमनदीप का लेखन सरल, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित है, जो कृषि समुदाय को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।

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