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Paddy Cultivation: 90 दिन में शानदार पैदावार, जानें 3 बेहतरीन धान की उन्नत किस्में और DSR तकनीक

On: जून 22, 2025 9:17 पूर्वाह्न
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Paddy Cultivation 90 दिन में शानदार पैदावार, जानें 3 बेहतरीन धान की उन्नत किस्में और DSR तकनीक
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Paddy Cultivation: Excellent yield in 90 days, know about 3 best improved varieties of paddy and DSR technology: धान की खेती 2025 (Paddy Cultivation) उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए एक सुनहरा अवसर लेकर आई है। खरीफ सीजन शुरू होने के साथ ही किसान आधुनिक तकनीकों और तेजी से तैयार होने वाली धान की किस्मों की ओर रुख कर रहे हैं।

खासकर 1692 वैरायटी और सीधी बुवाई तकनीक (DSR) ने किसानों का ध्यान खींचा है। यह तकनीक कम पानी, कम लागत और ज्यादा उत्पादन का वादा करती है। अगर आप भी धान की खेती में नई ऊंचाइयां छूना चाहते हैं, तो आइए जानते हैं तीन शानदार किस्मों और DSR तकनीक की पूरी जानकारी।

धान की उन्नत किस्में: 90 दिन में तैयार Paddy Cultivation

उत्तर प्रदेश में धान की खेती (Rice Farming Techniques) किसानों की आजीविका का प्रमुख स्रोत है। इस बार 1692, 1509, और सुगंध-5 जैसी किस्में लोकप्रिय हैं। 1692 वैरायटी सिर्फ 90 दिन में पककर तैयार हो जाती है, जिससे किसानों को जल्दी पैदावार और अच्छा मुनाफा मिलता है।

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यह किस्म अपनी गुणवत्ता और बाजार मूल्य के लिए जानी जाती है। वहीं, सुगंध-5 खुशबूदार चावल के लिए मशहूर है, जो 120 दिन में तैयार होती है। 1509 उन किसानों की पसंद है जो धान के बाद आलू की फसल लेना चाहते हैं। ये किस्में कम समय में ज्यादा उत्पादन (High-Yield Paddy Varieties) देती हैं, जिससे किसानों की मेहनत रंग लाती है।

DSR तकनीक: कम पानी, ज्यादा मुनाफा

पारंपरिक रोपाई की जगह अब सीधी बुवाई तकनीक (Direct Seeded Rice) किसानों की पहली पसंद बन रही है। DSR तकनीक पानी की 25-30% बचत करती है, जो सूखे इलाकों के लिए वरदान है। यह लागत में 3500-4000 रुपये की बचत और 10-15% ज्यादा उत्पादन देती है।

फसल 7-10 दिन पहले पकती है, जिससे अगली फसल की तैयारी आसान हो जाती है। DSR में मृदा जैव कार्बन में 9% की वृद्धि होती है, जो मिट्टी की उर्वरता बढ़ाती है। उत्तर प्रदेश सरकार भी इस तकनीक को बढ़ावा दे रही है। किसान सूखे खेत या तर-वतर बुवाई विधि से इसे अपना सकते हैं।

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खेती के लिए सही समय और सुझाव

धान की बुवाई का सबसे अच्छा समय 20 मई से 30 जून है, जब मानसून शुरू होता है। किसानों को प्रमाणित और उपचारित बीज (Certified Paddy Seeds) इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है। खेत को लेजर लैंड लेवलर से समतल करना जरूरी है, ताकि पानी का बराबर वितरण हो।

तर-वतर बुवाई में पहली सिंचाई 15-21 दिन बाद करें, इससे खरपतवार नियंत्रण आसान होता है। DSR तकनीक में मशीनों से बीज बोने से मेहनत कम होती है। ये सुझाव न केवल पैदावार बढ़ाएंगे, बल्कि लागत भी घटाएंगे। धान की खेती 2025 में किसानों के लिए नई उम्मीद लेकर आई है।

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अमित गुप्ता

पत्रकारिता में पिछले 30 वर्षों का अनुभव। दैनिक भास्कर, अमर उजाला में पत्रकारिता की। दैनिक भास्कर में 20 वर्षों तक काम किया। अब अपने न्यूज पोर्टल हरियाणा न्यूज पोस्ट (Haryananewspost.com) पर बतौर संपादक काम कर रहा हूं। खबरों के साथ साथ हरियाणा के हर विषय पर पकड़। हरियाणा के खेत खलियान से राजनीति की चौपाल तक, हरियाणा सरकार की नीतियों के साथ साथ शहर के विकास की बात हो या हर विषयवस्तु पर लिखने की धाकड़ पकड़। म्हारा हरियाणा, जय हरियाणा।

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