चंडीगढ़ स्थित हरियाणा सचिवालय से राज्य के पशुपालकों और किसानों के लिए बड़ी राहत की खबर आई है। हरियाणा सरकार ने पशुपालन व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए विभाग की 7 अहम सेवाओं को ‘सेवा का अधिकार अधिनियम’ (Right to Service Act) के तहत अधिसूचित कर दिया है। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने इस संबंध में लिखित आदेश जारी करते हुए सभी जिला अधिकारियों को तय समय सीमा का पालन करने के निर्देश दिए हैं।
60 दिन में पोल्ट्री फार्म और 180 दिन में लोन की गारंटी
सरकार के नए आदेशों के मुताबिक, अब प्रदेश में मुर्गी फार्म (Poultry Farm) खोलने के इच्छुक लोगों को आवेदन के 60 दिनों के अंदर विभाग से स्वीकृति मिल जाएगी। इसके अलावा, मुर्रा भैंस और देसी गाय खरीदने के लिए आवेदन करने वाले पशुपालकों को बैंक और विभाग को 180 दिनों के भीतर लोन उपलब्ध कराना होगा। इस फैसले का सीधा असर जींद, हिसार और रोहतक जैसे दुग्ध उत्पादक जिलों के किसानों पर पड़ेगा, जिन्हें पहले लोन के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता था।
अधिकारियों की जिम्मेदारी तय, 100 दिन में मिलेगी सब्सिडी
मुख्य सचिव के आदेशानुसार, हाईटेक डेयरी स्थापित करने, अनुसूचित जाति वर्ग द्वारा पशुधन इकाई लगाने और सूअर या भेड़-बकरी पालन के लिए आर्थिक सहायता अब 100 दिनों के अंदर जारी करनी होगी। इसके लिए जिले के विभागीय उपमंडल अधिकारी और साख एवं योजना अधिकारी की जवाबदेही तय की गई है। सरकार का उद्देश्य है कि ग्रामीण क्षेत्रों में युवा इन योजनाओं का लाभ उठाकर जल्द अपना रोजगार शुरू कर सकें।
दुग्ध उत्पादन और नस्ल सुधार पर विशेष जोर
आंकड़ों के मुताबिक, देश के कुल दुग्ध उत्पादन में हरियाणा की हिस्सेदारी 36% बताई गई है, जिसे बनाए रखने के लिए सरकार हर गांव में सहकारी समिति खोलने की योजना बना रही है। इसके साथ ही, पशुधन की गुणवत्ता सुधारने के लिए एक नई पहल शुरू की गई है। अब पशुओं में जिनोमिक चिप (Genomic Chip) लगाई जाएगी, जिससे उनकी नस्ल और बीमारियों की सटीक जानकारी समय पर मिल सकेगी।
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