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खेती और सहकारिता के संयुक्त मॉडल से किसानों की आय बढ़ाने पर जोर

On: December 25, 2025 8:16 AM
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खेती और सहकारिता के संयुक्त मॉडल से किसानों की आय बढ़ाने पर जोर
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केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने हरियाणा के पंचकूला में कहा कि जब खेती, पशुपालन और सहकारिता को एक साथ जोड़ा जाता है, तो किसान केवल आजीविका तक सीमित नहीं रहते, बल्कि स्थायी समृद्धि की दिशा में आगे बढ़ते हैं।

यह बात उन्होंने कृभको द्वारा आयोजित राष्ट्रीय सहकारी सम्मेलन में कही, जहां सतत कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर विस्तार से चर्चा हुई।

सम्मेलन का उद्देश्य और प्रमुख उपस्थित लोग

यह सम्मेलन सतत कृषि में सहकारिता की भूमिका विषय पर आयोजित किया गया था। इसमें हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर, वरिष्ठ अधिकारी, सहकारी संस्थाओं के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए।

सम्मेलन का उद्देश्य यह दिखाना था कि सहकारिता के जरिए खेती को कैसे लाभ का व्यवसाय बनाया जा सकता है।

अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष में नई पहलों की शुरुआत

अमित शाह ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष के अवसर पर कई नई योजनाओं और सुविधाओं का शुभारंभ किया गया।

इनमें प्रमुख हैं

  • दूध ठंडा करने के आधुनिक केंद्र

  • HAFED की नई आटा मिल

  • RuPay प्लेटिनम सहकारी कार्ड

  • मॉडल पैक्स का पंजीकरण

  • राष्ट्रीय सहकारिता पोर्टल

यह पोर्टल देशभर की सहकारी योजनाओं की जानकारी किसानों तक सीधे पहुंचाने में मदद करेगा।

ग्रामीण भारत की सच्चाई और सहकारिता की जरूरत

शाह ने बताया कि भारत की करीब 70 प्रतिशत आबादी गांवों में रहती है और उनकी आय का मुख्य स्रोत खेती और पशुपालन है।

विशेषज्ञों के अनुसार
अगर खेती को सिर्फ रोजगार के रूप में देखा जाए तो उसकी क्षमता सीमित रह जाती है।
लेकिन जब सहकारी मॉडल जुड़ता है, तो वही खेती आय बढ़ाने वाला आर्थिक ढांचा बन जाती है।

अमूल मॉडल से समझिए सहकारिता की ताकत

अमित शाह ने अमूल का उदाहरण देते हुए सहकारिता की आर्थिक शक्ति को स्पष्ट किया।

  • अमूल से जुड़े करीब 36 लाख दुग्ध उत्पादक

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  • सालाना भुगतान करीब 90 हजार करोड़ रुपये

  • खुले बाजार में वही दूध बिकता तो मूल्य होता लगभग 12 हजार करोड़ रुपये

इन आंकड़ों का अंतर दिखाता है कि सहकारिता कैसे किसानों को सीधे लाभ पहुंचाती है।

खेती की नई सोच और सरकारी नीति

उन्होंने कहा कि अब खेती को कम पानी, कम रसायन और कम जोखिम के सिद्धांत पर आगे बढ़ाया जा रहा है।

मुख्य बदलाव

  • वैज्ञानिक सिंचाई से पानी की बचत

  • प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा

  • मिट्टी परीक्षण आधारित फसल चयन

कृषि विशेषज्ञ मानते हैं कि यह मॉडल जलवायु परिवर्तन के असर को कम करने में भी मददगार है।

सिर्फ उत्पादन नहीं, पूरी वैल्यू चेन पर फोकस

अब सरकार का जोर केवल फसल उत्पादन पर नहीं, बल्कि इन बिंदुओं पर भी है

  • मिट्टी की सेहत

  • जल सुरक्षा

  • संस्थागत ऋण

  • प्रोसेसिंग और पैकेजिंग

  • बाजार तक सीधी पहुंच

इसका मकसद किसानों को लंबे समय तक स्थिर आय देना है।

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बढ़ते बजट से झलकती प्राथमिकता

अमित शाह ने आंकड़ों के जरिए सरकार की नीति स्पष्ट की।

  • कृषि बजट
    2014 में 22 हजार करोड़
    अब 1 लाख 27 हजार करोड़ रुपये

  • ग्रामीण विकास बजट
    80 हजार करोड़ से बढ़कर 1 लाख 87 हजार करोड़ रुपये

उन्होंने कहा कि बीते दशक में लगभग हर गांव तक विकास की राशि पहुंची है।

PACS को गांव की आर्थिक रीढ़ बनाने की तैयारी

सहकारिता मंत्रालय ने PACS को बहुउद्देश्यीय बनाने पर काम किया है।

अब PACS से मिल रही हैं ये सेवाएं

  • उर्वरक और बीज

  • कृषि उत्पादों की सफाई और ग्रेडिंग

  • मार्केटिंग सपोर्ट

  • मेडिकल स्टोर

  • पेट्रोल पंप और गैस एजेंसी

  • जल वितरण

करीब 30 गतिविधियों को जोड़कर PACS को गांव का आर्थिक केंद्र बनाया जा रहा है।

किसानों को वैश्विक बाजार से जोड़ने की पहल

किसानों को बेहतर दाम दिलाने के लिए तीन नई मल्टी स्टेट सहकारी संस्थाएं बनाई गई हैं

  • नेशनल कोऑपरेटिव एक्सपोर्ट्स लिमिटेड

  • नेशनल कोऑपरेटिव ऑर्गेनिक्स लिमिटेड

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  • भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड

इनका लक्ष्य किसानों की उपज को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाना है।

भविष्य की सहकारिता की तस्वीर

अमित शाह ने बताया कि अमूल ने शुरुआत में रोज सिर्फ 2 हजार लीटर दूध संग्रह किया था।
आज यह आंकड़ा करीब 3 करोड़ लीटर प्रतिदिन है और कारोबार 1 लाख 23 हजार करोड़ रुपये के आसपास है।

उनका मानना है कि अगले 15 वर्षों में देश में 20 से ज्यादा अमूल जैसे सहकारी मॉडल उभर सकते हैं।

भारत टैक्सी मॉडल का जिक्र

उन्होंने भारत टैक्सी योजना की भी जानकारी दी।

इस मॉडल में

  • मुनाफा सीधे ड्राइवर को

  • ड्राइवरों के लिए बीमा सुविधा

  • विज्ञापन और रोजगार के नए अवसर

यह पहल सहकारिता आधारित सेवा क्षेत्र का नया उदाहरण मानी जा रही है।

यह बयान दिखाता है कि सरकार खेती को सब्सिडी आधारित सिस्टम से निकालकर आय आधारित मॉडल की ओर ले जाना चाहती है।
अगर योजनाएं जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू होती हैं, तो किसानों की आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव आ सकता है।

अमनदीप सिंह

अमनदीप सिंह एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 10 वर्षों से मौसम और कृषि से संबंधित खबरों पर गहन और जानकारीपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ मौसम के पूर्वानुमान, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों, योजनाओं और चुनौतियों को उजागर करती हैं, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। अमनदीप का लेखन सरल, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित है, जो कृषि समुदाय को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।

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