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Kaithal News: कब आएगा फसल खराबे का मुआवजा, किसानों को काटने पड़ रहे दफ्तरों के चक्कर

On: नवम्बर 16, 2025 6:17 अपराह्न
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कैथल किसान मुआवजा देरी: बर्बाद फसल के बाद भी इंतजार, किसान परेशान।
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कैथल (Kaithal Farmer Compensation Delay): फसल खराबे का मुआवजा न मिलने के कारण किसानों का सब्र जवाब दे रहा है। वह रोजाना सरकारी दफ्तरों में चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें कोई सटीक जवाब नहीं मिल पा रहा है। वह परेशान हो चुके हैं पर कोई आशा की किरण नजर नहीं आ रही। मुआवजा राशि जारी न होने के चलते किसानों पर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। किसान सरकार से जल्द से जल्द मुआवजा राशि जारी करने की मांग कर रहे हैं।

क्षतिपूर्ति पोर्टल पर अप्लाई किया

कांगथली गांव के किसान महेंद्र सिंह ने बताया कि बारिश के चलते उसकी फसल पर पानी फिर गया था। जिसके बाद उन्होंने मुआवजा राशि के लिए क्षतिपूर्ति पोर्टल पर अप्लाई किया था, लेकिन मुआवजा राशि न मिलने के कारण अब उनके सामने आर्थिक संकट आकर खड़ा हो गया है।

उनको अपने परिवार का गुजर-बसर करना मुश्किल हो रखा है। क्योड़क गांव के किसान ऋषिपाल ने बताया कि उसने 5 एकड़ जमीन ठेके पर लेकर धान की फसल लगाई थी। लेकिन पहाड़ों से आए पानी और अत्यधिक बारिश के चलते उसकी सारी फसल बर्बाद हो गई। लंबे समय से मुआवजे का इंतजार करने के बाद भी उन्हें मुआवजा राशि नहीं मिल रही है।

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किसान नेता विक्रम कसाना ने बताया कि प्रति एकड़ धान तैयार करने पर 20-25 हजार रुपये खर्च आ जाता है। जमीन का ठेका भी 60 से 70 हजार एकड़ प्रति वर्ष का चल रहा है।

अब खेतों में धान कम निकला है तथा सरकार ने अभी तक बाढ़ व बारिश के कारण जलभराव का मुआवजा नहीं दिया है इसी कारण जमीन ठेके पर लेने वाले किसान के हाथ तो कुछ नहीं आएगा। किसान घाटे में जा रहा है, लेकिन सरकार में बैठे लोगों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है। ऐसी स्थिति में किसान जाए तो जाए कहां।

कम पानी वाली खेती की तरफ किसानों का ध्यान

क्षेत्र के किसानों ने इस बार सैंकड़ों एकड़ गन्ने की फसल लगाकर यह साबित कर दिया है कि किसान चाहे तो कुछ भी असंभव नहीं है। कृषि विभाग के प्रचार प्रसार के बाद भी कम पानी वाली खेती की तरफ किसानों का ध्यान नहीं जा रहा था लेकिन गांव बीर-बांगड़ा व अन्य गांव के किसानों ने सैंकड़ों एकड़ गन्ने की फसल लगाकर अन्य किसानों के लिए भी एक नई मिसाल कायम की है।

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लगातार घट रहे जल स्तर के कारण किसानों के लिए धान की फसल घाटे का सौदा बनकर रह गई है। धान का मोह त्याग ते हुए ही गांव के किसानों ने अबकी बार सैकड़ों एकड़ गन्ने की फसल लगाई है। वहीं क्षेत्र के अनेकों किसानों ने अबकी बार मूंग, अरहर, कपास व बाजरे की फसलें उगाकर एक नयी पहल की है। जिससे अन्य किसानों को भी इसका संदेश मिलेगा और किसान कम पानी वाली फसलों की तरफ अधिक ध्यान देंगे।

किसान कुलदीप सिंह, रामदिया रामफल कृष्ण सिंह, गुरनाम सिंह, धीरेंद्र कुमार, धर्मपाल ने बताया कि अबकी बार जिस तरह गन्ने कि तरफ किसानों ने अपना रुझान बदला है। उससे लगता है कि आने वाले समय में किसान गन्ने कि फसल की और ज्यादा आकर्षित होंगे।

अब की बार जिन किसानों ने कम खर्चे व कम पानी वाली उक्त फसलें उगाई हैं उन किसानों के वारे न्यारे रहे। इन किसानों ने बताया कि गन्ने की खेती बहुत ही लाभदायक है, परंतु किसान ज्यादा पैदावार के मोह में आकर इस पारम्परिक खेती को भूलता जा रहा है।

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गन्ने की खेती किसान के लिए बहुत ही लाभदायक है, क्योंकि गन्ने की फसल में न तो ज्यादा पानी की आवश्यकता होती है और न ही ज्यादा खर्चा होता है। किसान वर्ग के लिए गन्ने की फसल नकदी फसल होने के कारण काफी मददगार साबित हो सकती है।

अमनदीप सिंह

अमनदीप सिंह एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 10 वर्षों से मौसम और कृषि से संबंधित खबरों पर गहन और जानकारीपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ मौसम के पूर्वानुमान, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों, योजनाओं और चुनौतियों को उजागर करती हैं, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। अमनदीप का लेखन सरल, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित है, जो कृषि समुदाय को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।

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