ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार जमीन या संपत्ति खरीदने के लिए गुरुवार और शुक्रवार को विशेष रूप से शुभ माना जाता है। गुरुवार को स्थिरता और लाभ से जोड़ा जाता है, जबकि शुक्रवार को सुख, समृद्धि और वैभव का कारक माना जाता है।
सोमवार और बुधवार को भी भूमि की खरीद-बिक्री, टोकन देने या प्रॉपर्टी से जुड़ी शुरुआती प्रक्रिया के लिए अनुकूल माना जाता है। हालांकि, केवल वार देखकर मुहूर्त तय नहीं किया जाता, बल्कि तिथि, नक्षत्र और उस दिन के राहुकाल को भी देखा जाता है।
जमीन खरीदने के लिए कौन से नक्षत्र शुभ माने जाते हैं?
धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं में कुछ नक्षत्रों को भूमि और संपत्ति से जुड़े कामों के लिए अनुकूल माना गया है। इनमें रोहिणी, मृगशिरा, पुष्य, उत्तर फाल्गुनी और रेवती नक्षत्र शामिल हैं।
मान्यता है कि इन नक्षत्रों में जमीन खरीदने या संपत्ति से जुड़ा सौदा करने से स्थिरता और समृद्धि मिल सकती है। हालांकि, किसी व्यक्ति के लिए सटीक मुहूर्त तय करने में जन्म कुंडली और स्थानीय पंचांग की गणना भी अलग परिणाम दे सकती है।
किन तिथियों में जमीन खरीदने से बचने की मान्यता है?
ज्योतिषीय परंपराओं में कुछ तिथियों को भूमि खरीदने के लिए अनुकूल नहीं माना जाता। इनमें चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी और अमावस्या प्रमुख हैं।
इन तिथियों में जमीन की खरीद, बयाना या अन्य बड़े संपत्ति सौदे से बचने की सलाह कुछ धार्मिक मान्यताओं में दी जाती है। हालांकि, अलग-अलग पंचांग और परंपराओं में मुहूर्त के नियमों में अंतर हो सकता है।
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मंगलवार और शनिवार को जमीन खरीदना चाहिए या नहीं?
मंगलवार को मंगल ग्रह से जोड़ा जाता है और धार्मिक मान्यताओं में मंगल को भूमि का कारक माना गया है। इसके बावजूद कई ज्योतिषीय परंपराएं मंगलवार को जमीन की खरीद, बयाना या संपत्ति के सौदे के लिए अनुकूल नहीं मानतीं।
शनिवार को लेकर भी अलग-अलग मत हैं। कुछ मान्यताओं में शनिवार को निर्माण और लोहे से जुड़े कार्यों के लिए अच्छा माना जाता है, लेकिन भूमि की खरीद-बिक्री के लिए कई ज्योतिषीय परंपराएं इस दिन से बचने की सलाह देती हैं।
राहुकाल में जमीन की रजिस्ट्री क्यों नहीं करने की सलाह दी जाती है?
राहुकाल को ज्योतिषीय परंपरा में शुभ कार्यों के लिए प्रतिकूल समय माना जाता है। इसी वजह से जमीन की रजिस्ट्री, बयाना, टोकन या संपत्ति से जुड़ी दूसरी अहम कागजी कार्रवाई राहुकाल में नहीं करने की सलाह दी जाती है।
यहां ध्यान रखना जरूरी है कि राहुकाल का समय हर दिन और स्थान के अनुसार बदलता है। इसलिए रजिस्ट्री का समय तय करते समय स्थानीय पंचांग में दिए गए राहुकाल को देखना चाहिए।
अधिक मास में जमीन खरीदने को लेकर क्या मान्यता है?
हिंदू पंचांग में अधिक मास को मलमास भी कहा जाता है। धार्मिक परंपराओं के अनुसार इस अवधि में कई शुभ और मांगलिक कार्यों से परहेज किया जाता है।
इसी मान्यता के आधार पर कुछ लोग अधिक मास के दौरान जमीन या दूसरी बड़ी संपत्ति खरीदने से भी बचते हैं। हालांकि, संपत्ति खरीदने का फैसला केवल धार्मिक मुहूर्त के आधार पर नहीं होना चाहिए; जमीन के दस्तावेज, मालिकाना हक, कानूनी स्थिति और रजिस्ट्री की प्रक्रिया की जांच भी जरूरी है।
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सितंबर 2026 में जमीन खरीदने के शुभ दिन कौन से हैं?
दिए गए ज्योतिषीय विवरण के अनुसार सितंबर 2026 में जमीन खरीदने के लिए ये तारीखें अनुकूल मानी गई हैं:
11 सितंबर 2026, शुक्रवार पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र
17 सितंबर 2026, गुरुवार अनुराधा नक्षत्र
18 सितंबर 2026, शुक्रवार मूल नक्षत्र
25 सितंबर 2026, शुक्रवार पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र
इन तारीखों पर भी जमीन की रजिस्ट्री या सौदा करने से पहले स्थानीय पंचांग के अनुसार शुभ समय और राहुकाल की जांच करना जरूरी माना जाता है। शहर के अनुसार सूर्योदय और सूर्यास्त के समय में अंतर होने से मुहूर्त के समय में भी बदलाव हो सकता है।
ध्यान रखें कि जमीन खरीदना बड़ा वित्तीय और कानूनी फैसला है। शुभ दिन और मुहूर्त धार्मिक मान्यताओं का हिस्सा हैं, जबकि खरीद से पहले जमीन के मालिकाना हक, जमाबंदी/राजस्व रिकॉर्ड, विवाद, ऋण या बंधक की स्थिति और अन्य जरूरी दस्तावेजों की स्वतंत्र जांच करना अधिक जरूरी है। #ShubhMuhurat #PropertyNews #Jyotish










