E20 petrol controversy: Ruckus over E20 petrol! What is this new fuel, know its advantages and disadvantages: नई दिल्ली | भारत में इन दिनों ई20 पेट्रोल को लेकर खूब चर्चा हो रही है। यह नया ईंधन, जिसमें 20% एथेनॉल और 80% पेट्रोल होता है, सरकार की 2030 की समयसीमा से पांच साल पहले ही पूरे देश में लागू कर दिया गया है।
इसका मकसद है पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम करना, घरेलू एथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देना और पर्यावरण को बचाना। लेकिन पुराने वाहन मालिकों में इसे लेकर चिंता है। उनका कहना है कि ई20 पेट्रोल से गाड़ी की माइलेज घट सकती है, इंजन को नुकसान हो सकता है और रखरखाव का खर्च बढ़ सकता है। आइए जानते हैं कि आखिर ई20 पेट्रोल है क्या और इससे जुड़ा विवाद क्यों है।
ई20 पेट्रोल के फायदे और चुनौतियां E20 petrol controversy
ई20 पेट्रोल को लेकर सबसे बड़ा विवाद इसकी अचानक लागू की गई नीति को लेकर है। कई लोग, खासकर पुराने वाहन मालिक, चिंता जता रहे हैं कि यह नया ईंधन उनकी गाड़ियों की कार्यक्षमता, माइलेज और इंजन की सेहत को प्रभावित कर सकता है।
दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि ई20 पेट्रोल पर्यावरण के लिए फायदेमंद है। यह न सिर्फ कार्बन उत्सर्जन को कम करता है, बल्कि किसानों को समर्थन देने और विदेशी ईंधन पर निर्भरता घटाने में भी मदद करता है। साथ ही, यह घरेलू एथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देता है, जिससे अर्थव्यवस्था को फायदा होगा।
क्या आपकी गाड़ी को होगा नुकसान?
अगर आपकी कार, बाइक या स्कूटर ई20-सपोर्टेड नहीं है, तो यह पेट्रोल आपके वाहन के रबर और प्लास्टिक पार्ट्स को नुकसान पहुंचा सकता है और धातु के हिस्सों में जंग लगने का खतरा बढ़ सकता है। खासकर BS3 और BS4 गाड़ियों में यह नुकसान ज्यादा हो सकता है, जबकि BS6 गाड़ियां इससे कम प्रभावित होती हैं। लेकिन अगर आपकी गाड़ी की टंकी पर ई20 सपोर्ट लिखा है या आपका इंजन ई20 के लिए डिज़ाइन किया गया है, तो चिंता की कोई बात नहीं।
कार्बन उत्सर्जन में 30% की कमी
सरकार और ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI), इंडियन ऑयल और सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) के टेस्ट के मुताबिक, ई20 पेट्रोल से माइलेज पर ज्यादा असर नहीं पड़ता। आधुनिक तकनीक वाली गाड़ियों में माइलेज में सिर्फ 1-2% की कमी देखी गई, जबकि पुरानी गाड़ियों में यह 3-6% तक हो सकती है।
सरकार का दावा है कि ई20 पेट्रोल इंजन की परफॉर्मेंस, जैसे एक्सेलेरेशन और राइड क्वालिटी, को बेहतर बनाता है। सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह कार्बन उत्सर्जन को करीब 30% तक कम करता है, जो पर्यावरण के लिए एक बड़ी राहत है।












