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EV vs Petrol-Diesel: क्यों धीमी पड़ रही Electric Vehicles की रफ्तार? बड़ा खुलासा

On: नवम्बर 19, 2025 9:10 पूर्वाह्न
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EV vs Petrol-Diesel: क्यों धीमी पड़ रही Electric Vehicles की रफ्तार? बड़ा खुलासा
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EV vs Petrol-Diesel: इलेक्ट्रिक वाहनों की रफ्तार पेट्रोल-डीजल वाहनों की तुलना में क्यों धीमी है? जानें EV मार्केट में गिरावट के दो बड़े कारण और ताज़ा आंकड़ों का पूरा विश्लेषण।

वाहनों से निकलने वाला धुआं प्रदूषण को लगातार बढ़ा रहा है, इसलिए इलेक्ट्रिक वाहनों को एक क्लीन विकल्प के तौर पर लाया गया था। लेकिन ताज़ा आंकड़े दिखाते हैं कि EV मार्केट अभी भी पेट्रोल और डीजल वाहनों की रफ्तार पकड़ नहीं पा रहा है।

सब्सिडी जैसी सरकारी मदद के बावजूद, सबसे ज्यादा बिक्री पेट्रोल और डीजल वाहनों की हो रही है, जबकि इलेक्ट्रिक व्हीकल की मांग सीमित कैटेगरी जैसे थ्री-व्हीलर, गुड्स व्हीकल, ई-बस और ई-रिक्शा में ही हल्की बढ़ोतरी दिखा रही है।

EV vs Petrol-Diesel: आंकड़ों में बड़ा अंतर

थिंक-टैंक EnviroCatalysts द्वारा जारी आंकड़े बताते हैं कि जनवरी से सितंबर 2024 तक 2.7 लाख पेट्रोल दोपहिया और 26,613 इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन रजिस्टर हुए।
2025 में इसी अवधि के दौरान यह संख्या बढ़कर 3.2 लाख पेट्रोल दोपहिया और 27,028 इलेक्ट्रिक दोपहिया तक पहुंची।

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चार्ट साफ दिखाता है कि दोनों की बिक्री बढ़ी है, लेकिन EV की स्पीड काफी कम है।

ई-बसों की संख्या भी 2024 के 779 से बढ़कर इस साल 1093 हुई, जबकि डीजल बसें 686 से बढ़कर 730 तक पहुंचीं।

थ्री-व्हीलर इलेक्ट्रिक वाहनों का रजिस्ट्रेशन 8379 से बढ़कर 11,331 हुआ, लेकिन इस साल एक भी इलेक्ट्रिक ऑटो सितंबर तक रजिस्टर नहीं हुआ, जबकि पिछले साल 1198 हुए थे।

फोर-व्हीलर सेगमेंट में कौन आगे?

फोर-व्हीलर कैटेगरी अब भी पेट्रोल वाहनों के कब्जे में है।
इलेक्ट्रिक निजी फोर-व्हीलर्स की संख्या 3848 से बढ़कर 9905 हुई है, लेकिन मार्केट शेयर अभी भी बेहद कम है।

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इस साल केवल 466 इलेक्ट्रिक पैसेंजर फोर-व्हीलर रजिस्टर हुए, जबकि 2024 में यह संख्या 1748 थी।

क्यों घट रही EV की बिक्री? दो बड़े कारण सामने आए

EV के स्पेयर पार्ट्स बेहद महंगे

दिल्ली ऑटो चालक संघ के अध्यक्ष अंकित शर्मा बताते हैं कि ई-ऑटो रजिस्ट्रेशन ना होने की सबसे बड़ी वजह कंट्रोलर और बैटरी जैसे पार्ट्स की कीमत है।
ये पार्ट्स सिर्फ कंपनी के पास उपलब्ध होते हैं और कीमत 1 लाख से भी ज्यादा है, जो कई ऑटो चालकों के लिए बहुत भारी पड़ता है।
इसके मुकाबले CNG का रखरखाव सस्ता है, इसलिए लोग EV से दूर हो रहे हैं।

नीतियों और EV इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी

EnviroCatalysts के प्रमुख विश्लेषक सुनील दहिया का कहना है कि कुल वाहन संख्या में EV का योगदान अभी भी काफी कम है।
उनका मानना है कि EV बिक्री बढ़ानी है तो नीतियों को मजबूत करना और चार्जिंग व सपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाना बेहद जरूरी है।

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भारत मेहंदीरत्ता

भारत मेहंदीरत्ता एक अनुभवी पत्रकार और लेखक हैं, जो पिछले 11 वर्षों से ऑटो और क्रिकेट से जुड़ी खबरों पर रोचक और तथ्यपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ ऑटोमोटिव इंडस्ट्री की नवीनतम जानकारियों, जैसे कार-बाइक लॉन्च, प्राइस अपडेट्स, और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, के साथ-साथ क्रिकेट की दुनिया की रोमांचक खबरों, जैसे मैच अपडेट्स, खिलाड़ियों के प्रदर्शन और टूर्नामेंट विश्लेषण को कवर करती हैं। भारत का लेखन शैली जीवंत, गहन और पाठक-केंद्रित है, जो ऑटो और क्रिकेट प्रेमियों को समान रूप से आकर्षित करता है।

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