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जबड़ा और दांत से बनेगा पूरा चेहरा! Panjab University के रिसर्चर्स ने रचा एआई से चमत्कार

On: जुलाई 27, 2025 12:42 अपराह्न
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जबड़ा और दांत से बनेगा पूरा चेहरा! Panjab University के रिसर्चर्स ने रचा एआई से चमत्कार
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AI Facial reconstruction model Panjab University: एआई फेशियल रिकंस्ट्रक्शन मॉडल अब सिर्फ साइंस फिक्शन का हिस्सा नहीं रहा।

पंजाब यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने एक ऐसी क्रांतिकारी तकनीक विकसित की है जो सिर्फ जबड़े और दांत के आधार पर किसी व्यक्ति का चेहरा 95% तक सटीकता के साथ बना सकती है।

ये इनोवेशन न सिर्फ फॉरेंसिक साइंस की दिशा में बड़ा कदम है, बल्कि डिजास्टर विक्टिम आइडेंटिफिकेशन (DVI) में भी गेमचेंजर साबित हो सकता है।

Panjab University रिसर्चर्स की टीम ने तैयार किया बायोमैट्रिक ब्रेकथ्रू

इस मॉडल को विकसित करने वाली टीम की अगुआई एंथ्रोपोलॉजी विभाग के प्रो. केवल कृष्ण ने की। उनके साथ फॉरेंसिक साइंस और डेंटल साइंस के एक्सपर्ट्स भी शामिल थे।

इस प्रोजेक्ट में छह पीएचडी स्कॉलर्स दामिनी सिवान, नंदिनी चितारा, अंकिता गुलेरिया, राकेश मीणा, आकांक्षा राणा और आयुषी श्रीवास्तव ने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।

इस एआई मॉडल को भारत सरकार के कॉपीराइट ऑफिस से अधिकार भी मिल चुका है। इसका साफ मतलब है कि यह इनोवेशन अब आधिकारिक रूप से सुरक्षित और मान्यता प्राप्त है।

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एयरक्रैश या बम ब्लास्ट में कैसे काम करेगा ये मॉडल?

ऐसे हादसे जहां शव बुरी तरह क्षत-विक्षत हो जाते हैं जैसे विमान दुर्घटना, बम विस्फोट या प्राकृतिक आपदाएं वहां आमतौर पर चेहरा पहचान में नहीं आता। लेकिन जबड़ा और दांत अक्सर सुरक्षित रहते हैं।

इस एआई टूल के जरिए, जबड़े और दांत की बनावट से पूरे चेहरे की डिजिटल तस्वीर तैयार की जा सकती है, जो 95% तक असल चेहरे से मेल खाती है।

यानी बिना किसी गवाह या फोटो के भी, फॉरेंसिक वैज्ञानिक वैज्ञानिक रूप से शव की पहचान कर सकते हैं।

फॉरेंसिक रिसर्च में एआई का बड़ा योगदान

इस प्रोजेक्ट का एक हिस्सा पीएचडी स्कॉलर दामिनी सिवान और डॉ. नंदिनी चितारा के शोध कार्य से जुड़ा है।

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दामिनी, जो IFSC से फॉरेंसिक साइंटिस्ट हैं, AI को फॉरेंसिक केसवर्क, रिसर्च और एथिक्स में प्रयोग कर रही हैं।

डॉ. नंदिनी चितारा, जिन्हें हाल ही में पीएचडी प्रदान की गई है, फिलहाल रीजनल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी, पंचकूला में सीनियर साइंटिफिक असिस्टेंट (बायोलॉजी) के पद पर कार्यरत हैं।

इस रिसर्च से फॉरेंसिक एंथ्रोपोलॉजिस्ट्स को उन मामलों में मदद मिलेगी जहां शव सड़ चुके हों, टुकड़ों में हों या एक-दूसरे में मिले हुए हों।

भविष्य की पहचान तकनीक बन सकता है ये मॉडल

आज जब एआई हर सेक्टर में दस्तक दे रहा है, ऐसे में ये इनोवेशन दिखाता है कि भारत के संस्थान भी ग्लोबल इनोवेशन की रेस में पीछे नहीं हैं।

चेहरे की पुनर्निर्माण तकनीक (Facial Reconstruction) के ज़रिए न सिर्फ अपराध सुलझाए जा सकते हैं, बल्कि मृतकों को पहचानकर उनके परिवार को closure मिल सकता है।

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UT से शुरू हुई ये रिसर्च अब नेशनल और इंटरनेशनल फॉरेंसिक डिपार्टमेंट्स के लिए भी एक आदर्श बन सकती है।

एआई फेशियल रिकंस्ट्रक्शन मॉडल के जरिए अब सिर्फ जबड़े और दांत से चेहरा पहचानना मुमकिन हो गया है। पंजाब यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने इसे तैयार कर एक बड़ा इनोवेशन किया है, जो फॉरेंसिक साइंस, डिजास्टर विक्टिम आइडेंटिफिकेशन और क्राइम सॉल्विंग में नया युग शुरू कर सकता है।

मौलिक गुप्ता

मौलिक गुप्ता एक प्रतिभाशाली और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 8 वर्षों से एंटरटेनमेंट और ट्रेंडिंग टॉपिक्स पर आकर्षक और ताज़ा खबरें लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ बॉलीवुड, टीवी, सेलिब्रिटी अपडेट्स, वायरल ट्रेंड्स और सोशल मीडिया की हलचल को कवर करती हैं, जो पाठकों को मनोरंजन की दुनिया से जोड़े रखती हैं। मौलिक का लेखन शैली जीवंत, रोचक और समयानुकूल है, जो युवा और विविध पाठकों को आकर्षित करता है। वे Haryananewspost.com न्यूज़ प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय हैं, जहाँ उनके लेख ट्रेंडिंग विषयों पर गहरी अंतर्दृष्टि और मनोरंजक जानकारी प्रदान करते हैं।

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