Bio-CNG Plant (हिसार) : खेतों, शुगर मिल और पोल्ट्री से निकलने वाले वेस्ट, गोशालाओं से निकलने वाले गोबर और शादियों में बचे भोजन वेस्ट से सीएनजी गैस तैयार हो रही है। यह गैस हाइवे और शहरों में दौड़ने वाली गाड़ियों में इंधन के रूप में इस्तेमाल हो रही है। हरियाणा में अब तक इस तरह के 17 प्लांट तैयार हो चुके हैं, इनमें से 2 प्लॉट हिसार ऐसे तैयार हो रही है बायो सीएनजी जिला में आरंभ हो चुके हैं।
इनमें एक उकलाना के नजदीकी गांव प्रभुवाला में आरंभ किया गया है और दूसरा राजगढ़ रोड पर गावड़ गांव के निकट लगाया है। जिसके तहत जैविक अपशिष्ट जैसे पहले वेस्ट को पानी के साथ मवेशियों के गोबर, कृषि अवशेषों आदि को बायोगैस, मिक्स करके सलरी बनाई जाती है। सीबीजी और बायो सीएनजी में परिवर्तित किया जा रहा है। इसके बाद इसे डाइजेस्टर में है। केंद्र सरकार ऐसे प्रोजेक्टस में मदद कर रही है।
CNG कैसे बन रही है?
कृषि अवशेषों जिनमें पराली, गन्ने की मैली आदि, गोबर, पोल्ट्री वेस्ट और शादियों में बचे भोजन के वेस्ट का इस्तेमाल करके ऑर्गेनिक बायो-एग्रो रिसोर्सेज धन गोबरधन नाम से यह सीएनजी तैयार की जा रही है। सरकार के जल शक्ति मंत्रालय द्वारा गैल्वनाइजिंग डालकर ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में फर्मेटेंशन करके बायोगैस तैयार की जाती है। बायोगैस को प्यूरीफाई करके उसमें मिथेन कंटेंट रखते हैं, इसकी प्यूरीटी 96 से 98 प्रतिशत रहती है। इसके बाद इसके कैम्प्रेश करके सीएनजी तैयार होती है, जिसे सिलेंडर में भरकर सप्लाई दी जाती है।
रोज 150 टन वेस्ट का निस्तांतरण
6 हजार किलो गैस बन रही प्रभुवाला में शुरू किए डेविनिक्स सीबीजी प्लांट से अखिल जैन ने बताया उनके प्लांट की रोज 125 से 150 टन वेस्ट उपयोग करने की कैपेसिटी है, इससे 6 हजार किग्रा सीएनजी तैयार हो सकती है। अभी प्लांट शुरुआती चरण में है और 30 प्रतिशत तक ही फंक्शनल है। उनकी कंपनी का इंडियन ऑयल और हरियाणा सिटी गैस एचसीजी के साथ कॉन्ट्रेक्ट है। यह एजेंसियां सीएनजी सिलेंडर प्लांट से ले जाती है, अपने पंपों पर वितरित करती हैं।
कृषि विभाग के एग्रीकल्चर इंजीनियर गोपीराम सांगवान ने बताया कि कैम्प्रेस्ड बायोगैस सीबीजी तैयार की जा रही है, इसे सीएनजी में कन्वर्ट भी किया जा रहा है। जिले में गावड़ व प्रभुवाला में इस तरह के दो प्लांट आरंभ हो चुके हैं। प्रदेशभर में 17 प्लांट तैयार हो चुके हैं, कुछ का काम पाइपलाइन में है।












