चंडीगढ़, 17 मई (हरियाणा न्यूज पोस्ट)। सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) द्वारा साल 2026 की 12वीं बोर्ड परीक्षा में पहली बार बड़े स्तर पर ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) यानी कंप्यूटर स्क्रीन पर कॉपियां जांचने की तकनीक अपनाई गई थी। हालांकि, परिणाम घोषित होने के बाद से ही मैथ्स, फिजिक्स, केमिस्ट्री और अकाउंटेंसी जैसे मुख्य विषयों में छात्रों के नंबर कम आने पर देशभर में सवाल उठने लगे। अभिभावकों और शिक्षकों के बढ़ते विरोध के बीच अब सीबीएसई ने पूरी मूल्यांकन प्रक्रिया का ब्योरा सार्वजनिक करते हुए बताया है कि इस बार पास प्रतिशत और औसत अंकों में हल्की गिरावट क्यों दर्ज की गई है।
मार्किंग स्कीम की कड़ाई बनी कम नंबर आने की वजह
बोर्ड के आधिकारिक स्पष्टीकरण के मुताबिक, डिजिटल चेकिंग के दौरान शिक्षकों ने मार्किंग स्कीम के नियमों का बेहद सख्ती से पालन किया है। फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स और अकाउंटेंसी में A1 और A2 ग्रेड की कट-ऑफ इस बार 1 से 3 अंक तक नीचे खिसक गई है। सीबीएसई ने साफ किया है कि यदि किसी छात्र ने उत्तर लिखने में शॉर्टकट या किसी ऐसे अलग तरीके का इस्तेमाल किया जो बोर्ड की आधिकारिक मार्किंग स्कीम में शामिल नहीं था, तो डिजिटल चेकिंग में उसके नंबर कटे हैं। इसी वजह से जेईई मेन (JEE Main) जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में 95 पर्सेंटाइल हासिल करने वाले कई मेधावी छात्रों के भी बोर्ड में उम्मीद से कम अंक आए हैं।
लॉग-इन फेलियर और खराब स्कैनिंग से आई तकनीकी बाधाएं
सीबीएसई ने स्वीकार किया कि इस नई व्यवस्था को लागू करने में शुरुआती स्तर पर कई तकनीकी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। स्कूलों में लॉग-इन की समस्या, आईपी व्हाइटलिस्टिंग (IP Whitelisting) की दिक्कतें और सर्वर पर लोड बढ़ने से सिस्टम ओवरलोड हो गया था। इसके अलावा, कुल 68,018 कॉपियां ऐसी थीं जिनकी स्कैनिंग की गुणवत्ता बेहद खराब थी, जिन्हें कई स्तरों पर जांच के बाद दोबारा स्कैन करना पड़ा। शिक्षकों के डेटा में त्रुटि होने की वजह से भी मूल्यांकन की शुरुआत में समय लगा।
13 हजार से ज्यादा कॉपियां मैन्युअली जांची गईं
रिजल्ट में देरी की आशंका और छात्रों के मानसिक तनाव को देखते हुए बोर्ड को आखिरी चरणों में अपनी रणनीति बदलनी पड़ी। सीबीएसई के अनुसार, करीब 13,583 उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग बार-बार कोशिशों के बाद भी खराब आ रही थी और उनमें लिखे उत्तर साफ नहीं दिख रहे थे। छात्रों के साथ अन्याय न हो, इसलिए बोर्ड ने इन सभी कॉपियों को डिजिटल सिस्टम से हटाकर अंत में पारंपरिक मैन्युअल तरीके से चेक कराया और उनके प्राप्तांकों को सीधे मुख्य सर्वर पर अपलोड किया।
छात्रों को मिला री-इवैल्यूएशन का मौका
अभिभावकों के आरोपों को ध्यान में रखते हुए सीबीएसई ने छात्रों को अपनी उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी ऑनलाइन देखने का अधिकार दे दिया है। छात्र अब खुद अपनी आंसर शीट डाउनलोड कर बोर्ड की मार्किंग स्कीम से उसका मिलान कर सकेंगे। यदि किसी छात्र को लगता है कि स्टेप-बाय-स्टेप मार्किंग में कोई गड़बड़ी हुई है, तो वह बोर्ड को चुनौती दे सकता है। इन सभी आपत्तियों की जांच विषय विशेषज्ञों (Subject Experts) की एक विशेष समिति करेगी और शिकायत सही पाए जाने पर छात्र के नंबरों को संशोधित कर दिया जाएगा।
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