CFSL voice detection technology Those who threaten by changing their voice will not be spared now, 99% accurate technology gets patent: किडनैपिंग, वसूली, ब्लैकमेलिंग या अन्य किसी मामले में धमकी देने के बाद पकड़े जाने वाले आरोपियों के लिए छूटना अब आसान नहीं होगा। वे अपनी आवाज बदलें, भाषा या स्क्रिप्ट, लेकिन सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (सीएफए्सए्ल) की ऑडियो एंड वीडियो लैब में पकड़ में आ जाएगा। लगभग 99% एक्युरेट इस तकनीक को हाल ही में पेटेंट मिला है। चीफ फॉरमिक ऑफिसर ऑफ इंडिया डॉ. एसके जैन, डॉ. शिवानी और पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला के डॉ. आरएन शर्मा ने इसे तैयार किया है। अब इस सॉफ्टवेयर का उपयोग देश भूर की फ्रिस्क लैब कर सकेंगी। इस ऑटोमेटिक सिस्टम को डॉ. जैन ने प्लान प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया था।
रिकॉर्डिंग डिवाइस का पता लगाने की क्षमता
सीएफएसएल ने आईआईटी रुड़की के साथ मिलकर डिजिटल वॉयस प्रफ को पकड़ने के लिए एक अन्य सिस्टम तैयार किया हैं। इसके तहत ये पता लग जाएगा कि किस मोबाइल से रिकॉर्डिंग की गई यदि रिकॉर्डिंग से कोई छेड़छाड़ की गई हैं तो भी पता लग जाएगा। कई बार रिकॉर्डिंग करने के बाद जानबूझकर उसमें अपने हिसाब से कुछ पोस जोड दिए जाते हैं।
खासतौर पर माहौल बिगाड़ने या छवि बिगाड़ने वाले मामलों में उनके उपयोग ज्यादा होता है। यह सिस्टम 97% तक कामयाब है। इसमें यदि धमकी, ब्लैकमेंलिंग आदि की भाषा को ठीक व्यक्ति के बोलते समय या बातचीत करते समय कई लोग मौजूद हैं डिवाइस कौन सी थी ये पता लग जाएगा। जैसे कि यदि कॉन्फ्रेंस कॉल के दौरान या एक ही कमरे में कई व्यक्तियों की मौजूदगी थी तो वॉयस सैंपल का सॉफ्टवेयर तुरंत बता देगा कि किस मोबाइल से रिकॉर्डिंग हुई है।
ऐसे में आरोपी को पकड़ना आसान हीगा। करीब 60- 70 केस होते हैं। सीएफएसएल साइंटिस्ट ने बताया कि ब्लेकमेलिग या धमकी पर बे अपनी आवाज बदल लेते हैं। आमतौर बदलकर बात करते हैं। या फिर पकडे जाने आदि के समय अपराधी आमतौर पर आवाज पर अभी मसदिमध पकड़ा जाता हैं तो उससे जाता है।
पहले की तकनीक में धमकी देने के सभी संदिग्ध का सेंपल लकर स्पेव्टोप्राफिक एनालिसिस होता रहा है इसमें कटवनव्ड वही चाहिए लेकिन कई बार दिक्कत आती थी कि आरोपी सैंपल विद सेम टेक्स्ट नहीं देते थे। आवाज बदल लेते थे या उन्हें शब्दों को अलग अंदाज से भी बोलते थे। खासतौर पर ऐसे मामलों में ज्यादा दिक्कत थी, जिसमें आरोपी एक से ज्यादा हैं। अब यदि 10 या ज्यादा संदिग्ध भी हैं तो भो ऑटोमेटिक सिस्टम के जरिए उसे पकड़ा जा सकता है।
भाषा, अंदाज या आवाज बदलने से फर्क नहीं पड़ेगा। इसे शुरुआत में 10 भारतीय भाषाओं के साथ बनाया गया है। हिंदी और अंग्रेजी के अलावा बंगाली, कन्नड़, पंजाबी, कश्मीरी, तमिल, तेलुगू. गुजराती और मणिपुरी में भी टेस्टिंग हो सकती है।













