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Chandigarh air quality: चंडीगढ़ की हवा में सुधार, 6% बढ़ा ग्रीन कवर, फिर भी टॉप-3 से दूर!

On: सितम्बर 10, 2025 8:56 पूर्वाह्न
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Chandigarh air quality: चंडीगढ़ की हवा में सुधार, 6% बढ़ा ग्रीन कवर, फिर भी टॉप-3 से दूर!
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Chandigarh Air Pollution, (चंडीगढ़) : चंडीगढ़ ने स्वच्छ हवा की दिशा में एक और कदम बढ़ाया है। शहर का ग्रीन कवर 6% तक बढ़ गया है, और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, ईवी पॉलिसी, डस्ट कंट्रोल जैसे क्षेत्रों में शानदार काम हुआ है। इंडस्ट्रियल पॉल्यूशन पर सख्ती, पब्लिक अवेयरनेस प्रोग्राम, ईवी चार्जिंग स्टेशन, नॉन-मोटराइज्ड ट्रांसपोर्ट नेटवर्क, इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट, ऑटोमेटिक रोड स्वीपिंग और धूल नियंत्रण के प्रयासों ने शहर की रैंकिंग को बेहतर किया है। लेकिन फिर भी चंडीगढ़ टॉप-3 या टॉप-5 में जगह नहीं बना सका। इसका कारण? पर्टिकुलेट मैटर (PM10) का स्तर, जिसे 40% तक कम करना था, उल्टा बढ़ गया। 2019 में PM10 का स्तर 117 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर था, जो 2025 में बढ़कर 121 माइक्रोग्राम हो गया।

फंड खर्च और प्रदूषण का आंकड़ा

चंडीगढ़ में प्रदूषण कम करने के लिए भारी-भरकम फंड जारी हुआ, लेकिन नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे। 2019-20 में 8.28 करोड़ रुपये जारी हुए, जिनमें से 1.45 करोड़ खर्च हुए और PM10 का स्तर 92 था। 2020-21 में 5 करोड़ में से 5.64 करोड़ खर्च हुए, लेकिन स्तर 90 रहा। 2021-22 में 4.61 करोड़ में 2.53 करोड़ खर्च हुए, स्तर बढ़कर 97 हो गया। 2022-23 में 6.87 करोड़, 2023-24 में 8.05 करोड़ और 2024-25 में 7.92 करोड़ में से 2.93 करोड़ खर्च हुए, लेकिन PM10 का स्तर 121 तक पहुंच गया। यानी खर्च बढ़ा, लेकिन प्रदूषण भी बढ़ता गया।

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टॉप-3 में आने की चुनौती

चीफ कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट और डायरेक्टर एन्वायर्नमेंट यूटी चंडीगढ़, सौरभ कुमार ने कहा, “चंडीगढ़ के लिए ये बड़ी उपलब्धि है, लेकिन अभी और मेहनत की जरूरत है। हमारा लक्ष्य है कि प्रशासन और शहरवासी मिलकर प्रदूषण कम करें। जिन क्षेत्रों में कमी रही, उन पर काम करेंगे ताकि चंडीगढ़ टॉप-3 में आए।” कई नए प्रोजेक्ट शुरू हो चुके हैं, और कुछ अगले कुछ हफ्तों में शुरू होंगे।

प्रदूषण क्यों नहीं रुक रहा?

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चंडीगढ़ एक लैंड-लॉक्ड शहर है, इसलिए आसपास के इलाकों की गतिविधियां और गाड़ियों की आवाजाही हवा की गुणवत्ता को प्रभावित करती है। अभी तक कोई वैज्ञानिक अध्ययन नहीं हुआ कि प्रदूषण बढ़ने की असल वजह क्या है। शहर में हर दिन औसतन 130-150 गाड़ियां रजिस्टर होती हैं, जो देश के बाकी शहरों से ज्यादा है। ट्रैफिक जाम रोकने के लिए इंटेलिजेंट ट्रैफिक सिस्टम, खुली जगहों पर घास की कवरेज, ज्यादा पेड़ लगाने और प्रदूषण फैलाने वाली गाड़ियों पर सख्ती जरूरी है।

प्रदूषण कम करने की कोशिशें

प्रदूषण की वजह जानने के लिए आईआईटी से एक स्टडी करवाई जा रही है, जो इस साल पूरी होगी। इसके बाद जोन-वाइज प्रदूषण कम करने पर काम होगा। इस साल ईवी का हिस्सा 18% करने का लक्ष्य है, जो अभी 15% है। प्रशासन का फोकस है कि वैज्ञानिक तरीके से प्रदूषण के कारणों को समझा जाए और उसे कम करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

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भारत मेहंदीरत्ता

भारत मेहंदीरत्ता एक अनुभवी पत्रकार और लेखक हैं, जो पिछले 11 वर्षों से ऑटो और क्रिकेट से जुड़ी खबरों पर रोचक और तथ्यपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ ऑटोमोटिव इंडस्ट्री की नवीनतम जानकारियों, जैसे कार-बाइक लॉन्च, प्राइस अपडेट्स, और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, के साथ-साथ क्रिकेट की दुनिया की रोमांचक खबरों, जैसे मैच अपडेट्स, खिलाड़ियों के प्रदर्शन और टूर्नामेंट विश्लेषण को कवर करती हैं। भारत का लेखन शैली जीवंत, गहन और पाठक-केंद्रित है, जो ऑटो और क्रिकेट प्रेमियों को समान रूप से आकर्षित करता है।

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