Chandigarh AQI Pollution Control Committee issues notice to Municipal Corporation, Railways and Administration: चंडीगढ़ में एयर पॉल्यूशन बड़ी समस्या बनता जा रहा है। अब कई दिशा निर्देशों के साथ चंडीगढ़ पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी (सीपीसीसी) ने रेलवे, नगर निगम और इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट चंडीगढ़ प्रशासन समेत कई बड़े डिपार्टमेंट्स को नोटिस जारी किए हैं।
सीपीसीसी मेंबर सेक्रेटरी सौरभ कुमार ने कहा कि शहर में एयर पॉल्यूशन को कंट्रोल करने के लिए बड़े स्तर पर कार्रवाई की जरूरत है और इसमें सभी का योगदान जरूरी है। इसलिए ये नोटिस भेजे गए हैं, जिन पर कमेंट्स मांगे गए हैं।
संबंधित विभागों या संस्थानों की तरफ से कमेंट नहीं भेजे जाते तो संबंधित निर्देशों को कन्फर्म माना जाएगा और विभाग उन पर आगे काम करेंगे। सीपीसीसी अभी पंजाब यूनिवर्सिटी, प्रशासन के अलग-अलग विभागों, चंडीगढ़ स्थित सेंट्रल और साथ लगते राज्यों के सरकारी विभागों को भी नोटिस भेजेगी।
सभी को नोटिस एयर (प्रिवेंशन एंड कंट्रोल ऑफ पॉल्यूशन) एक्ट-1981 सेक्शन 31-ए के तहत जारी किए गए हैं। इनमें कहा गया है कि वर्ष 1988 में ही चंडीगढ़ को एयर पॉल्यूशन कंट्रोल एरिया घोषित किया जा चुका है। एयर एक्ट के हिसाब से पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी यहां पॉल्यूशन कंट्रोल करने के लिए कई दिशा निर्देश तय करेगी।
Chandigarh AQI: नोटिस और उसमें निर्देश
नगर निगम कमिश्नर, चंडीगढ़ सेंट्रल वर्ज को ईको-फ्रेंडली पेवर ब्लॉक से कवर करें। रात को सड़कों को टर्शरी ट्रीटेड वॉटर से धोया जाए, ताकि धूल न उड़े। इसके लिए प्रत्येक रोड की तरफ टर्शरी वॉटर की पाइपलाइन का इंतजाम किया जाए।
सबसे प्रमुख सड़कों पर जहां ट्रैफिक ज्यादा रहता है, वहां पानी का रेगुलर छिड़काव करें। नगर निगम इलेक्ट्रिक व्हीकल्स खरीदे और सुबह सभी सड़कों में पानी का छिड़काव करे, ताकि सड़कों में झाडू लगाने से मिट्टी हवा में न जाए। जितने भी ओपन एरिया नगर निगम के दायरे में आते हैं उनको घास या पौधे लगाकर कवर करें।
चीफ इंजीनियर यूटी चंडीगढ़ प्रशासन सेंट्रल वर्ज को कवर करें। रात को सड़कों को टर्शरी ट्रीटेड वॉटर से धुलवाएं। प्रमुख सड़कों में जहां ट्रैफिक ज्यादा रहता है वहां पानी का रेगुलर छिड़काव हो। निर्माण संबंधी कामों में सुनिश्चित करें कि मिट्टी हवा में न जाए। इसके लिए निर्माण स्थलों में प्रॉपर इंतजाम किया जाना चाहिए। प्रशासन के दायरे में आने वाले ओपन एरिया घास या पौधे लगाकर कवर करें।
डिविजनल रेलवे मैनेजर (डीआरएम) नॉर्दर्न रेलवे, अंबाला रेलवे की ज्यूरिस्डिक्शन में आने वाले सारे एरिया साफ रखें, पानी से धोएं। लोडिंग-अनलोडिंग एरिया में साफ सफाई का खास ध्यान रखा जाए। यहां गाड़ियों के टायरों की वॉशिंग का इंतजाम हो। अपने यहां डस्ट हॉटस्पॉट की पहचान कर वहां पानी का छिड़काव करें। रेलवे की जमीन पर जहां पेड़ नहीं हैं, उसे घास से कवर करें। ओपन एरिया को ईको-फ्रेंडली पेवर ब्लॉक से कवर करें।
15 दिनों में कमेंट्स
इस नोटिस में सीपीसीसी ने सभी को 15 दिनों का समय दिया है कि जिसमें वह अपने कमेंट्स सीपीसीसी को सब्मिट करेंगे। संबंधित विभाग या संस्थान इतने दिनों में अपने कमेंट्स सब्मिट नहीं करता है तो प्रस्तावित दिशा निर्देशों को कन्फर्म समझा जाएगा और इन पर विभाग को उसी तरह से काम करना पड़ेगा। सीपीसीसी इसकी रेगुलर मॉनिटरिंग करेगी।
एयर पॉल्यूशन को कंट्रोल करने के लिए सोर्स लेवल स्टडी
चंडीगढ़ में एयर पॉल्यूशन की असल वजह जानने के लिए आईआईटी कानपुर और रोपड़ से सोर्स लेवल स्टडी करवाई जा रही है। इसकी प्राथमिक रिपोर्ट में पाया गया है कि यहां हवा की स्पीड नॉर्मल या उससे कम रहने पर ज्यादा एयर पॉल्यूशन होता है।
ये स्टडी सीजन वाइज की जा रही है, जिसकी फाइनल रिपोर्ट इस साल के आखिर तक प्रशासन को मिलेगी। इसके साथ ही प्रशासन का एन्वायर्नमेंट डिपार्टमेंट कार्बन एमिशन पर भी स्टडी करवाने जा रहा है ताकि आगे जोन वाइज इसे कंट्रोल किया जा सके। चंडीगढ़ में एयर पॉल्यूशन चंडीगढ़ में एयर पॉल्यूशन की समस्या सर्दियों में ज्यादा रहती है।
अक्टूबर से फरवरी तक एयर क्वालिटी इंडेक्स कई गुणा बढ़ जाता है। एवरेज 250 से 300 प्वाइंट तक एक्यूआई रहता है, जो वेरी पुअर कैटेगरी है। पिछले साल नवंबर के पहले 15 दिनों में लगातार कई दिनों तक एक्यूआई 350 प्वाइंट के आसपास रहा था।
चंडीगढ़ पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी को कई तरह की एक्टिविटीज पर पाबंदी लगानी पड़ी थी। कंस्ट्रक्शन वर्क और जेनरेटर बंद करने के निर्देश जारी किए गए थे।












