Chandigarh High Court parking 530 vehicles in 5 acres, Supreme Court approval: चंडीगढ़ हाईकोर्ट पार्किंग की खबर ने वकीलों, वादियों, और आम जनता को राहत की सांस दी है! चंडीगढ़ प्रशासन ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के सामने 5 एकड़ कच्ची जमीन को खुली पार्किंग में बदलने की तैयारी शुरू कर दी है। ये पार्किंग 530 वाहनों को जगह देगी, और खास बात? हरित पेवर ब्लॉक से हरियाली भी बरकरार रहेगी। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस पर्यावरण-अनुकूल योजना को हरी झंडी दी है। लेकिन ये पार्किंग कैसे बदलेगी आपका अनुभव? और हरित पेवर की खासियत क्या है? चलिए, इस हरे-भरे प्रोजेक्ट की कहानी को मजेदार और आसान अंदाज में जानते हैं।
Chandigarh High Court: 530 गाड़ियों का नया ठिकाना
चंडीगढ़ हाईकोर्ट के सामने पार्किंग की दिक्कत किसी से छिपी नहीं। वकील, वादी, और आम लोग रोज इस झंझट से जूझते हैं। अब प्रशासन ने 5 एकड़ खुली जमीन को ओपन पार्किंग में बदलने का प्लान बनाया है। लैंडस्केप कंसल्टिंग कंपनी की डिजाइन के मुताबिक, यहां 530 वाहन खड़े हो सकेंगे। हरित पेवर ब्लॉक, पेड़, और घास का कॉम्बिनेशन न सिर्फ पार्किंग को सुविधाजनक बनाएगा, बल्कि गर्मी में छाया और बारिश में पानी का प्रबंधन भी करेगा। ये प्रोजेक्ट हाईकोर्ट आने वालों की सबसे बड़ी मुश्किल को हल करने का वादा करता है।
हरित पेवर: पर्यावरण का दोस्त
हरित पेवर ब्लॉक इस पार्किंग की जान हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 28 मई 2025 के अपने 31-पेज के आदेश में इनका इस्तेमाल करने की मंजूरी दी। ये ब्लॉक खास तकनीक से बने होते हैं, जिनमें खाली जगहें होती हैं। इनके बीच घास उगाई जाएगी, और पेड़ लगाए जाएंगे। बारिश का पानी इनके जरिए जमीन में रिसेगा, जिससे मिट्टी का कटाव नहीं होगा। साधारण कंक्रीट ब्लॉकों की तुलना में ये पर्यावरण के लिए कहीं। पेड़ों की छाया गाड़ियों को गर्मी से बचाएगी, और हरियाली चंडीगढ़ की खूबसूरती को बरकरार रखेगी।
चंडीगढ़वासियों के लिए राहत की उम्मीद
चंडीगढ़ हाईकोर्ट पार्किंग प्रोजेक्ट शहरवासियों के लिए एक बड़ा तोहफा है। रोज हाईकोर्ट आने वाले लोग पार्किंग की जद्दोजहद से छुटकारा पाएंगे। पर्यावरण-अनुकूल डिजाइन से न सिर्फ सुविधा बढ़ेगी, बल्कि शहर की हरी-भरी पहचान भी बचेगी। प्रशासन की ये पहल दिखाती है कि विकास और पर्यावरण का तालमेल मुमकिन है। अगर आप हाईकोर्ट के आसपास रहते हैं या वहां काम करते हैं, तो इस प्रोजेक्ट पर नजर रखें। जल्द ही आपकी गाड़ी को हरा-भरा और सुरक्षित ठिकाना मिलने वाला है!
यूनेस्को हेरिटेज का ख्याल
हाईकोर्ट के सामने का इलाका यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कैपिटल कॉम्प्लेक्स का हिस्सा है। इसलिए प्रशासन कोई जोखिम नहीं ले रहा। पार्किंग का काम वरिष्ठ इंजीनियरों और सांस्कृतिक विरासत विशेषज्ञों की निगरानी में होगा। हाईकोर्ट से फाइनल मंजूरी मिलने के बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू होगी। ठेकेदार को हरित पेवर बिछाने, पेड़ लगाने, और ड्रेनेज सिस्टम बनाने का जिम्मा मिलेगा। 2023 की हेरिटेज इम्पैक्ट असेसमेंट रिपोर्ट ने भूमिगत पार्किंग का विरोध किया था, क्योंकि उससे प्रदूषण और सौंदर्य को नुकसान का डर था। हरित पेवर योजना इसीलिए चुनी गई।













