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चंडीगढ़ सेक्टर-53: हाउसिंग बोर्ड ने हाथ खींचे, अब प्राइवेट बिल्डर्स बनाएंगे आपके सपनों का घर

On: February 6, 2026 8:07 PM
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चंडीगढ़ सेक्टर-53: हाउसिंग बोर्ड ने हाथ खींचे, अब प्राइवेट बिल्डर्स बनाएंगे आपके सपनों का घर
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चंडीगढ़ (ब्यूरो)। ट्राइसिटी में घर का सपना देख रहे लोगों के लिए चंडीगढ़ प्रशासन ने एक बड़ा और रणनीतिक बदलाव किया है। सेक्टर-53 की बहुप्रतीक्षित हाउसिंग परियोजना अब चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (CHB) के बजाय निजी बिल्डरों के हाथों में होगी।

प्रशासन ने निर्णय लिया है कि बोर्ड अब यहां निर्माण कार्य नहीं करेगा, बल्कि लगभग 9 से 10 एकड़ बेशकीमती जमीन की नीलामी करेगा। यह चंडीगढ़ के रियल एस्टेट इतिहास में पहला मौका है जब CHB अपनी प्राइम लोकेशन की जमीन निजी डेवलपर्स को सौंप रहा है।

क्यों फेल हुई हाउसिंग बोर्ड की योजना?

इस बड़े फैसले के पीछे मुख्य कारण फ्लैट्स की आसमान छूती कीमतें रहीं। CHB ने जब यहां 372 फ्लैट्स की योजना बनाई थी, तो 3BHK की कीमत करीब 2.5 करोड़, 2BHK की 2 करोड़ और EWS (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) फ्लैट की कीमत 1 करोड़ रुपये तक पहुंच गई थी।

इतनी ऊंची लागत के कारण आम खरीदारों ने आवेदन में रुचि नहीं दिखाई। इसके अलावा, तकनीकी अड़चनों और निर्माण लागत में लगातार हो रही वृद्धि ने बोर्ड को यह प्रोजेक्ट डंप करने पर मजबूर कर दिया।

अप्रैल से पहले नीलामी की तैयारी और भविष्य की तस्वीर

प्रशासन इस जमीन की नीलामी प्रक्रिया में तेजी ला रहा है क्योंकि अप्रैल माह में शहर में कलेक्टर रेट बढ़ना तय माना जा रहा है। अगर रेट बढ़ते हैं, तो प्रोजेक्ट की लागत और बढ़ जाएगी। यूटी के चीफ आर्किटेक्ट फिलहाल जमीन को अलग-अलग जोन में बांट रहे हैं ताकि नियमों के तहत निर्माण हो सके।

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इस फैसले का सीधा असर शहर के रियल एस्टेट बाजार पर पड़ेगा। प्रशासन का तर्क है कि निजी बिल्डर्स जब ‘हाई-राइज’ (ऊंची) इमारतें बनाएंगे, तो फ्लैट्स की संख्या बढ़ेगी। सप्लाई बढ़ने से फ्लैट्स की कीमतें कम हो सकती हैं, जिसका सीधा फायदा मध्यम वर्ग को मिलेगा।

सेक्टर-53, जो मोहाली सीमा के पास स्थित है, कनेक्टिविटी के लिहाज से एक प्रीमियम लोकेशन है, इसलिए यहां निजी बिल्डर्स की अच्छी प्रतिक्रिया मिलने की उम्मीद है।

कर्मचारियों के लिए 11 एकड़ सुरक्षित

सेक्टर-53 कुल 21 एकड़ में फैला है। राहत की बात यह है कि प्रशासन ने इसमें से 11 एकड़ जमीन यूटी कर्मचारियों की आवास योजना (UT Employees Housing Scheme) के लिए अलग रखी है। निजी बिल्डरों को केवल शेष बची 9-10 एकड़ जमीन ही नीलामी में दी जाएगी। इससे सरकारी कर्मचारियों के आशियाने की उम्मीदें अभी भी बरकरार हैं।

FAQ: सामान्यतः पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न: CHB ने सेक्टर-53 में फ्लैट न बनाने का फैसला क्यों लिया?

उत्तर: फ्लैट्स की अत्यधिक कीमत (2.5 करोड़ तक) और लोगों द्वारा आवेदन न करने के कारण बोर्ड ने स्कीम वापस ले ली।

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प्रश्न: क्या अब सेक्टर-53 में सरकारी फ्लैट नहीं मिलेंगे?

उत्तर: नहीं, अब बची हुई जमीन पर निजी बिल्डर प्रोजेक्ट बनाएंगे और फ्लैट्स सीधे खुले बाजार में बेचेंगे।

प्रश्न: निजी बिल्डरों के आने से आम जनता को क्या फायदा होगा?

उत्तर: प्रशासन का मानना है कि निजी बिल्डर ऊंची इमारतें बनाएंगे, जिससे ज्यादा फ्लैट्स बनेंगे और कीमतें सरकारी रेट से कम हो सकती हैं।

प्रश्न: यूटी कर्मचारियों की हाउसिंग स्कीम का क्या होगा?

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उत्तर: 21 एकड़ में से 11 एकड़ जमीन अभी भी यूटी कर्मचारियों की योजना के लिए आरक्षित रखी गई है।

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राहुल शर्मा

राहुल शर्मा एक कुशल पत्रकार और लेखक हैं, जो पिछले 8 वर्षों से ब्रेकिंग न्यूज़, हरियाणा न्यूज़ और क्राइम से जुड़ी खबरों पर प्रभावशाली लेख लिख रहे हैं। उनकी खबरें तथ्यपूर्ण, गहन और तेज़ी से पाठकों तक पहुँचती हैं, जो हरियाणा और अन्य क्षेत्रों की महत्वपूर्ण घटनाओं को उजागर करती हैं। राहुल का लेखन शैली आकर्षक और विश्वसनीय है, जो पाठकों को जागरूक और सूचित रखता है। वे Haryananewspost.com और डिजिटल मंचों पर सक्रिय हैं, जहाँ उनकी स्टोरीज़ सामाजिक और आपराधिक मुद्दों पर गहरी छाप छोड़ती हैं।

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