Chandigarh medical tourism fraud: High court rejects demand for CBI probe, expresses confidence in local police: चंडीगढ़ मेडिकल टूरिज्म धोखाधड़ी मामले की जांच सीबीआई को सौंपने से पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने इनकार कर दिया है। मामला कीनिया निवासी महिला से जुड़े कथित धोखे का है, जिसमें आरोप है कि याचिकाकर्ता और उनके डेंटिस्ट पति ने मेडिकल टूरिज्म पैकेज का झांसा देकर महिला का सही इलाज नहीं किया और उसे आर्थिक नुकसान हुआ।
जस्टिस मनीषा बतरा ने फैसले में कहा कि सीबीआई जांच का अधिकार असाधारण, सावधानीपूर्वक और विशेष परिस्थितियों में ही किया जाना चाहिए, जब जांच की विश्वसनीयता और निष्पक्षता पर सवाल उठे या मामला राष्ट्रीय-अंतरराष्ट् रीय महत्व का हो।
यदि सामान्य मामले में जांच सीबीआई को सौंप दी जाए, तो एजेंसी के सीमित संसाधनों के चलते गंभीर मामलों की जांच भी प्रभावित होगी और उसकी साख पर असर पड़ेगा।
चंडीगढ़ निवासी याचिकाकर्ता डॉ. रोजी अरोड़ा ने सेक्टर-19 थाने में उनके और उनके पति डॉ. मोहित धवन के खिलाफ धोखाधड़ी के मामले में 21 सितंबर 2020 को दर्ज एफआईआर की जांच सीबीआई से कराने की मांग की थी।
उनका कहना था कि उन्हें झूठा फंसाया गया है और असल विवाद शिकायतकर्ता और उनके पति डॉ. मोहित धवन के बीच का है। शिकायत 2018 में की गई लेकिन एफआईआर 2020 में दर्ज की गई जबकि शिकायतकर्ता ने उनके खिलाफ कोई आरोप नहीं लगाया था।
जांच सीबीआई को नहीं दे सकते
कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि निष्पक्ष जांच और न्याय के लिए असाधारण परिस्थितियों में ही सीबीआई जांच का आदेश दिया जा सकता है। आरोपी को स्थानीय पुलिस पर भरोसा नहीं है या जांच पक्षपातपूर्ण है, महज इस आधार पर जांच सीबीआई को नहीं दी जा सकती।
कोर्ट ने कहा कि सीबीआई जांच का आदेश तभी दिया जा सकता है जब कोर्टको प्रथम दृष्टया लगे कि मामला असाधारण है और जांच में गंभीर खामी या पक्षपात है। इस मामले में कोर्ट ने पाया कि आरोपों के मुताबिक डॉ. रोजी अरोड़ा ही क्लिनिक की मालकिन थीं और उन्होंने अपने पति के साथ मिलकर शिकायतकर्ता को इलाज के लिए प्रेरित किया था।
कोर्ट ने माना कि यह ऐसा कोई असाधारण मामला नहीं है जहां सीबीआई जांच जरूरी हो। ऐसे में सीबीआई जांच की मांग को स्वीकार नहीं किया जा सकता।













