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Chandigarh News: जिंदगी में मिली चुनौतियों से लोहा लेने वाली 10 माओं को राज्यपाल ने किया सम्मानित

On: मई 28, 2025 5:16 अपराह्न
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Chandigarh News: जिंदगी में मिली चुनौतियों से लोहा लेने वाली 10 माओं को राज्यपाल ने किया सम्मानित
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Chandigarh News the Governor honoured 10 mothers who fought hard and faced challenges in lifeचंडीगढ़। तमाम मुश्किलों या विपरीत परिस्थितियों में मजबूती से हर बाधा को पार करते हुए बहुत सी माएं अपने बच्चों को उनकी मंजिल तक पहुंचाती हैं। संघर्ष के रास्ते पर चलते हुए जिंदगी में मिली चुनौतियों से लोहा लेते हुए जिंदगी जीने का हौसला रखने वालीं 10 माओं को बुधवार को मां सम्मान समारोह में सम्मानित किया गया।

यह वह माएं हैं जिन्होंने तमाम मुश्किलों या विपरीत परिस्थितियों में मजबूती से हर बाधा को पार किया और अपने बच्चों के सपनों को पूरा किया। जब इन माओं को सम्मानित किया गया तो सभी ने उनके हौसले को सलाम किया।

मानव मंगल स्मार्ट स्कूल, मोहाली और डॉ.जीसी मिश्रा मेमोरियल एजुकेशनल एवं चैरीटेबल ट्रस्ट की ओर से आयोजित बारहवें मां सम्मान समारोह में सम्मानित हुईं संघर्षशील माओं की कहानी सुनकर सभागार में बैठे हर किसी की आंखे नम हो गई । इस सम्मान समारोह में पंजाब के राज्यपाल व चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने माओं का सम्मान किया।

समारोह में चंडीगढ़ के अलावा पंजाब और हरियाणा की माओं को सम्मानित किया गया। सभी माओं के संघर्ष की अलग अलग कहानी है। किसी ने विपरीत परिस्थितियों में तमाम चुनौतियां का सामना करते हुए अपने बेटे को डॉक्टर या आईएएस बनाया तो किसी ने अपने लगातार संघर्ष करते हुए अपनी बेटी को प्रिंसिपल के पद पर पहुंचाया।

किसी ने अनाथ बच्चों का सहारा बनकर उन्हें उनकी मंजिल तक पहुंचाया तो किसी ने विपरीत परस्थितियों का सामना कर अपनी बेटी को अंतरर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलवाई। वहीं, दो ऐसी मां भी सम्मानित हुई जो अपनी दृष्टिहीन बेटियों के सपने को साकार करने के लिए संघर्ष के पथ पर आगे बढ़ रही हैं।

साथ ही समारोह में एक ऐसी मां को भी सम्मान मिला जिसने अपना दूध दान कर नवजात शिशुओं की जान बचाने का काम किया।

स्कूल के सभागार में हुए इस सम्मान समारोह में समारोह की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इसके बाद मानव मंगल स्मार्ट स्कूल के छात्र-छात्राओं की ओर से जीवन में मां के योगदान पर आकर्षक प्रस्तुति देकर सबका मन मोह लिया।

Chandigarh News: 10 माओं का सम्मान किया

इस मौके पर जिन 10 माओं का सम्मान किया उनमें चंडीगढ़ की सुमन और भारती, पंजाब के फजिल्का की नवीन जसूजा, पंचकूला की रितिका सोबती, जीरकपुर की शिवानी जग्गी, हरियाणा के युमनानगर की जसविंदर कौर, पटियाला की पुष्पा देवी, मोहाली की सरबजीत कौर शामिल हैं।

समारोह में एसओएस चिल्ड्रेन विलेज इंडिया, राजपुरा की माधुरी सिंह को मदर ऑफ द ईयर पुरस्कार दिया गया गया। वहीं, 18वीं पंजाब रेजिमेंट के कैप्टन शहीद रोहित कौशल की मां वीना शर्मा को भी सम्मानित किया गया। शहीद रोहित कौशल ने 11 नवंबर 1995 को जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में उग्रवाद से लड़ते हुए अपना जीवन बलिदान कर दिया था।

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इस मौके पर राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने आयोजकों के इस प्रयास की सराहना करते हुए सम्मानित होने वाली सभी माओं का अभिनंदन किया। उन्होंने माँ की भूमिका को जीवन की सबसे बड़ी शक्ति बताते हुए कहा कि एक ओर माँ जीवन भर सम्मान देती है तो दूसरी ओर विद्यालय बच्चों को शिक्षित कर भविष्य संवारता है।

माँ हमेशा दिल में रहती है क्योंकि वह कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी अपने बच्चे का पालन-पोषण करती है। माँ को अपने बच्चों की पीड़ा का एहसास दूर बैठे भी हो जाता है। जीवन में जो भी कुछ बनता है, उसमें माँ का योगदान सबसे पहले होता है।

अपनी मां को याद करते हुए राज्यपाल ने कहा कि उनके पिता ने शायद ही कभी पढ़ाई के लिए उठाया हो, लेकिन माँ ने हर सुबह उठाकर पढ़ाया है। कटारिया ने कहा कि माँ कभी हिम्मत नहीं हारती, चाहे खुद विधवा होकर भी बच्चे को पाल-पोसकर बड़ा क्यों न करना पड़े।

भारत का इतिहास माँ की वजह से ही जिंदा है। माँ और मातृभूमि सबसे बड़े सम्मान के अधिकारी हैं। जब कोई सैनिक युद्धभूमि में वीरता दिखाता है, तो वह भी किसी माँ की ही संतान होता है। माँ का कर्ज कभी नहीं चुकाया जा सकता।

उन्होंने यह भी कहा कि माँ के बाद अगर किसी को सबसे बड़ा सम्मान मिलना चाहिए तो वह शिक्षक होते हैं, जिनका नाम जीवनभर याद रहता है। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने मानव मंगल स्कूल की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह संस्थान युवाओं को गढ़ने में उत्कृष्ट कार्य कर रहा है और जितना योगदान माँ का होता है, उतना ही योगदान एक अच्छे विद्यालय का भी होता है।

समारोह में मानव मंगल ग्रुप ऑफ स्कूल्स के डॉयरेक्टर संजय सरदाना और एसोसिएट डॉयरेक्टर संकल्प सरदाना और समर्थ सरदाना, मानव मंगल हाई स्कूल, सेक्टर-21 की ब्रांच डॉयरेक्टर अंजलि सरदाना, डॉ. जीसी मिश्रा मेमोरियल एजुकेशन एवं चैरिटेबल ट्रस्ट के मैनेजिंग ट्रस्टी मयंक मिश्रा भी मौजूद थे।

समारोह के दौरान मयंक मिश्रा ने अपनी नई किताब ‘बौनी गुड़िया’ राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया को भेंट की। मां सम्मान समारोह में मंच का संचालन उमा महाजन ने किया। ध्यान रहे कि डॉ. जीसी मिश्रा मेमोरियल एजुकेशन एवं चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से मानव मंगल स्मार्ट स्कूल के साथ करीब 12 सालों से मदर्स डे पर सम्मान समारोह आयोजित किया जा रहा है। डॉ. मिश्रा पीयू से रिटायर हुए थे, उन्हीं की याद में उनके पुत्र मयंक मिश्रा ने इस ट्रस्ट का गठन किया गया।

माधुरी सिंह को मिला मदर ऑफ द ईयर पुरस्कार

समारोह में एसओएस चिल्ड्रेन विलेज इंडिया, राजपुरा की माधुरी सिंह को मदर ऑफ द ईयर पुरस्कार दिया गया। माधुरी सिंह ने करीब 40 बेसहारा बच्चों को पौधे की तरह सींचकर छायादार वृक्ष बनाया। वह 1995 में एसओएस चिल्ड्रेन विलेज इंडिया, राजपुरा आई थीं।

इन 30 सालों में वह देश के अलग-अलग हिस्सों से यहां लाए गए 40 अनाथ बच्चों की मां बनीं जिनकी पूरी जिम्मेदारी उन्होंने बखूबी निभाई। इन बच्चों को काबिल बनाने में उन्होंने किसी तरह की कोई कसर नहीं छोड़ी। इनमें से उनके कुछ बच्चे देश-दुनिया में अपना मुकाम हासिल कर चुके हैं। ये बच्चे मेडिकल,आईटी और रिटेल सेक्टर में काम कर रहे हैं।

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दृष्टिहीन बेटियों का सहारा बनीं मां

समारोह में दो ऐसी माओं को सम्मानित किया गया जो अपनी दृष्टिहीन बेटियों का सहारा बनीं। मोहाली के एक गांव की निवासी सरबजीत कौर की बेटी हरलीन पैदायशी दृष्टिहीन है। लेकिन, सरबजीत उसे कभी हारते हुए नहीं देखना चाहती थीं। यही वजह थी कि वह उसकी आंखें बन गईं।

गांव में जब लडकियों की अकसर 12 वीं के बाद शादी करा दी तो जाती है, तब उन्होंने तय किया कि वह बेटी को पढ़ा लिखा कर अपने पैरों पर खड़ा करेंगी जीवन में हमेशा सकारात्मक सोच के साथ आगे बढऩे वाली सरबजीत कौर के संघर्ष का ही परिणाम रहा कि बीए में 83 फीसदी अंक हासिल कर दृष्टिहीन हरलीन सामान्य बच्चों के लिए मिसाल बन गईं।

वहीं, चंडीगढ़ निवासी सुमन की तीन साल की बेटी कैफी के ऊपर होली के दिन उनके परिवार से रंजिश रखने वाले कुछ लोगों ने एसिड फेंक दिया था। इस दुर्घटना में कैफी का चेहरा खराब हो गया और उसकी आंखों की रोशनी चली गई।

बेटी को अच्छी शिक्षा देने के उद्देश्य से परिवार चंडीगढ़ शिफ्ट हुआ और कैफी का एडमिशन सेक्टर-26 के इंस्टीट्यूट आफ ब्लाइंड में करवा दिया। कैफी की मेहनत और सुमन के संघर्ष का नतीजा यह रहा कि सीबीएसई दसवीं और बारहवीं की परीक्षा में उसने अपने स्कूल में टॉप किया।

दूध डोनेट कर बचाई कई शिशुओं की जान

शिशु के लिए मां का दूध अमृत होता है। इस बात को डॉक्टर तक मानते हैं। लेकिन फिर भी कई शिशुओं को मां का दूध नहीं मिल पाता है। जीरकपुर निवासी शिवानी जग्गी ने करीब डेढ़ साल तक चंडीगढ़ के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में स्थापित मिल्क बैंक में अपना दूध डोनेट कर न जाने कितने ऐसे शिशुओं की जान बचाई है जिन्हें पैदा होने के बाद अपनी मां का दूध नसीब नहीं हुआ।

अधिक उत्पादन होने पर कई महिलाएं अपने अतिरिक्त दूध को पौधों में फेंक देती हैं। लेकिन, शिवानी ने ऐसा नहीं किया। डिलीवरी के बाद जब उन्हें एक्ट्रा मिल्क प्रोडेक्शन होने लगा तो उन्होंने ठान लिया कि वे दूध फेंकने की बजाय किसी जरूरतमंद बच्चों तक इसे पहुंचाएंगी। अपनी इच्छा से उन्होंने मिल्क बैंक में दूध डोनेट करना शुरू किया क्योंकि वह जानती हैं कि एक शिशु के लिए इसकी अहमियत क्या है।

करियर छोड़ बेटे को बनाया डॉक्टर

पंजाब के फाजिल्का की निवासी नवीन जसूजा पेशे के वकील हैं। एमबीबीएस करते हुए बेटा विदुर सड़क हादसे का शिकार हो गया। विदुर के स्पाइनल कॉर्ड में गहरी चोट लग गई। इस वजह से वह 6 महीने वह अपने बैच से पिछड़ गए। ऐसी स्थिति में जब विदुर को जिन्दगी मुश्किल लगने लगी और उसका बाहर आना-जाना और दोस्तों के साथ घूमना बंद हो गया, तो मां नवीन ने उसे सहारा दिया।

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इस हादसे के बाद विदुर की लिखने की गति कम हो गई थी। ऐसे में नवीन ने अपना करियर छोड़ दिया और विदुर की एमबीबीएस पूरा होने तक वह उसके साथ रहीं। वह उसके लिए पेपर लिखती थीं। नवीन के इस हौसले के कारण ही विदुर एबीबीएस पूरी कर सके और आज वह पीजीआई, चंडीगढ़ में बतौर साइकेट्रिस्ट लोगों का इलाज कर रहे हैं।

दृष्टिहीन बेटे को बनाया आईएएस

हरियाणा के मध्यम वर्गीय परिवार से संबंध रखने वालीं जसविंदर कौर ने जब अपने बेटे अंकुरजीत सिंह का स्कूल में दाखिला करवाया तो उन्हें पता चला कि उसे कम दिखाई दे रहा था। कुछ समय बाद जब बेटे को एक दम से दिखना बंद हो गया था, तो जसविंदर कौर ने ठान लिया कि वह हार नहीं मानेंगी।

जब उन्हें अपने बेटे की समस्या का पता चला तो जो भी वह स्कूल से पढ़कर आता था रात को उसे पढ़कर सुनाती थीं। इस तरह से वे सुनकर पढ़ाई करने लगा। जब गर्मियों की छुट्टियों में बच्चे खेलते और मस्ती करते थे, तब जसविंदर कौर सारी किताबें पहले ही उसे पढ़ा देती थीं।

जसविंदर कौर के मागर्दर्शन से बारहवीं के बाद उनके बेटे ने आईआईटी रूड़की से इंजीनियरिंग की। जसविंदर कौर हर परिस्थिति से लड़ीं, जिसका नतीजा यह रहा कि बेटा आईएएस अधिकारी बना और वर्तमान में वह शहीद भगत सिंह नगर अर्थात नवांशहर के डीसी के पद पर कार्यरत हैं।

खुद ज्यादा नहीं पढ़ सकीं, बेटी को बनाया प्रिंसिपल

पटियाला निवासी पुष्पा देवी का संघर्ष बचपन में ही शुरू हो गया था, जब मात्र 10 साल की उम्र में उनकी मां गुज़र गईं। बचपन में ही अपने पिता का सहारा बनने और अपने छोटे भाई बहनों के पालन पोषण के लिए अपनी पढ़ाई त्याग दी। इसके बाद उन्हें अपने बच्चों की परवरिश में भी काफी संघर्ष करना पड़ा।

अपने बच्चों की शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य के लिए पुष्पा देवी ने कोई कसर नहीं छोड़ी। वह खुद ज्यादा पढ़ नहीं सकीं, लेकिन उन्होंने हमेशा शिक्षा के महत्व समझा और अपने दोनों बच्चों को उच्च शिक्षा दिलवाई।

अपने बच्चों को उनकी मंजिल तक पहुंचाने के किए गए उनके संघर्ष का परिणाम यह रहा कि उनकी बेटी पीएचडी करने के बाद आज हरियाणा के सरकारी स्कूल में प्रिंसिपल के पद पर कार्यरत है जबकि उनका बेटा एक विदेशी न्यूज़ एजेंसी में सीनियर इकनॉमिक्स कॉरेस्पोंडेंट है।

अमित गुप्ता

पत्रकारिता में पिछले 30 वर्षों का अनुभव। दैनिक भास्कर, अमर उजाला में पत्रकारिता की। दैनिक भास्कर में 20 वर्षों तक काम किया। अब अपने न्यूज पोर्टल हरियाणा न्यूज पोस्ट (Haryananewspost.com) पर बतौर संपादक काम कर रहा हूं। खबरों के साथ साथ हरियाणा के हर विषय पर पकड़। हरियाणा के खेत खलियान से राजनीति की चौपाल तक, हरियाणा सरकार की नीतियों के साथ साथ शहर के विकास की बात हो या हर विषयवस्तु पर लिखने की धाकड़ पकड़। म्हारा हरियाणा, जय हरियाणा।

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