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Digital Data Protection Act: अब दुकानों में मोबाइल नंबर देना जरूरी नहीं! नया डेटा कानून लाएगा क्रांति

On: अगस्त 30, 2025 8:35 पूर्वाह्न
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Digital Data Protection Act: अब दुकानों में मोबाइल नंबर देना जरूरी नहीं! नया डेटा कानून लाएगा क्रांति
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Digital Data Protection Act: Now it is not necessary to give mobile number in shops! New data law will bring revolution: नई दिल्ली | अब मॉल और दुकानों में बिलिंग के दौरान मोबाइल नंबर देना जरूरी नहीं रहेगा! सरकार का नया डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट (DPDP) उपभोक्ताओं की निजता की रक्षा के लिए तैयार किया गया है।

इस कानून के तहत अब दुकानों, मॉल और रिटेल स्टोर्स में ग्राहकों से मोबाइल नंबर मांगना गैरकानूनी होगा। यह कदम डेटा सुरक्षा की दिशा में बड़ी जीत माना जा रहा है।

डेटा बेचने पर पूरी तरह रोक Digital Data Protection Act

कई रिटेल कंपनियां अब तक ग्राहकों के मोबाइल नंबर इकट्ठा करके उन्हें महंगे दामों पर बेचती थीं। लेकिन नया कानून इस पर पूरी तरह से रोक लगाएगा। अब बिना ग्राहक की स्पष्ट सहमति के न तो डेटा लिया जा सकेगा और न ही उसे बेचा जा सकेगा।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, यह कानून कंपनियों को ग्राहकों के डेटा के इस्तेमाल पर दोबारा सोचने के लिए मजबूर करेगा, खासकर लॉयल्टी प्रोग्राम के लिए।

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मोबाइल नंबर का विकल्प क्या? Digital Data Protection Act

अब दुकानदार मौखिक रूप से नंबर मांगने की बजाय की-पैड एंट्री या अन्य तरीकों से डेटा लेंगे, ताकि गोपनीयता बनी रहे। साथ ही, ग्राहकों को यह बताना जरूरी होगा कि उनका डेटा क्यों लिया जा रहा है, कितने समय तक रखा जाएगा और कब डिलीट होगा।

स्पष्ट सहमति जरूरी

नए कानून के तहत डेटा लेने के लिए ग्राहक की स्पष्ट और प्रत्यक्ष सहमति अनिवार्य होगी। अब तक चली आ रही इशारों वाली सहमति (इम्प्लाइड कंसेंट) को मान्यता नहीं दी जाएगी।

सेवा से इनकार नहीं कर सकेंगे दुकानदार

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अगर कोई ग्राहक मोबाइल नंबर देने से मना करता है, तो दुकानदार उसे सेवा देने से इनकार नहीं कर सकेंगे। अब दुकानों को भौतिक रसीद या ईमेल रसीद जैसे विकल्प देने होंगे।

हाउसिंग सोसायटी भी आएंगी दायरे में

यह कानून सिर्फ दुकानों तक सीमित नहीं है। विजिटर मैनेजमेंट सिस्टम, हाउसिंग सोसायटी और ऐसी जगहों पर जहां फोन नंबर दर्ज किए जाते हैं, वहां भी यह लागू होगा। डेटा लेने की वजह और उसकी सुरक्षा की जानकारी देना अनिवार्य होगा।

तीन साल बाद डेटा डिलीट करना जरूरी

नए नियमों के मुताबिक, मोबाइल नंबर जैसे डेटा को सिर्फ उसी उद्देश्य के लिए रखा जा सकेगा, जिसके लिए लिया गया था। अधिकतम तीन साल बाद या ग्राहक की सहमति वापस लेने पर डेटा डिलीट करना होगा।

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GDPR जैसे सख्त नियम

विशेषज्ञों का कहना है कि यह कानून भारत को यूरोप के GDPR जैसे ग्लोबल डेटा प्रोटेक्शन स्टैंडर्ड के करीब लाएगा। कंपनियों को अब जवाबदेह होना पड़ेगा कि वे डेटा सिर्फ तय उद्देश्य के लिए लें और समय पर हटा दें। यह कानून अगस्त 2025 से लागू होगा।

अमित गुप्ता

पत्रकारिता में पिछले 30 वर्षों का अनुभव। दैनिक भास्कर, अमर उजाला में पत्रकारिता की। दैनिक भास्कर में 20 वर्षों तक काम किया। अब अपने न्यूज पोर्टल हरियाणा न्यूज पोस्ट (Haryananewspost.com) पर बतौर संपादक काम कर रहा हूं। खबरों के साथ साथ हरियाणा के हर विषय पर पकड़। हरियाणा के खेत खलियान से राजनीति की चौपाल तक, हरियाणा सरकार की नीतियों के साथ साथ शहर के विकास की बात हो या हर विषयवस्तु पर लिखने की धाकड़ पकड़। म्हारा हरियाणा, जय हरियाणा।

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