चंडीगढ़, 18 अप्रैल (हरियाणा न्यूज पोस्ट)। हरियाणा के सरकारी विभागों में सालों से ‘कच्चे’ रहकर सेवा दे रहे कर्मचारियों के लिए आज का दिन ऐतिहासिक साबित हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए साल 2014 की नियमितीकरण पॉलिसी के तहत पक्के हुए करीब 5000 कर्मचारियों को सेवा में बनाए रखने की मंजूरी दे दी है। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस सुदीप अहलूवालिया की हाई कोर्ट बेंच ने साल 2018 में जिन पॉलिसियों को ‘अवैध’ करार दिया था, सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें मानवीय और संवैधानिक आधार पर सही ठहराया है। अदालत के इस फैसले से बिजली विभाग, गेस्ट टीचर और अन्य सरकारी महकमों में कार्यरत हजारों परिवारों को बड़ी राहत मिली है।
हुड्डा सरकार की पॉलिसी पर विवाद
मामले की जड़ें साल 2014 में तत्कालीन हुड्डा सरकार द्वारा चुनाव से ठीक पहले बनाई गई तीन पॉलिसियों में हैं। जून 2014 में अधिसूचित इन नीतियों के तहत 30 जून 2014 तक 3 साल की सेवा पूरी करने वाले कर्मियों को पक्का किया गया था। हालांकि, बाद में 7 जुलाई 2014 को एक और पॉलिसी लाकर 10 साल की सेवा वाले कर्मियों को भी पक्का करने का रोडमैप तैयार हुआ। सरकार बदलते ही इन फैसलों को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई, जहाँ अदालत ने इसे नियमों के विरुद्ध बताते हुए रद कर दिया था। अब सुप्रीम कोर्ट ने दखल देते हुए स्पष्ट किया है कि दशकों से तंत्र चला रहे कर्मचारियों को अनुबंध की बेड़ियों में बांधकर रखना उनके अधिकारों का हनन है।
सरकार को दिए विशेष निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कर्मचारियों के पक्ष में कड़ी टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि जो कर्मचारी भर्ती के वक्त सभी योग्यताएं पूरी करते थे और 10 साल की निरंतर सेवा दे चुके हैं, उन्हें पक्का करना सरकार की जिम्मेदारी है। यदि किसी विभाग में नियमित पदों की कमी है, तो सरकार को विशेष ‘अधिसंख्य पद’ सृजित करने होंगे। तब तक इन कर्मचारियों को नियमित पदों के समकक्ष न्यूनतम वेतनमान देना अनिवार्य होगा। हालांकि, कोर्ट ने 7 जुलाई 2014 की अधिसूचना को ‘मनमाना’ बताते हुए रद बरकरार रखा है, लेकिन पहले से पक्के हुए कर्मचारियों की सेवाओं को सुरक्षित कर दिया है।
अब नहीं रहेगी छंटनी की तलवार
इस फैसले के बाद अब उन कर्मचारियों की पदोन्नति और वेतन वृद्धि का रास्ता भी साफ हो गया है जो साल 2018 से ‘यथास्थिति’ के आदेश पर काम कर रहे थे। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सेवा में बने हुए नियमित कर्मचारियों की स्थिति में कोई नकारात्मक बदलाव नहीं किया जाएगा। यह फैसला हरियाणा के हजारों गेस्ट टीचरों और बिजली निगम के कर्मचारियों के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है, जो पिछले 8 सालों से कानूनी लड़ाई के कारण मानसिक और आर्थिक दबाव झेल रहे थे।
HBSE Haryana Board Result 2026: इस तारीख को आएगा 10वीं-12वीं का रिजल्ट, बोर्ड ने दी बड़ी अपडेट
ब्रेकिंग न्यूज़ और जिलेवार अपडेट के लिए Haryana News Post से जुड़े रहें।













