Farmer Tree Cutting Rules: New law or a conspiracy to cut the roots of farmers?: किसान पेड़ कटाई नियम 2025 (Farmer Tree Cutting Rules 2025) ने देश के किसानों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। भारत हर साल 40,000 करोड़ रुपये से अधिक का टिंबर और नॉन-टिंबर उत्पाद आयात करता है, लेकिन अपने खेत के पेड़ काटने के लिए किसान को चार विभागों से अनुमति लेनी पड़ती है।
देश के 85% किसानों के पास चार एकड़ से कम जमीन है। क्या वे डिजिटल पोर्टल, KML फॉर्मेट और वीडियोग्राफी जैसी जटिलताओं से जूझ पाएंगे? यह नियम किसानों को वृक्षारोपण (tree plantation) से जोड़ने के बजाय हतोत्साहित कर रहा है। आइए, इस नियम की सच्चाई और इसके प्रभाव को समझें।
जटिल प्रक्रिया, किसानों की परेशानी Farmer Tree Cutting Rules
नए नियम के तहत, किसान को अपने खेत के पेड़, जैसे सागौन, शीशम या गम्हार (timber trees), काटने के लिए वन विभाग, राजस्व विभाग, ग्राम पंचायत और कृषि विभाग से अनुमति लेनी होगी। इसके लिए राष्ट्रीय टिंबर प्रबंधन प्रणाली (NTMS) पर रजिस्ट्रेशन, पेड़ों की तस्वीर, ऊंचाई, उम्र और KML फॉर्मेट में लोकेशन अपलोड करनी पड़ती है।
10 से अधिक पेड़ों के लिए वेरिफिकेशन एजेंसी की जांच भी जरूरी है। मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश में 4.5 लाख से अधिक आवेदन लंबित हैं। कई किसानों का ट्रैक्टर जब्त हो जाता है, और कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाने पड़ते हैं। यह प्रक्रिया पारदर्शी (transparent process) होने के बजाय भ्रष्टाचार को बढ़ावा देती है।
किसानों की अनसुनी आवाज
सरकार का दावा है कि यह नियम किसानों के हित में है, लेकिन क्या किसानों से राय ली गई? पहले भूमि अधिग्रहण और तीन कृषि कानूनों (farm laws) ने किसानों का विश्वास तोड़ा। अब यह नया नियम उनकी जड़ें काटने जैसा है।
देश के आदिवासी क्षेत्रों में, जैसे बस्तर और सरगुजा, किसानों ने बिना सरकारी मदद के पेड़ उगाए, लेकिन अब उन्हें काटने के लिए इंटरनेट कैफे और सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। 85% किसान, जिनके पास स्मार्टफोन चलाने की सुविधा नहीं, डिजिटल नियमों (digital regulations) में कैसे फिट होंगे? किसान संगठनों, जैसे AIFA और ICFA, की सलाह को नजरअंदाज करना गलत है।
समाधान की राह
किसान पेड़ कटाई नियम 2025 (Farmer Tree Cutting Rules 2025) को तत्काल संशोधित करने की जरूरत है। सरकार को किसानों और उनके संगठनों से खुली चर्चा करनी चाहिए। एक सरल, भ्रष्टाचार-मुक्त और एकल बिंदु प्रक्रिया बनानी होगी, जिसमें छोटे किसान भी आसानी से भाग ले सकें।
पंचायत, पटवारी और वन विभाग के जटिल चक्करों को खत्म करना जरूरी है। किसानों को अपने खेत के पेड़ काटने और बेचने की आजादी मिलनी चाहिए, ताकि वे पर्यावरण संरक्षण के साथ आय (farmer income) भी बढ़ा सकें। अगर यह नियम नहीं बदला, तो वृक्षारोपण पुण्य नहीं, बल्कि कानूनी बोझ बन जाएगा।













