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रोहतक के किसानों का नया दांव: गेहूं-धान छोड़ चुकंदर से कमा रहे बंपर मुनाफा

On: April 17, 2026 6:46 PM
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रोहतक के किसानों का नया दांव: गेहूं-धान छोड़ चुकंदर से कमा रहे बंपर मुनाफा
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रोहतक, 17 अप्रैल (हरियाणा न्यूज पोस्ट)। हरियाणा की उपजाऊ धरती पर अब खेती का स्वरूप बदलने लगा है। प्रदेश सरकार की प्रोत्साहन नीतियों के चलते रोहतक जिले के किसानों ने परंपरागत खेती का मोह त्यागकर बागवानी और नकदी फसलों (Cash Crops) की ओर रुख किया है। इसी कड़ी में ‘चुकंदर’ यहां के किसानों के लिए कुबेर का खजाना साबित हो रहा है। कम लागत और बेहद कम समय में तैयार होने वाली इस फसल ने जिले के कई गांवों की आर्थिक सूरत बदल दी है। किसान अब प्रति एकड़ डेढ़ लाख रुपये से ज्यादा की कमाई कर सीधे तौर पर अपनी आय दोगुनी कर रहे हैं।

20 हजार का निवेश और डेढ़ लाख की कमाई

खेती के इस नए मॉडल में लागत और मुनाफे का समीकरण बेहद आकर्षक है। मांढी जाटान गांव के प्रगतिशील किसान जसबीर ग्रेवाल बताते हैं कि एक एकड़ में चुकंदर की बुवाई से लेकर कटाई तक करीब 20 हजार रुपये का खर्च आता है। वहीं, पैदावार की बात करें तो प्रति एकड़ लगभग 250 क्विंटल तक उत्पादन मिल जाता है। बाजार में चुकंदर की मांग को देखते हुए किसानों को 1 लाख से लेकर 1.60 लाख रुपये तक की कुल आमदनी हो रही है। जसबीर जैसे कई किसान अब इंटरनेट और आधुनिक जानकारी के दम पर साल में दो बार चुकंदर की फसल ले रहे हैं।

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बीमारियों का कम डर और महज 80 दिन में फसल तैयार

चुकंदर की खेती का सबसे बड़ा फायदा इसकी मजबूती है। जसबीर ग्रेवाल के अनुभव के मुताबिक, इस फसल में कीटों और फफूंद (Fungus) का खतरा काफी कम रहता है, जिससे महंगी दवाओं के छिड़काव की जरूरत नहीं पड़ती। यह फसल मध्यम तापमान में भी बेहतर विकास करती है और सिर्फ 70-80 दिनों के भीतर मंडी में जाने के लिए तैयार हो जाती है। कम रिस्क और सुनिश्चित बाजार भाव के कारण यह उन किसानों के लिए एक बेहतरीन विकल्प बनकर उभरी है, जो पारंपरिक फसलों की सीमित आय से परेशान थे।

इंटरनेट और सरकारी नीतियों ने दिखाई नई राह

कभी धान और गेहूं तक सीमित रहने वाले किसान आज ‘स्मार्ट फार्मिंग’ कर रहे हैं। जसबीर ने बताया कि उन्होंने चुकंदर की खेती की बारीकियां इंटरनेट के जरिए सीखीं और फिर इसे आजमाने का फैसला किया। आज वे दूसरे किसानों को भी यही सलाह दे रहे हैं कि सही बीज और बेहतर प्रबंधन के साथ चुकंदर जैसी नकदी फसलें अपनाकर किसान अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकते हैं। हरियाणा सरकार की ओर से मिल रही प्रोत्साहन राशि ने भी किसानों के हौसले बुलंद किए हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों में बागवानी का रकबा तेजी से बढ़ रहा है।

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अमनदीप सिंह

अमनदीप सिंह एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 10 वर्षों से मौसम और कृषि से संबंधित खबरों पर गहन और जानकारीपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ मौसम के पूर्वानुमान, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों, योजनाओं और चुनौतियों को उजागर करती हैं, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। अमनदीप का लेखन सरल, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित है, जो कृषि समुदाय को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।

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