Haryana Gaali culture: Haryana Gaali Band Ghar Abhiyan: 62% people abuse their sisters and daughters, Sunil Jaglan’s initiative shows the mirror: हरियाणा गाली बंद घर अभियान ने समाज के उस पहलू को उजागर कर दिया है, जो अक्सर नजरअंदाज़ कर दिया जाता है — भाषा का अपमानजनक व्यवहार और उसका बच्चों, महिलाओं व सामाजिक आचरण पर पड़ता असर।
चौंकाने वाले आंकड़े: गाली देना बन गई आदत Haryana Gaali culture
महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस और सेल्फी विद डॉटर फाउंडेशन के फाउंडर (सुनील जागलान) ने अपने अभियान ‘गाली बंद घर’ के तहत 11 वर्षों में 70,000 से अधिक लोगों पर बेसलाइन सर्वे किया। इसमें पाया गया कि (हरियाणा में 62%) और (दिल्ली में 80%) लोग बहन-बेटी को लेकर गालियां देते हैं।
चौंकाने वाली बात यह है कि करीब (30% महिलाएं भी इस व्यवहार को अपनाती हैं)। खास तौर पर युवा वर्ग ने (वीडियो गेम्स, सोशल मीडिया और OTT कंटेंट) के जरिए यह आदत सीख ली है।
किन राज्यों में ज्यादा और कम है गाली का चलन?
सर्वे के अनुसार गाली के सबसे अधिक प्रयोग वाले राज्यों में शामिल हैं:
हरियाणा: 62%
दिल्ली: 80%
पंजाब: 78%
उत्तर प्रदेश व बिहार: 74%
राजस्थान: 68%
जबकि सबसे कम गाली देने वाले राज्य हैं:
कश्मीर: 15%
उड़ीसा, तेलंगाना और पूर्वोत्तर के सेवन सिस्टर राज्य
इन क्षेत्रों में गालियों का प्रयोग औसतन 30% कम पाया गया। यह दर्शाता है कि विभिन्न राज्यों में भाषा की संस्कृति और पारिवारिक माहौल का बड़ा असर होता है।
गाली की शुरुआत और उसके सामाजिक परिणाम
प्रोफेसर सुनील जागलान कहते हैं कि “बच्चा जिस माहौल में पलता है, उसकी भाषा उसी से बनती है।” जब घर, गली या स्कूल में बच्चे को बहन-बेटी के नाम पर गाली सुनने को मिलती है, तो वह उसे अपना लेता है। यह गालियां फिर भावनाओं, लड़ाई या मज़ाक तक हर स्तर पर आ जाती हैं।
2014 में शुरू हुए (गाली बंद घर अभियान) को दुनिया भर में सराहना मिली है। इसके विडियो को (50 लाख से ज्यादा बार देखा गया) और (2 लाख से अधिक कमेंट) मिले हैं। अब तक देशभर में 60,000 से अधिक गाली बंद चार्ट लगवाए जा चुके हैं।












