Haryana LDC recruitment: High Court reprimands electricity department, orders vigilance inquiry: हरियाणा LDC भर्ती विवाद ने एक बार फिर सरकारी चयन प्रक्रियाओं की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। साल 2019 में DHBVN और UHBVN द्वारा की गई लोअर डिविजन क्लर्क (LDC) की भर्ती में दोहरी सूचना प्रणाली अपनाए जाने से हाईकोर्ट गंभीर हो गया है। कोर्ट ने इस रवैये को न्याय के सिद्धांतों पर प्रहार बताते हुए DHBVN व UHBVN अधिकारियों को आड़े हाथों लिया है।
कोर्ट ने पाया कि कुछ उम्मीदवारों को निजी मैसेंजर के जरिए सूचना दी गई तो कुछ को डाक से। जिनके पास मैसेंजर से सूचना पहुँची, उनमें से अधिकतर ने ज्वाइन किया। जबकि डाक द्वारा सूचना पाने वाले अधिकांश उम्मीदवारों को कोई पुष्ट जानकारी नहीं मिली। इससे भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठे हैं।
सूचना देने के तरीके बने विवाद की जड़ Haryana LDC recruitment
(Haryana electricity department recruitment) में 946 LDC पदों के लिए चयन प्रक्रिया की शुरुआत हुई थी। इनमें DHBVN को 478 और UHBVN को 486 पद दिए गए। DHBVN को दो चरणों में 490 उम्मीदवारों की सूची मिली। लेकिन सूचना देने के तरीके में बड़ा अंतर देखने को मिला।
करीब 240 उम्मीदवारों को (messenger recruitment method) से सूचना भेजी गई, जिससे 220 ने ज्वाइनिंग दी। वहीं 190 को डाक द्वारा सूचना भेजी गई, लेकिन केवल 20 ही ज्वाइन कर पाए। कोर्ट की वेबसाइट जांच में सामने आया कि अधिकांश डाक रसीदें अप्राप्त रहीं, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि जानकारी देने का तरीका भेदभावपूर्ण था।
कोर्ट ने दिए विजिलेंस जांच के सख्त निर्देश
(DHBVN LDC issue) पर कोर्ट ने ना सिर्फ नाराजगी जताई बल्कि मैनेजिंग डायरेक्टर अशोक कुमार गर्ग से जवाब भी मांगा। वह यह स्पष्ट नहीं कर पाए कि क्या सूचना देने का कोई लिखित सरकारी निर्देश मौजूद था या नहीं।
जस्टिस हरकेश मनुजा ने कहा कि इस प्रकार की प्रक्रिया से उम्मीदवारों के अधिकारों का हनन होता है। कोर्ट ने (vigilance enquiry LDC recruitment) के आदेश दिए और रजिस्ट्रार विजिलेंस को निर्देशित किया कि वह DHBVN और UHBVN में भर्ती सूचना देने की नीति व प्रक्रियाओं की जांच करें।










