भिवानी स्थित हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड (HBSE) ने प्रदेश के लाखों स्कूली छात्रों और उनके अभिभावकों को एक बड़ी राहत दी है। नए शैक्षणिक सत्र से हरियाणा के सरकारी और मान्यता प्राप्त स्कूलों में पढ़ने वाले 9वीं से 12वीं कक्षा के छात्रों के हाथों में ‘स्मार्ट पुस्तकें’ होंगी। महंगी ट्यूशन के भारी खर्च और शिक्षकों पर निर्भरता को खत्म करने के लिए बोर्ड ने किताबों के हर सवाल के साथ एक खास क्यूआर (QR) कोड जोड़ने का फैसला लिया है।
QR कोड स्कैन करते ही शुरू होगी क्लास
मेघालय शिक्षा बोर्ड की तर्ज पर तैयार की जा रही इन स्मार्ट किताबों ने पढ़ाई का पारंपरिक तरीका पूरी तरह बदल दिया है। घर पर पढ़ाई करते समय अगर किसी छात्र को कोई प्रश्न समझ नहीं आता है, तो उसे सिर्फ अपने स्मार्टफोन से किताब पर छपा QR कोड स्कैन करना होगा। कोड स्कैन होते ही मोबाइल स्क्रीन पर तुरंत उस टॉपिक का पूरा वीडियो लेक्चर चालू हो जाएगा। बोर्ड अध्यक्ष डॉ. पवन कुमार ने स्पष्ट किया है कि इन स्मार्ट पुस्तकों के साथ छात्रों को वर्चुअल लैब की सुविधा भी मुफ्त में मिलेगी।
AI और इंटरनेट से सीधे जुड़ेंगे हरियाणा के छात्र
वर्चुअल लैब के जरिए ग्रामीण अंचलों के छात्र भी सीधे तौर पर इंटरनेट, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक तकनीकी गतिविधियों की सटीक जानकारी हासिल कर सकेंगे। हरियाणा न्यूज पोस्ट को मिली जानकारी के अनुसार, इन हाई-टेक पुस्तकों का प्रकाशन कार्य अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। जल्द ही ये किताबें बाजारों और स्कूलों में उपलब्ध होंगी, जिससे आम और गरीब परिवारों के बच्चों को महंगी कोचिंग क्लासेज से सीधा छुटकारा मिलेगा।
अब 5 की जगह 6 विषयों पर बनेगा रिजल्ट
स्मार्ट किताबों के साथ-साथ शिक्षा बोर्ड ने अपने पासिंग फॉर्मूले में भी एक बड़ा फेरबदल किया है। नए सत्र से राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2010 के तहत 9वीं और 10वीं कक्षाओं में त्रिभाषीय फार्मूला सख्ती से लागू कर दिया जाएगा। अब तक प्रदेश में छात्रों का मूल्यांकन केवल पांच विषयों के आधार पर होता था, लेकिन अब उन्हें 6 विषयों की परीक्षा पास करनी होगी। छात्रों को अनिवार्य रूप से हिंदी और अंग्रेजी के अलावा संस्कृत, पंजाबी या उर्दू में से किसी एक अतिरिक्त भाषा को चुनना होगा।
मूक-बधिर बच्चों के लिए साइन लैंग्वेज बनी विषय
शिक्षा बोर्ड ने प्रदेश के 8 विशेष विद्यालयों में पढ़ने वाले मूक-बधिर (सुनने और बोलने में अक्षम) बच्चों के भविष्य को लेकर भी एक बेहद संवेदनशील फैसला लिया है। इन विशेष बच्चों की सहूलियत के लिए अब एक अलग पठन-पाठन योजना तैयार की गई है। जग मार्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, मूक-बधिर छात्रों को अब अपनी भाषा चुनने की पूरी आजादी मिलेगी और ‘इंडियन साइन लैंग्वेज’ को उनके पाठ्यक्रम में एक नियमित विषय के रूप में पढ़ाया जाएगा।
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