International Olympic Day The dream of children in Chandigarh schools now extends to the Olympics: इंटरनेशनल ओलिंपिक डे 23 जून को है। इस बार की थीम है ‘लेट्स मूव’ दुनियाभर में इस दिन को ऐसे सेलिब्रेट किया जाना है कि आप सैर कर रहे हैं, दौड़ रहे हैं, साइक्लिंग कर रहे हैं या डांस… इसे प्लस 1 करें, यानी अपने साथ किसी एक को उस एक्टिविटी में जोड़ें।
इसी तर्ज पर चंडीगढ़ के 111 गवर्नमेंट स्कूलों में ओलिंपिक वैल्यू एजुकेशन प्रोग्राम शुरू किया गया है, ताकि ग्रासरूट लेवल पर स्पोर्ट्स कल्चर को बढ़ावा मिले। इसके लिए अभिनव बिंद्रा फाउंडेशन ट्रस्ट और प्रशासन के बीच एमओयू हुआ है। इस पहल का मकसद है एक्सीलेंस, रेस्पेक्ट, फ्रेंडशिप जैसी ओलिंपिक वैल्यूज को स्कूल करिकुलम में शामिल किया जाए।
इससे बच्चे लीडरशिप और टीमवर्क को बेहतर तरीके से सीखेंगे। इसके तहत पहले 222 टीचर्स को ट्रेनिंग दी गई है। अब 1 जुलाई से बिंद्रा फाउंडेशन की टीम स्कूलों का दौरा कर एक्टिविटी का जायजा लेगी। इसकी वीडियोग्राफी होगी जिसे बिंद्रा खुद परखेंगे। वह खुद भी स्कूलों में जाकर अपनी जर्नी साझा करेंगे, ताकि बच्चे ओलिंपिक तक के सफर को समझ सकें।
ऐसी है OVEP ट्रेनिंग
मार्च 2025 से इसे एकेडमिक कैलेंडर में शेड्यूल किया गया। अप्रैल-मई में गर्मियों की छुट्टी से पहले एक्टीविटीज शुरू की गई। टीचर्स के लिए मई-जून से पहले एजुकेशन सेशन लगाए गए स्टूडेंट्स की खेल जरूरतों को पूरा किया करने का टारगेट है। स्टूडेंट्स फिट रहें, इसके लिए फिजिकल एक्टिविटी में बढ़ोतरी की गई है। क्लास और मैदान में व्यवहार कैसा हो, अनुशासन कैसे लाएं, यह भी सिखाया जा रहा है। टैलेंट की पहचान कर स्टूडेंट्स को उस इवेंट में आगे बढ़ाना मकसद है। सेशन में शामिल एक टीचर ने कहा कि हमें इतनी जानकारी अपने समय पर नहीं थी, अगर होती तो शायद हम भी ओलिंपिक खेल सकते थे।
चंडीगढ़ में ऐसे जारी काम
टीचर्स के गेम हर टीचर ने गेम्स में हिस्सा लिया और बॉन्ड बनाना सीखा। नाम के साथ बॉल पासिंग गेम खेली ताकि बच्चे का नाम याद रहे।
स्पेशल एथलीट्स के लिए अलग ट्रेनिंग की एक हाथ या पैर बांधकर गेम में हिस्सा किया, ताकि चैलेंज का पता लगे।
ब्लाइंड एथलीट्स के लिए टीचर्स की आंखों को बंद रखा गया, ताकि वे बिना देखे गेम्स को खेलें। ऐसे में उन्हें चुनौतियों का पता रहे।
क्विज और कॉन्टेस्ट स्कूलों में वीकली और मंथली एक्टिविटी में क्विज व कॉन्टेस्ट कराए गए। इसमें प्लेयर्स को भारतीय मेडल विनर्स के बारे में बताया।
माइंड गेम के जरिए सभी को एक दूसरे के साथ जोड़ने का प्रयास किया गया। स्कूल के लास्ट वर्किंग डे पर पेरेंट्स की भी गेम्स हुईं।
अच्छी एजुकेशन और टॉप टैलेंट मिलेगा
हरसुहिंदर सिंह बराड़, डायरेक्टर स्कूल एजुकेशन, चंडीगढ़ ने बताया कि जो पैरामीटर सेट किए गए हैं हम उन्हें पूरा कर रहे हैं। टीचर्स को इसमें शामिल किया गया है और वो अपनी ट्रेनिंग कर चुके हैं। प्रिंसिपल की भी वर्कशॉप कराई। हम ज्यादा से ज्यादा बच्चों में ओलिंपिक वैल्यू लाने के लिए काम कर रहे हैं। टीचर्स स्कूल में इन वैल्यूज पर काम करेंगे, इससे हमें अच्छा टैलेंट मिलेगा।













