Kapil Dev Cricket Lessons, चंडीगढ़: वर्ल्ड कप विजेता कप्तान कपिल देव ने चंडीगढ़ के युवा क्रिकेटर्स को जिंदगी के अनमोल सबक सिखाए। चंडीगढ़ प्रीमियर लीग (सीपीएल) के 13 सितंबर को होने वाले फाइनल में शामिल होने का वादा कपिल ने किया था, लेकिन एशिया कप के लिए दुबई जाना पड़ा। फिर भी, उन्होंने यंग क्रिकेटर्स का दिल नहीं तोड़ा और गुरुवार को सेक्टर-38 के रानी लक्ष्मीबाई ऑडिटोरियम में उनसे मुलाकात की। इस दौरान कपिल ने अपनी जिंदगी और क्रिकेट के अनुभव साझा किए।
उन्होंने कहा, “चंडीगढ़ में एक अलग नशा है। मैं यहीं बड़ा हुआ, शायद यहीं न पैदा होता तो क्रिकेटर भी न बनता। आप लोग खुशकिस्मत हैं कि चंडीगढ़ जैसे शहर में खेल रहे हैं। यहां 15 मिनट में कहीं भी पहुंच सकते हैं। बड़े शहरों में इतनी सहूलियत नहीं मिलती।” कपिल ने माता-पिता को सलाह दी कि बच्चों को खेलने दें, सिफारिश न करें और मैदान पर न आएं। उन्होंने कहा, “हम प्लेयर को मंच दे सकते हैं, लेकिन उड़ान तो उन्हें खुद भरनी है। सिफारिश से ऊपर पहुंचे तो जिंदगी भर पछतावा रहेगा।”
खेल के साथ पढ़ाई भी जरूरी
युवा क्रिकेटर्स के सवालों का जवाब देते हुए कपिल ने बताया कि उन्हें पढ़ाई से ज्यादा खेल पसंद था। लेकिन आज उन्हें इस बात का मलाल है कि थोड़ी और पढ़ाई कर लेते तो बेहतर होता। उन्होंने युवाओं को सलाह दी, “खेल के साथ-साथ पढ़ाई को भी समय दो।” कपिल ने बताया कि जीत का जश्न टेम्पररी होता है। कप जीतने का सवाल पूछने पर उन्होंने हंसते हुए कहा, “क्लास में फर्स्ट आने जैसा अहसास होता है, लेकिन तीन दिन बाद फिर नया मैच आता है। जीत इतिहास बन जाती है, इसलिए इतिहास बनाने पर फोकस करो।”
इंजरी से बचाव और मेहनत का मंत्र
कपिल ने इंजरी से बचने के सवाल पर कहा, “मैदान पर डटे रहो, मेहनत करो। बिस्तर पर लेटे रहोगे तो इंजरी तो आएगी ही। एक्सरसाइज करो, इससे इंजरी कम होगी और आप उसका मुकाबला कर पाओगे।” बॉलिंग वर्कलोड पर कपिल ने पुराने दिनों को याद किया। उन्होंने बताया, “मेरे कोच कहते थे, 100 बॉल भी डालो तो कम है। इससे मांसपेशियां मजबूत हुईं। आज के कोच 20-30 बॉल डलवाते हैं, लेकिन मेहनत का कोई विकल्प नहीं।”
स्ट्रगल नहीं, गेम को एंजॉय करो
युवाओं ने जब कपिल से उनके स्ट्रगल के बारे में पूछा तो उन्होंने जवाब दिया, “मैंने कभी स्ट्रगल नहीं किया, मैंने खेल को एंजॉय किया। अगर प्रेशर लग रहा है तो खेल छोड़ दो।” कपिल ने बताया कि कोच की डांट और सजा प्लेयर को बेहतर बनाने के लिए होती है। उन्होंने हंसते हुए कहा, “हर कैच छूटने पर मैदान का चक्कर लगाना पड़ता था। एक दिन में 25-26 चक्कर तो हो ही जाते थे।”
हीरो से लेकर जिंदगी की सीख
कपिल ने अपने हीरो के बारे में बताया कि बचपन में स्कूल का हेड बॉय उनका हीरो था, जो कहीं भी जा सकता था। बाद में बड़े भाई और क्रिकेटर जीआर विश्वनाथ उनके रोल मॉडल बने। उन्होंने कहा, “मेरे हीरो बदलते रहे और मैं आगे बढ़ता रहा।” कपिल ने सीनियर्स की मदद को सबसे बड़ी सीख बताया। उन्होंने गावस्कर का जिक्र करते हुए कहा, “वो कहते थे कि 100 रन दो ओवर में नहीं बनते। पहले 15 रन बनाओ, फिर 30, छोटे-छोटे टारगेट बनाकर आगे बढ़ो।”
कभी हार न मानने का मंत्र
कपिल ने करियर की सबसे बड़ी सीख साझा करते हुए कहा, “जिंदगी में कभी हार मत मानो। कमजोर हो तो हार जाओगे, मजबूत हो तो जीत जाओगे। कमिटमेंट, विश्वास और अनुशासन ही सबकुछ है।” उन्होंने अपनी खराब आदतों का जिक्र करते हुए बताया कि वो कंचे और पतंग खेलते थे, जिससे उनकी फिटनेस बनी रही। लेकिन उन्होंने फिर जोर दिया, “24 घंटे खेलो, लेकिन पढ़ाई को मत भूलो।”













