Kurukshetra Grievance Redressal: Woman cried in front of minister, 11 complaints resolved: कुरुक्षेत्र शिकायत निवारण (Kurukshetra Grievance Redressal) की हालिया बैठक में एक भावुक और मानवीय दृश्य देखने को मिला।
लघु सचिवालय में आयोजित जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक में एक पीड़ित महिला अपनी जमीन की तक्सीम (Land Partition) की समस्या को लेकर फूट-फूटकर रो पड़ी।
डेढ़-दो साल से इंसाफ की आस में भटक रही इस महिला की व्यथा सुनकर मंत्री राजेश नागर ने तुरंत कार्रवाई की। उन्होंने न केवल 15 में से 11 शिकायतों का समाधान किया, बल्कि एक जरूरतमंद महिला का बिजली बिल (Electricity Bill) भी अपनी जेब से चुकाया। यह घटना प्रशासन की संवेदनशीलता और जवाबदेही को दर्शाती है।
पीड़ित महिला की आपबीती: डेढ़ साल की लंबी लड़ाई Kurukshetra Grievance Redressal
लघु सचिवालय में आयोजित बैठक में एक महिला ने अपनी जमीन की तक्सीम (Land Partition) से जुड़ी शिकायत रखी। डेढ़ से दो साल तक प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर काटने के बाद भी उसे इंसाफ नहीं मिला था। अपनी बात रखते हुए वह भावुक हो गई और फफक-फफककर रो पड़ी। उसकी पीड़ा ने सभी का ध्यान खींचा।
मंत्री राजेश नागर ने तुरंत अधिकारियों को इस मामले में त्वरित कार्रवाई (Prompt Action) का निर्देश दिया। यह दृश्य आम लोगों की समस्याओं और प्रशासनिक सुस्ती को उजागर करता है। महिला की यह कहानी कई लोगों की परेशानियों का प्रतिबिंब है।
15 में से 11 शिकायतों का समाधान
जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक में कुल 15 शिकायतें (Grievances) सामने आईं। इनमें 7 पुरानी और 8 नई थीं। मंत्री राजेश नागर ने बताया कि पुरानी शिकायतों में से 5 और नई शिकायतों में से 6 का मौके पर ही निपटारा (Resolved) कर दिया गया।
एक अन्य मामले में, एक जरूरतमंद महिला का बिजली बिल बकाया था। मंत्री ने सहानुभूति दिखाते हुए बिल का भुगतान (Bill Payment) अपनी जेब से किया। यह कदम उनकी संवेदनशीलता को दर्शाता है। विधायक अशोक अरोड़ा ने भी बिजली विभाग की लापरवाही पर सवाल उठाए, खासकर लोड बढ़ाने के लिए सिक्योरिटी जमा होने के बावजूद गलत बिलिंग (Incorrect Billing) की समस्या पर।
प्रशासन की जवाबदेही और आमजन की उम्मीद
यह बैठक न केवल शिकायतों के समाधान (Grievance Resolution) के लिए महत्वपूर्ण थी, बल्कि यह भी दिखाती है कि प्रशासन लोगों की समस्याओं के प्रति कितना गंभीर है। मंत्री और विधायक की सक्रियता से कई लोगों को तुरंत राहत मिली।
हालांकि, कुछ शिकायतें अभी भी लंबित हैं। यह घटना आम लोगों को यह भरोसा देती है कि उनकी आवाज सुनी जा रही है। भविष्य में ऐसी बैठकों से और अधिक समस्याओं का समाधान होने की उम्मीद है। लोगों से अपील है कि वे अपनी शिकायतें बिना डर के दर्ज करें।











