New Law: Haryana Land Revenue Act: 15 lakh farmers get strong relief for division of common land: हरियाणा के ग्रामीण इलाकों में साझी जमीन के बंटवारे को लेकर एक नया अध्याय शुरू हुआ है। हरियाणा भू-राजस्व कानून (Haryana Land Revenue Act) में हाल ही में हुए संशोधन ने लाखों किसानों के लिए राहत की सांस दी है। अब पति-पत्नी के अलावा खून के रिश्तेदार भी साझे खाते की जमीन का बंटवारा कर सकेंगे।
यह ऐतिहासिक विधेयक हरियाणा विधानसभा में गुरुवार को पारित हो गया, जिसके बारे में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री विपुल गोयल ने दावा किया कि इससे 14 से 15 लाख किसानों को सीधा लाभ (benefit) मिलेगा। यह कानून न केवल जमीन विवादों को कम करेगा, बल्कि ग्रामीण परिवारों में सामाजिक समरसता (social harmony) को भी बढ़ावा देगा। आइए, इस कानून की खासियत और इसके प्रभाव को समझें।
हरियाणा भू-राजस्व कानून: एक नया कदम New Law
हरियाणा में साझी जमीन के बंटवारे को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहे थे। सहायक कलेक्टर और तहसीलदार की अदालतों में एक लाख से अधिक मामले लंबित हैं, जो परिवारों के बीच तनाव का कारण बने हुए हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की सरकार ने 2021 में धारा 111-क जोड़कर साझी जमीन के बंटवारे को आसान बनाने की कोशिश की थी, लेकिन उस समय खून के रिश्तेदारों और पति-पत्नी को इस प्रक्रिया से बाहर रखा गया था। इस कमी को दूर करते हुए नए हरियाणा भू-राजस्व कानून ने खून के रिश्तेदारों को भी बंटवारे का अधिकार दिया है। यह संशोधन उन किसानों के लिए वरदान साबित होगा, जो लंबे समय से अपनी हिस्सेदारी के लिए कानूनी जंग (legal battles) लड़ रहे हैं।
किसानों को मिलेगी राहत: कैसे और क्यों?
नया कानून साझी जमीन के बंटवारे को सरल और निष्पक्ष बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। पहले, खून के रिश्तेदारों को साझी जमीन में हिस्सा लेने के लिए जटिल कानूनी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता था, जिससे मुकदमेबाजी (land disputes) बढ़ रही थी।
अब धारा 111-क के तहत खून के रिश्तेदार भी अपनी हिस्सेदारी का दावा कर सकते हैं। यह प्रावधान पति-पत्नी को छोड़कर सभी सह-स्वामित्वकर्ताओं पर लागू होगा। इस बदलाव से अनुमानित 14-15 लाख किसान लाभान्वित होंगे, जो अपनी जमीन का स्पष्ट हिस्सा प्राप्त कर खेती या अन्य उत्पादक कार्यों में उसका बेहतर उपयोग कर सकेंगे। यह कानून ग्रामीण अर्थव्यवस्था (rural economy) को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
बंटवारे की प्रक्रिया: पारदर्शी और समयबद्ध
नए कानून ने साझी जमीन के बंटवारे की प्रक्रिया को और अधिक सुगम और पारदर्शी बनाया है। अधिनियम की धारा 114 के अनुसार, राजस्व अधिकारी (revenue officer) यह सुनिश्चित करेंगे कि सभी सह-स्वामित्वकर्ता बंटवारे की प्रक्रिया में शामिल हों।
इसके लिए सहायक कलेक्टर (assistant collector) या तहसीलदार (tehsildar) नोटिस जारी करेंगे, और सभी संयुक्त मालिकों को छह महीने के भीतर आपसी सहमति (mutual consent) से बंटवारे का करार पेश करना होगा। अगर इस अवधि में सहमति नहीं बनती, तो राजस्व अधिकारी अतिरिक्त छह महीने का समय दे सकते हैं। सहमति बनने पर धारा 111-क (3) और धारा 123 के तहत बंटवारे का इंतकाल पूरा होगा। यह प्रक्रिया न केवल तेज है, बल्कि किसानों के लिए सुविधाजनक (convenient) भी है।
पुराने नियमों की चुनौतियां और नया समाधान
पहले के नियमों में खून के रिश्तेदारों को साझी जमीन के बंटवारे से बाहर रखने के कारण कई परिवारों को लंबी कानूनी प्रक्रियाओं का सामना करना पड़ता था। इससे न केवल समय और धन की बर्बादी होती थी, बल्कि परिवारों में तनाव भी बढ़ता था।
नए संशोधन ने इन समस्याओं को दूर करते हुए सभी सह-स्वामित्वकर्ताओं को समान अवसर दिया है। पति-पत्नी को इस प्रक्रिया से बाहर रखने का फैसला भी समझदारी भरा है, क्योंकि इससे पारिवारिक विवादों को बढ़ने से रोका जा सकेगा। यह कानून न केवल कानूनी प्रक्रिया को सरल बनाता है, बल्कि सामाजिक एकता को भी प्रोत्साहित करता है।
सामाजिक और आर्थिक प्रभाव
हरियाणा भू-राजस्व कानून का यह संशोधन ग्रामीण हरियाणा में सामाजिक और आर्थिक बदलाव की नींव रखेगा। साझी जमीन के बंटवारे से परिवारों के बीच संपत्ति को लेकर होने वाले झगड़े कम होंगे, जिससे सामाजिक समरसता बढ़ेगी।
साथ ही, यह कानून छोटे और मध्यम किसानों को अपनी जमीन का स्पष्ट हिस्सा देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाएगा। किसान अपनी जमीन का उपयोग खेती, निवेश या अन्य उत्पादक कार्यों के लिए कर सकेंगे, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा। यह कानून उन किसानों के लिए विशेष रूप से लाभकारी है, जो लंबे समय से अपनी हिस्सेदारी के लिए इंतजार कर रहे थे।
भविष्य की राह: किसानों के लिए नई संभावनाएं
यह नया कानून हरियाणा के ग्रामीण क्षेत्रों में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देगा। यह न केवल वर्तमान में जमीन विवादों को कम करेगा, बल्कि भविष्य में भी ऐसी समस्याओं को रोकने में मदद करेगा।
किसान संगठनों ने इस पहल की सराहना की है, और उम्मीद है कि यह ग्रामीण हरियाणा में समृद्धि और विकास का नया दौर शुरू करेगा। यह कानून किसानों को अपनी जमीन का बेहतर उपयोग करने का अवसर देगा, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।











