हरियाणा के पानीपत जिले के नौल्था गांव में मासूम विधि की हत्या के मामले में पुलिस ने 36 घंटे के भीतर आरोपित को पकड़कर केस का खुलासा कर दिया है। जांच में सामने आया कि बच्ची की हत्या उसी की रिश्तेदार चाची पूनम ने की, जिसके बाद गांव और परिवार दोनों सदमे में हैं।
कैसे पकड़ में आई संदिग्ध महिला
शुरुआत में मामला गुमशुदगी जैसा लग रहा था, लेकिन जैसे ही बच्ची का शव घर के स्टोर रूम में टब में मिला, पुलिस को हत्या की आशंका हुई।
घटनास्थल पर पहुंचे अधिकारियों को घर में मौजूद महिलाओं के बयानों में विरोधाभास दिखा, वहीं पूनम के कपड़े भी भीगे हुए मिले, जिसने पुलिस का शक और गहरा कर दिया।
एक वरिष्ठ जांच अधिकारी के मुताबिक
“पूनम के बयान लगातार बदल रहे थे। उसके हावभाव सामान्य दिखाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन कपड़ों और वीडियो साक्ष्यों ने हमें दिशा दी।”
शादी की वीडियो बनी अहम सबूत
1 दिसंबर को घर में विवाह समारोह था। महिलाएं बारात की विदाई तक साथ थीं।
पुलिस ने समारोह की वीडियो फुटेज खंगाली जिसमें पूनम दिखाई ही नहीं दी। वहीं, अन्य महिलाएं बता रही थीं कि लौटते ही वह घर में मौजूद थी।
यह समय की विसंगति पुलिस के लिए निर्णायक साबित हुई।
जांच के दौरान बयान बदलती रही आरोपी
पुलिस जब पूनम से अलग पूछताछ करने लगी तो उसने पहले कहा कि उसने विधि को देखा ही नहीं।
कुछ समय बाद उसने दावा किया कि बच्ची को ऊपर जाते देखा था। बयान बदलने और कपड़े गीले होने पर शक लगभग पुख्ता हो गया।
कड़ाई से पूछताछ करने पर महिला टूट गई और अपराध स्वीकार कर लिया।
सूत्रों के अनुसार उसने इससे पहले की गई अन्य वारदातों का भी संकेत दिया, जिसके बाद पुलिस ने जांच का दायरा और बढ़ाया है।
फोरेंसिक साक्ष्य ने भी जोड़ा कड़ी
पुलिस ने पूनम पर कार्रवाई सिर्फ बयान के आधार पर नहीं की।
घर के टब से पानी के नमूने, उसके कपड़ों और नाखूनों के नमूने लैब भेजे गए हैं ताकि वैज्ञानिक तरीके से अपराध साबित हो सके।
तकनीकी जांच में जुटी एक फोरेंसिक विशेषज्ञ का कहना है
“नाखूनों में मिले रेशे और टब के पानी का परीक्षण इस केस के लिए महत्वपूर्ण हैं।”
घटना क्यों महत्वपूर्ण है
यह मामला बताता है कि हत्या जैसे अपराधों में परिवार के भीतर अपराधी होने की संभावना को भी गंभीरता से देखना पड़ता है।
पुलिस ने बिना देरी किए तकनीकी और मनोवैज्ञानिक जांच अपनाकर रिकॉर्ड समय में सत्य सामने लाया।
क्रिमिनल साइकोलॉजी विशेषज्ञ कहते हैं,
“अक्सर ऐसे मामलों में दोषी लोग सामान्य दिखने की कोशिश करते हैं लेकिन उनके व्यवहार में subtle contradictions उन्हें पकड़वा देते हैं।”
आगे क्या
आरोपी महिला को गिरफ्तार कर लिया गया है। फोरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद पुलिस आरोप पत्र दायर करेगी और अदालत में मामले की सुनवाई शुरू होगी।
जांच एजेंसियां महिला की स्वीकारोक्तियों के आधार पर पुरानी घटनाओं की भी जांच करने की तैयारी में हैं।













