PGI surgery Operation time increased in Chandigarh, relief to patients: पीजीआई सर्जरी (PGI Surgery) के लिए चंडीगढ़ के पंजाब ग्रेजुएट मेडिकल इंस्टीट्यूट (PGI) ने ऑपरेशन थिएटर का समय बढ़ा दिया है। इस बदलाव से हजारों मरीजों को बड़ी राहत मिली है। पहले जहां सर्जरी के लिए 2 से 6 महीने का इंतजार करना पड़ता था, अब सैकड़ों मरीजों को जल्दी ऑपरेशन का मौका मिल रहा है। पिछले तीन महीनों में 21 हजार से अधिक सर्जरी हुईं। यह कदम मरीजों और रेजिडेंट डॉक्टरों के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है। आइए, इस पहल को विस्तार से समझें।
ऑपरेशन समय में वृद्धि
अप्रैल से पीजीआई ने इलेक्टिव सर्जरी (Elective Surgery) का समय सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक कर दिया है। पहले दोपहर तक सीमित रहने वाली सर्जरी अब देर शाम तक हो रही हैं। इससे हर विभाग में रोजाना दो से तीन अतिरिक्त सर्जरी संभव हुई हैं। सीनियर प्रोफेसर के अनुसार, यह बदलाव लंबे समय से जरूरी था। अब मरीजों को समय पर इलाज मिल रहा है। मार्च की तुलना में अप्रैल में मेजर सर्जरी में 151 की बढ़ोतरी हुई। यह गंभीर मरीजों के लिए बड़ी राहत है।
PGI surgery: रेजिडेंट डॉक्टरों को प्रशिक्षण का लाभ
पीजीआई सर्जरी (PGI Surgery) के समय बढ़ने से रेजिडेंट डॉक्टरों को भी फायदा हुआ है। वे अब सीनियर सर्जनों के साथ अधिक समय तक काम कर रहे हैं। इससे उनका प्रशिक्षण (Resident Doctor Training) बेहतर हो रहा है। सीनियर प्रोफेसर ने बताया कि रेजिडेंट डॉक्टरों को अधिक सर्जरी में हिस्सा लेने का मौका मिल रहा है। यह उनके कौशल को निखार रहा है। यह बदलाव भविष्य के लिए कुशल सर्जन तैयार करने में मदद करेगा।
प्रमुख विभागों को मिली राहत
इस पहल का सबसे ज्यादा फायदा प्लास्टिक सर्जरी, गायनी और ऑर्थोपेडिक्स विभागों को हुआ है। पहले इन विभागों की सर्जरी दोपहर 2-3 बजे तक खत्म हो जाती थी। अब रात 8 बजे तक ऑपरेशन हो रहे हैं। इससे सर्जरी की संख्या बढ़ी है। हर दिन 450 से 500 छोटी-बड़ी सर्जरी (Elective and Emergency Surgery) हो रही हैं। अप्रैल से जून तक 21 हजार सर्जरी हो चुकी हैं। यह मरीजों के लिए समय पर इलाज सुनिश्चित कर रहा है।
पीजीआई सर्जरी (PGI Surgery) के समय में वृद्धि ने मरीजों का वेटिंग टाइम (Waiting Time) काफी कम किया है। पहले लंबा इंतजार गंभीर मरीजों के लिए परेशानी का कारण था। अब जल्दी सर्जरी से मरीजों को राहत मिल रही है। यह कदम पीजीआई की विश्वसनीयता को और मजबूत करता है। मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल रही हैं। रेजिडेंट डॉक्टरों को प्रशिक्षण का लाभ भी इस पहल का हिस्सा है। यह बदलाव स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा दोनों के लिए एक मील का पत्थर है।












